The Line की सबसे बड़ी खासियत यह बताई जा रही है कि यहां सड़कें और निजी कारें शहर की जरूरत ही नहीं होंगी। आवाजाही के लिए अंडरग्राउंड हाई-स्पीड ट्रांसपोर्ट सिस्टम प्रस्तावित है, जिसके जरिए दावा किया जा रहा है कि शहर के एक छोर से दूसरे छोर तक का सफर 20 मिनट से भी कम समय में पूरा किया जा सकेगा।

Saudi Arabia : दुनिया के बड़े शहर आज भीड़, प्रदूषण और ट्रैफिक जाम की तिहरी चुनौती से जूझ रहे हैं। इसी संकट के जवाब में सऊदी अरब एक ऐसी शहरी परिकल्पना को आकार दे रहा है, जो शहरों के रहने-बसने के तरीके पर ही नई बहस छेड़ देती है नाम है ‘द लाइन (The Line City)’। यह NEOM प्रोजेक्ट का सबसे चर्चित और महत्वाकांक्षी हिस्सा माना जा रहा है, जिसे सड़क-रहित, कार-मुक्त और धुआं-मुक्त शहर के तौर पर पेश किया जा रहा है। दावा है कि यहां रोजमर्रा की जरूरतें मिनटों में पूरी होंगी, प्रकृति का दखल कम से कम होगा और आधुनिक तकनीक के सहारे शहर जगह नहीं, व्यवस्था की तरह काम करेगा।
सऊदी अरब का The Line पारंपरिक शहरों की तरह फैलने वाला नहीं, बल्कि सीधी रेखा में बसने वाला एक अनोखा अर्बन मॉडल है। प्रस्ताव के मुताबिक इसकी लंबाई करीब 170 किलोमीटर, चौड़ाई लगभग 200 मीटर और ऊंचाई करीब 500 मीटर तक रखी जाएगी। कॉन्सेप्ट यह है कि शहर दो विशाल ‘मिरर’ जैसी इमारतों के बीच आकार लेगा जिससे बाहर से इसका लुक एक चमकते, भविष्यवादी कांच-धातु वाले मेगा-स्ट्रक्चर जैसा दिखाई देगा। इस महत्वाकांक्षी योजना का ऐलान 2021 में सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने किया था। The Line की सबसे बड़ी खासियत यह बताई जा रही है कि यहां सड़कें और निजी कारें शहर की जरूरत ही नहीं होंगी। आवाजाही के लिए अंडरग्राउंड हाई-स्पीड ट्रांसपोर्ट सिस्टम प्रस्तावित है, जिसके जरिए दावा किया जा रहा है कि शहर के एक छोर से दूसरे छोर तक का सफर 20 मिनट से भी कम समय में पूरा किया जा सकेगा।
The Line की योजना का एक बड़ा दावा यह है कि यहां “दूरी” नहीं, नजदीकी शहर की पहचान होगी। इस शहर को इस तरह डिजाइन करने का दावा किया गया है कि रोजमर्रा की हर जरूरत घर से सिर्फ 5 मिनट की पैदल दूरी पर उपलब्ध होगी। स्कूल और अस्पताल से लेकर शॉपिंग व सर्विस सेंटर, ऑफिस स्पेस और पार्क–ओपन एरिया तक, सब कुछ आसपास ही मिलेगा।
The Line को कार्बन-फ्री शहर की दिशा में सऊदी अरब का सबसे बड़ा दांव माना जा रहा है। प्रस्तावित मॉडल के तहत शहर की ऊर्जा जरूरतें फॉसिल फ्यूल पर नहीं, बल्कि रिन्यूएबल एनर्जी पर टिकेंगी। जिसमें सोलर पावर, विंड एनर्जी और ग्रीन हाइड्रोजन को प्रमुख आधार बताया गया है। सऊदी अरब का तर्क है कि इस ढांचे से न सिर्फ कार्बन उत्सर्जन में भारी कटौती होगी, बल्कि यह दुनिया को प्रदूषण-मुक्त शहरी जीवन का एक नया और व्यावहारिक रोडमैप भी दिखा सकता है।
The Line को सऊदी अरब सिर्फ एक स्मार्ट सिटी नहीं, बल्कि AI-ड्रिवन सिटी के रूप में पेश कर रहा है—जहां शहर को चलाने का काम सिस्टम करेगा, इंसान नहीं। प्रस्तावित ढांचे में AI आधारित मैनेजमेंट, स्मार्ट डेटा नेटवर्क, ऑटोमेटेड सर्विसेज और रोबोटिक मेंटेनेंस जैसी तकनीकों को शहर की रीढ़ बताया गया है।
The Line को सऊदी अरब एक ऐसे शहर के तौर पर गढ़ रहा है, जहां करीब 90 लाख लोगों के बसने की योजना बताई जा रही है। दावा है कि इस नई बसावट में नागरिकों को बेहतर हेल्थकेयर, उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा और शांत, साफ व धुआं-रहित माहौल मिलेगा। यही वजह है कि कई विशेषज्ञ इसे 15 मिनट सिटी से भी आगे का मॉडल मानते हैं,जहां जिंदगी की रफ्तार ट्रैफिक से नहीं, बल्कि पास मौजूद सुविधाओं से तय होगी। साथ ही सऊदी अरब इस प्रोजेक्ट को आर्थिक बदलाव के बड़े इंजन के रूप में भी देख रहा है। उम्मीद है कि कंस्ट्रक्शन, आईटी/टेक्नोलॉजी, हेल्थ-एजुकेशन और टूरिज्म-सर्विस सेक्टर में बड़े पैमाने पर नौकरियां पैदा होंगी। विदेशी निवेशकों के लिए भी यह परियोजना ‘फ्यूचर सिटी’ की हाई-प्रोफाइल पेशकश मानी जा रही है—जहां तकनीक, पूंजी और नए बाजार एक साथ जुड़ते दिखते हैं।
The Line जितना दूरदर्शी और आकर्षक कॉन्सेप्ट है, उतनी ही तेज़ इसकी आलोचनाओं की धार भी रही है। सवाल उठते हैं कि क्या इस मेगा प्रोजेक्ट की कुल लागत अनुमान से कई गुना बढ़ सकती है? क्या निर्माण का दबाव स्थानीय पर्यावरण और इकोसिस्टम को नुकसान पहुंचाएगा? और सबसे अहम क्या 170 किलोमीटर लंबी ‘लाइन’ में शहर बसाने की योजना व्यावहारिक रूप से उतनी आसान है, जितनी प्रेज़ेंटेशन में दिखाई जाती है? हालांकि सऊदी सरकार का दावा है कि अत्याधुनिक इंजीनियरिंग, नई तकनीक और डेटा-आधारित प्लानिंग के जरिए इन चुनौतियों को मैनेज किया जा सकता है। Saudi Arabia