"इंडिया नहीं होता तो मालदीव डिफॉल्टर हो जाता" : पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद का खुलासा
Relationship With Maldives
भारत
चेतना मंच
30 Nov 2025 11:23 PM
Relationship With Maldives : भारत और मालदीव के बीच रिश्ते अब फिर से गरमजोशी के दौर में लौटते दिख रहे हैं। इस कड़ी में एक बड़ा बयान सामने आया है, जिसने दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊर्जा दे दी है। मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने खुले मंच से स्वीकार किया है कि यदि भारत समय पर मदद नहीं करता, तो मालदीव की अर्थव्यवस्था दिवालिया (डिफॉल्ट) हो जाती।
भारत ने आर्थिक संकट में दी थी निर्णायक मदद
नशीद ने भारत को लेकर यह बयान मीडिया से एक बातचीत में दिया। उन्होंने कहा, "जब हम पर भारी कर्ज का बोझ था और आर्थिक संकट अपने चरम पर था, तब भारत ने बिना शर्त मदद की। अगर वह सहायता नहीं मिलती, तो आज हम डिफॉल्ट कर चुके होते।" उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25-26 जुलाई को मालदीव की यात्रा पर जा रहे हैं और मालदीव की आजादी की 60वीं वर्षगांठ समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करेंगे।
रिश्ता सिर्फ मदद नहीं, रणनीतिक साझेदारी भी है
नशीद ने भारत-मालदीव संबंधों को केवल आर्थिक सहायता तक सीमित न मानते हुए कहा कि यह रिश्ता भरोसे, स्थायित्व और सुरक्षा सहयोग पर आधारित है। उन्होंने कहा कि "समुद्री सुरक्षा, रक्षा सहयोग और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में भारत की भूमिका अहम है। ह्यइंडिया फर्स्टह्ण नीति अब पहले से अधिक मजबूत हो चुकी है।"
भारत की प्रगति का लाभ पड़ोसी भी उठा रहे हैं
भारत की अर्थव्यवस्था के चार ट्रिलियन डॉलर पार करने पर भी नशीद ने प्रसन्नता जताई और कहा कि यह विकास पूरे क्षेत्र को प्रभावित करता है। उन्होंने भारत की विकास साझेदारी नीति (डेवलपमेंट पार्टनरशिप मॉडल) की सराहना करते हुए कहा कि इससे मालदीव जैसे देशों को भी आगे बढ़ने का मौका मिला है।
व्यापारिक संबंधों में भी गहराई की जरूरत
नशीद ने विशेष रूप से भारत से मालदीव के मछली निर्यात को और बढ़ावा देने की बात कही और एक औपचारिक व्यापार समझौते की वकालत की जिससे दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों को नई दिशा मिल सके। पूर्व राष्ट्रपति के मुताबिक, पीएम मोदी की यात्रा केवल राजनीतिक संदेश नहीं बल्कि पर्यटन, व्यापार और संपर्क की दृष्टि से भी ऐतिहासिक साबित होगी। उन्होंने बताया कि भारत की मदद से बन रहा हनीमाडू एयरपोर्ट लगभग तैयार है और यह दक्षिण भारत से केवल एक घंटे की हवाई दूरी पर होगा। इससे उत्तरी मालदीव में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और व्यापार को भी गति मिलेगी।