होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ते तनाव और लगभग ठप पड़े जहाजी आवागमन के बीच वैश्विक ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है। लेकिन इस संकट में सऊदी अरब ने अपनी दशकों पुरानी रणनीति को सक्रिय कर दुनिया को बड़ी राहत दी है।

Tension in Strait of Hormuz : होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ते तनाव और लगभग ठप पड़े जहाजी आवागमन के बीच वैश्विक ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है। लेकिन इस संकट में सऊदी अरब ने अपनी दशकों पुरानी रणनीति को सक्रिय कर दुनिया को बड़ी राहत दी है।
ईरान ने इस रणनीतिक जलमार्ग पर कड़ी निगरानी और रोक लगा दी है। सामान्य हालात में दुनिया का करीब 20% तेल यहीं से गुजरता है। युद्ध के बाद यहां से शिपिंग 95% तक घट गई। इसका सीधा असर तेल की कीमतों और सप्लाई पर पड़ा है। इस संकट में सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन सबसे बड़ा हथियार बनकर उभरी है।
* 1980 के दशक (ईरान-इराक युद्ध के बाद) बनाई गई
* करीब 1200 किमी लंबी पाइपलाइन
* देश के पूर्वी तेल क्षेत्रों को लाल सागर के यनबू पोर्ट से जोड़ती है। आज यही पाइपलाइन सऊदी को होर्मुज से पूरी तरह बचाकर तेल निर्यात करने में मदद कर रही है।
* यह पाइपलाइन अब अपनी फुल कैपेसिटी 7 मिलियन बैरल/दिन पर चल रही है
* तेल को सीधे यनबू के जरिए दुनिया भर में भेजा जा रहा है
* इससे ग्लोबल सप्लाई पूरी तरह टूटने से बची हुई है।
* होर्मुज बंद होने से भारी संकट पैदा हो सकता था
* लेकिन इस वैकल्पिक रूट ने सप्लाई को बफर दिया
* तेल की कीमतों को पूरी तरह बेकाबू होने से रोका। अगर यह पाइपलाइन नहीं होती तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर और बड़ा झटका लगता।
हालांकि राहत मिली है, लेकिन खतरा अभी भी बना हुआ है:
* लाल सागर रूट पर भी हमलों की आशंका
* यमन के हूती विद्रोही युद्ध में कूद चुके हैं
* अगर यह रूट भी प्रभावित हुआ तो सप्लाई फिर संकट में आ सकती है।