यूक्रेन जंग में भारत बना नया टारगेट, ट्रंप की चेतावनी के बाद लगाए गंभीर आरोप
भारत
चेतना मंच
05 Aug 2025 04:15 PM
Russia Ukraine War : भारत के रूस से ऊर्जा खरीद को लेकर पहले से ही अमेरिका की भौंहें तन चुकी हैं। अब यूक्रेन ने भी इस मुद्दे पर नया विवाद खड़ा कर दिया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी के बीच यूक्रेन ने दावा किया है कि रूस द्वारा उसके खिलाफ चलाए जा रहे युद्ध में जिन ईरानी ड्रोनों का उपयोग हो रहा है, उनमें भारत में बने इलेक्ट्रॉनिक कलपुर्जे लगे हैं। यूक्रेन का यह आरोप ऐसे समय पर आया है जब अमेरिका भारत पर रूस से तेल खरीदने को लेकर दबाव बना रहा है। ट्रंप ने हाल ही में बयान देते हुए कहा कि भारत को रूस से सस्ती दर पर तेल खरीदने के लिए जुमार्ना भरना पड़ सकता है। उनके मुताबिक, भारत रूस से तेल लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी मुनाफा कमा रहा है। हालांकि, चीन रूस का कहीं बड़ा ग्राहक है, लेकिन ट्रंप की नजरें फिलहाल भारत पर ही टिकी हैं।
यूक्रेन का दावा, ड्रोन में भारतीय कंपनियों के पुर्जे
यूक्रेन ने इस मामले को भारत सरकार और यूरोपीय संघ के समक्ष औपचारिक रूप से उठाया है। उनके अनुसार, ईरानी डिजाइन वाले शाहिद ड्रोन में दो भारतीय कंपनियों के पुर्जे पाए गए हैं। 1. विशाय इंटरटेक्नोलॉजी की वोल्टेज रेगुलेटर यूनिट में इस्तेमाल होने वाला हाईब्रिज रेक्टिफायर ए300359एच। 2. आॅरा सेमीकंडक्टर द्वारा बनाया गया आरएफ-बेस्ड सिग्नल जनरेटर एवी5426ए, जो ड्रोन के जैमिंग-प्रूफ एंटीना में लगा हुआ था। हालांकि, सूत्रों के अनुसार इन कंपनियों ने किसी भी भारतीय कानून का उल्लंघन नहीं किया है, और ये पुर्जे तकनीकी रूप से डुअल यूज की श्रेणी में आते हैं, यानी इनका सैन्य और नागरिक दोनों तरह से इस्तेमाल किया जा सकता है।
भारत की प्रतिक्रिया, अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का पूरा पालन
इस पूरे मामले पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि, भारत का दोहरे उपयोग वाले उत्पादों का निर्यात अंतरराष्ट्रीय परमाणु अप्रसार समझौतों और उसके कठोर घरेलू नियामक ढांचे के तहत होता है। हर निर्यात से पहले पूरी जांच-पड़ताल की जाती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं यह हमारे किसी कानून का उल्लंघन तो नहीं कर रहा है।
राजनीतिक दबाव या भू-राजनीतिक चाल?
यूक्रेन के आरोपों को केवल तकनीकी नजरिये से नहीं देखा जा सकता। यह स्पष्ट है कि जंग के मैदान में रूस को मिलने वाली किसी भी अप्रत्यक्ष मदद पर अब पश्चिमी देश और यूक्रेन की नजर बेहद पैनी हो चुकी है। भारत की तटस्थ विदेश नीति और रूस से ऊर्जा व्यापार ने उसे पश्चिमी मंच पर एक संतुलन साधने वाले खिलाड़ी के रूप में पेश किया है, लेकिन अब यह संतुलन दबाव में है। जहाँ एक ओर भारत, वैश्विक दक्षिण की आवाज बनकर उभर रहा है, वहीं दूसरी ओर यूक्रेन संकट में उसकी भूमिका को लेकर नई-नई परतें खुलती जा रही हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि भारत इन कूटनीतिक और तकनीकी चुनौतियों का सामना किस तरह करता है।