दुनिया भर में छा गई भारत की यह संस्था, मिला सबसे बड़ा अवार्ड
भारत
चेतना मंच
01 Sep 2025 02:50 PM
एशिया के सबसे बड़े अवार्ड का नाम रेमन मैग्सेसे अवार्ड (Ramon Magsaysay Award) है। रेमन मैग्सेसे अवार्ड Ramon Magsaysay Award की तुलना दुनिया के सबसे बड़े अवार्ड नोबेल अवार्ड से की जाती है। दुनिया के ज्यादातर नागरिकों का स्पष्ट मत है कि रेमन मैग्सेसे अवार्ड (Ramon Magsaysay Award) की हैसियत एशिया में वही हैसियत है जो विश्व में नोबेल अवार्ड की है। हाल ही में रेमन मैग्सेसे अवार्ड-2025 की घोषणा की गई है। वर्ष-2025 को रेमन मैग्सेसे अवार्ड (Ramon Magsaysay Award) पाने वालों में भारत में सक्रिय एक बड़ी संस्था का नाम भी शामिल है। वर्ष-2025 का रेमन मैग्सेसे अवार्ड पाने वाली भारतीय संस्था का नाम ‘एजुकेट गल्र्स’ है। Ramon Magsaysay Award
भारत की एजुकेट गर्ल्स संस्था ने बढ़ाया भारत का सम्मान
आपको बता दें कि रेमन मैग्सेसे अवार्ड-2025 की घोषणा पूरी दुनिया प्रतीक्षा कर रही थी। हाल ही में इस प्रतिष्ठित अवार्ड की घोषणा के अनुसार वर्ष 2025 का रेमन मैग्सेसे अवार्ड भारत की प्रसिद्ध संस्था ‘एजुकेट गर्ल्स’ के साथ ही साथ मालदीव की शाहिना अली तथा फिलीपींस के फादर फ्लावियानो विलानुएवा को देने की घोषणा की गई है। भारत की संस्था ‘एजुकेट गर्ल्स’ को एशिया का सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार मिलने पर दुनिया भर में भारत की खूब चर्चा हो रही है। भारत की संस्था ने रेमन मैग्सेसे अवार्ड हासिल करके पूरी दुनिया में भारत का मान-सम्मान बढ़ाने का बड़ा काम किया है। इसी कारण यह आवश्यक हो जाता है कि भारत की इस प्रसिद्ध संस्था के विषय में आपको पूरी जानकारी दे दी जाए।
भारत की बेटियों को शिक्षित बनाने का काम कर रही है ‘एजुकेट गर्ल्स ’ संस्था
जैसा कि इस संस्था के नाम ‘एजुकेट गर्ल्स ’से ही जाहिर होता है कि यह संस्था भारत की बेटियों को शिक्षित करने का काम कर रही है। भारत की जो बेटियां किसी भी कारण से शिक्षा प्राप्त करने से वंचित रह जाती हैं उन बेटियों को शिक्षा का अधिकार दिलाने का बहुत बड़ा बीड़ा ‘एजुकेट गल्र्स’ ने उठा रखा है। ‘एजुकेट गर्ल्स’ की स्थापना सफीना हुसैन ने की थी। शुरूआती दिनों में संस्था मुस्लिम समाज में अधिक सक्रिय थी। धीरे-धीरे इस संस्था ने भारत के हर वर्ग में कामकाज शुरू कर दिया। ‘एजुकेट गल्र्स’की संस्थापक सफीना हुसैना ने बताया है कि भारत की प्रमुख सामाजिक संस्था एजुकेट गर्ल्स को 2025 का रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड से सम्मानित किया गया हैं।
एशिया का यह सर्वोच्च सम्मान पहली बार किसी भारतीय संस्था को मिला है। यह पुरस्कार एजुकेट गर्ल्स को बालिकाओं और युवतियों की शिक्षा के समाज की अतार्किक सांस्कृतिक धारणाओं को चुनौती देने, उन्हें निरक्षरता से मुक्त करने और उन्हें कौशल, हिम्मत और आत्मनिर्भरता देने के लिए दिया गया है। एजुकेट गर्ल्स संस्था अब उस गौरवशाली पंक्ति का हिस्सा बन चुकी है, जिसमें सत्यजीत रे, एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी, किरण बेदी, विनोबा भावे, दलाई लामा, मदर टेरेसा और ऑस्कर विजेता हायाओ मियाज़ाकी जैसी विश्वप्रसिद्ध विभूतियाँ शामिल हैं।
भारत की बेटियों को दिया रेमन मैग्सेसे अवार्ड मिलने का पूरा श्रेय
एजुकेट गर्ल्स की संस्थापक सफीना हुसैन ने कहा - यह उपलब्धि हमारी टीम, बालिका स्वयंसेवकों, पार्टनर्स, समर्थकों और सबसे बढक़र उन बच्चियों के नाम है, जिन्होंने अपनी सबसे बड़ी ताकत, शिक्षा को फिर से हासिल किया। आने वाले दस वर्षों में एजुकेट गर्ल्स एक करोड़ से भी ज़्यादा शिक्षार्थियों तक पहुँचने का लक्ष्य रखता है। भारत के इस मॉडल को अब दुनिया के अन्य हिस्सों में भी साझा करने की योजना है, ताकि हर बच्ची को उसका शिक्षा के हक दे सके। हमें पूरा यकीन है कि जब एक लडक़ी पढ़ती है, तो उसका असर सिर्फ उसकी ज़िंदगी तक सीमित नहीं रहता, वह अपने साथ पूरे समाज को आगे बढ़ाती है।
