
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में रावी नदी के उफान ने भारी तबाही मचा दी है। नारोवाल जिले में स्थित ऐतिहासिक करतारपुर कॉरिडोर पूरी तरह जलमग्न हो गया है। बुधवार सुबह बाढ़ का पानी गुरुद्वारा दरबार साहिब तक पहुंच गया, जिससे परिसर में मौजूद करीब 300 श्रद्धालु फंस गए। हालात की गंभीरता को देखते हुए पाकिस्तानी सेना को बचाव कार्य में लगाया गया है। Pakistan News
स्थानीय प्रशासन और इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि गुरुद्वारे के प्रांगण और मुख्य सीढ़ियां पूरी तरह डूब चुकी हैं। परिसर के कुछ हिस्सों में पानी की गहराई लगभग तीन फीट तक पहुंच गई है। अधिकारियों का कहना है कि जलनिकासी और सफाई का काम पूरा होने के बाद ही श्रद्धालुओं के लिए दर्शन फिर से शुरू किए जा सकेंगे।
‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ की रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित जिले नारोवाल, लाहौर, फैसलाबाद, ओकारा, कसूर और सियालकोट हैं। राहत एवं बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है। अब तक 32 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। केवल ननकाना साहिब से ही 700 से ज्यादा लोगों को बुधवार तक रेस्क्यू किया गया। नारोवाल में राहत कार्य के लिए 14 नावें भेजी गई हैं। पंजाब पुलिस के महानिरीक्षक डॉ. उस्मान अनवर ने बताया कि मुख्यमंत्री मरियम नवाज शरीफ के आदेश पर सभी जिलों में पुलिस को हाई अलर्ट पर रखा गया है। लाहौर, ननकाना साहिब और शेखपुरा में भी लोगों को निकालने का काम तेजी से किया जा रहा है।
करतारपुर कॉरिडोर को नवंबर 2019 में खोला गया था, ताकि भारतीय सिख श्रद्धालु बिना वीजा पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारा दरबार साहिब के दर्शन कर सकें। यह वही पवित्र स्थल है, जहां गुरुनानक देव जी ने 1504 में करतारपुर की स्थापना की थी और रावी नदी के तट पर अपने अंतिम समय तक साधना की थी। सिख समुदाय के लिए यह स्थान सबसे पावन तीर्थों में गिना जाता है। Pakistan News