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मध्य-पूर्व में हालात तेजी से तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी के ऐलान के बाद तेहरान ने बेहद सख्त प्रतिक्रिया दी है।

Middle East Crisis : मध्य-पूर्व में हालात तेजी से तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी के ऐलान के बाद तेहरान ने बेहद सख्त प्रतिक्रिया दी है। ईरान ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर उसके बंदरगाहों को निशाना बनाया गया, तो खाड़ी क्षेत्र का कोई भी पोर्ट सुरक्षित नहीं रहेगा।
ईरान के सरकारी प्रसारक आईआरआईबी और सैन्य नेतृत्व ने बयान जारी कर कहा कि फारस की खाड़ी और ओमान सागर में सुरक्षा या तो सबके लिए होगी या किसी के लिए नहीं। अगर ईरान के व्यापार या बंदरगाहों पर हमला हुआ, तो जवाब पूरे क्षेत्र को प्रभावित होना पड़ेगा। इस बयान के बाद संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और कतर जैसे देशों में चिंता बढ़ गई है।
अमेरिकी कदम के तहत समुद्री नाकेबंदी लागू कर दी गई है, जिसका उद्देश्य ईरान की आर्थिक गतिविधियों को सीमित करना बताया जा रहा है। लेकिन ईरान ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए समुद्री डकैती करार दिया है। ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रवक्ता इब्राहिम रजाई ने कहा कि यह कदम महज दबाव बनाने की कोशिश है, लेकिन अगर हालात बिगड़े तो ईरान अपने छिपे हुए विकल्प भी इस्तेमाल कर सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है। यहां किसी भी तरह का सैन्य टकराव वैश्विक तेल सप्लाई को बाधित कर सकता है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार और शिपिंग पर बड़ा असर डाल सकता है। इसी कारण इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान की विशेष इकाई कुद्स फोर्स के कमांडर जनरल इस्माइल कानी ने संकेत दिए हैं कि यमन के हूती विद्रोहियों के जरिए लाल सागर में गतिविधियां बढ़ाई जा सकती हैं। इससे वैश्विक सप्लाई चेन और तेल बाजार पर गंभीर असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तनाव और बढ़ता है तो तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार बाधित हो सकता है। खाड़ी क्षेत्र में बड़े सैन्य टकराव की आशंका बढ़ सकती है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ती तनातनी अब सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे खाड़ी क्षेत्र को अपनी चपेट में ले सकती है। डोनाल्ड ट्रंप के फैसले और ईरान की सख्त चेतावनी ने स्थिति को बेहद संवेदनशील बना दिया है, जहां एक छोटी चिंगारी भी बड़े संघर्ष में बदल सकती है।
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