एजुकेट गर्ल्स की सीईओ गायत्री नायर लोबो ने कहा - हमारे लिए शिक्षा सिर्फ़ विकास का साधन नहीं, बल्कि हर लडक़ी का बुनियादी अधिकार है। यह सम्मान इस बात का प्रमाण है कि जब सरकार, कॉरपोरेट, डोनर्स और समुदाय मिलकर काम करते हैं, तो गहरी सामाजिक और संरचनात्मक चुनौतियों को बदला जा सकता है। हम भारत सरकार के प्रयासों और सहयोग के लिए आभारी हैं, जिन्होंने इस मिशन को संभव बनाया। साथ ही, मालदीव की शाहिना अली और फिलीपींस के फादर फ्लावियानो विलनुएवा को भी हार्दिक बधाई, जिनके काम ने हम सभी को प्रेरित किया है।
18 साल में 20 लाख से ज्यादा बेटियों को फायदा कर चुकी है रेमन मैग्सेसे अवार्ड विनर संस्था
2007 में स्थापित एजुकेट गर्ल्स आज तक 30,000 से अधिक गाँवों में अपनी पहुँच बना चुकी है। 55,000 से ज्यादा सामुदायिक स्वयंसेवकों के सहयोग से संस्था ने 20 लाख से अधिक बशिक्षा से जोडऩे के लिए प्रेरित किया है और 24 लाख से ज्यादा बच्चों की पढ़ाई को बेहतर बनाया है। आने वाले समय में एजुकेट गर्ल्स का लक्ष्य एक करोड़ से अधिक बच्चों तक पहुँचना है, ताकि शिक्षा के माध्यम से गऱीबी और अशिक्षा के चक्र को तोड़ा जा सके। एजुकेट गर्ल्स एक सामाजिक संस्था है जो राज्य सरकारों के साथ मिलकर ग्रामीण और शैक्षिक रूप से पिछड़े इलाकों में लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देती है। इसका काम ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’, ‘शिक्षा का अधिकार अधिनियम’ और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों के अनुरूप है। 2007 से अब तक, संस्था ने राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार के 30 हज़ार से अधिक गांवों में 20 लाख से ज़्यादा लड़कियों का स्कूल में दाखिला करवाने मे मदद की है। इसके साथ ही 55,000 से अधिक सामुदायिक वालंटियर्स का नेटवर्क भी खड़ा किया है।
नोबेल पुरस्कार के बराबर प्रतिष्ठा है रेमन मैग्सेसे अवार्ड की
रेमन मैग्सेसे अवार्ड के विषय में पूरी जानकारी के बिना यह समाचार अधूरा रह जाएगा। आपको बता दें कि दुनिया में नोबेल पुरस्कार को सबसे बड़ा अवार्ड माना जाता है। रेमन मैग्सेसे अवार्ड की एशिया में वही प्रतिष्ठा है जो विश्व में नोबेल पुरस्कार की प्रतिष्ठा है।1958 में शुरू किया गया रेमन मैग्सेसे पुरस्कार को एशिया में उत्कृष्ट नेतृत्व और सामुदायिक योगदान को मान्यता देता है। इस पुरस्कार की स्थापना 1957 में अमेरिका के धनी रॉकफेलर परिवार द्वारा स्थापित रॉकफेलर ब्रदर्स फंड के ट्रस्टियों और फिलीपींस सरकार द्वारा की गई थी। पिछले दशकों में 300 से ज्यादा संगठनों और व्यक्तियों को इस पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।
यह पुरस्कार हर साल 31 अगस्त को फिलीपींस के पूर्व राष्ट्रपति रेमन मैग्सेसे की जयंती पर दिया जाता है। आरएमएएफ का न्यासी बोर्ड एक गोपनीय नामांकन प्रक्रिया और अपनी जांच के बाद विजेताओं का चयन करता है। विजेताओं को एक प्रमाण पत्र और एक पदक प्रदान किया जाता है जिस पर रेमन मैग्सेसे की उभरी हुई छवि दाईं ओर अंकित होती है। आपको बता दें कि जापानी कब्जे का विरोध करने वाले एक गुरिल्ला नेता के रूप में मैग्सेसे की बहादुरी और नेतृत्व क्षमता के कारण उन्हें सैन्य गवर्नर नियुक्त किया गया था।
1946 में वे लिबरल पार्टी के नेतृत्व में फिलीपीन प्रतिनिधि सभा के लिए चुने गए, जहां उन्होंने 1950 में राष्ट्रीय रक्षा सचिव नियुक्त होने से पहले दो कार्यकाल तक कांग्रेस सदस्य के रूप में कार्य किया। 30 दिसंबर, 1953 को उन्हें फिलीपींस की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी, नेशनलिस्ट पार्टी का अध्यक्ष चुना गया। हालांकि राष्ट्रपति बनने के कुछ ही समय बाद 1957 में एक हवाई दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई। उनकी मृत्यु के बाद ही उनके नाम पर रेमन मैग्सेसे अवार्ड की शुरूआत की गई थी। Ramon Magsaysay Award