चीन में राजनाथ सिंह ने एससीओ घोषणापत्र पर दस्तखत से किया इनकार, आतंकवाद पर रियायत को बताया अस्वीकार्य
SCO Meeting
भारत
चेतना मंच
30 Nov 2025 04:01 AM
SCO Meeting : किंगदाओ (चीन) में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के रक्षा मंत्रियों की बैठक में भारत ने एक बार फिर आतंकवाद के मुद्दे पर अपने सख्त और अडिग रुख को दोहराया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीन के बंदरगाह शहर किंगदाओ में आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में संयुक्त घोषणापत्र पर हस्ताक्षर करने से साफ इनकार कर दिया। सूत्रों के अनुसार, यह निर्णय इसलिए लिया गया क्योंकि घोषणापत्र में आतंकवाद जैसे गंभीर वैश्विक खतरे का उल्लेख तक नहीं किया गया था, जबकि पाकिस्तान के अशांत क्षेत्र बलूचिस्तान का जिक्र किया गया था।
भारत ने दस्तावेज पर दस्तखत नहीं किया
भारत का मानना है कि इस दस्तावेज में 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले, जिसमें 26 निर्दोष नागरिकों की जान गई थी, जैसे घटनाओं की अनदेखी कर आतंकवाद के खिलाफ उसकी दृढ़ नीति को कमजोर करने का प्रयास किया गया। ऐसे में भारत के लिए इस दस्तावेज पर दस्तखत करना नीतिगत रूप से अस्वीकार्य था।
चीन-पाकिस्तान की मिलीभगत पर उठे सवाल
भारत ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि चीन और पाकिस्तान की मिलीभगत से तैयार घोषणापत्र में जानबूझकर आतंकवाद जैसे मुद्दे को दरकिनार किया गया, जिससे इस वैश्विक संकट को कमतर आंका गया। बैठक में भारत ने पाकिस्तान पर तीखा हमला करते हुए कहा कि कुछ देश अब भी आतंकवाद को कूटनीतिक साधन की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं, जो क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा है।
"शांति और आतंकवाद एक साथ नहीं चल सकते" : राजनाथ
राजनाथ सिंह ने सम्मेलन के दौरान अपने संबोधन में कहा, आतंकवाद के दोषियों, उसे फंडिंग देने वालों और आश्रय देने वालों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। इसमें कोई दोहरा मापदंड नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठनों के पुराने हमलों की तर्ज पर पहलगाम में किया गया हमला भारत की संप्रभुता पर सीधा हमला है, और अब भारत इसे किसी भी रूप में सहन नहीं करेगा।
एससीओ देशों को एकजुट होकर करनी होगी निर्णायक कार्रवाई
भारत ने एससीओ मंच से साफ संदेश दिया कि आतंकवाद से निपटने में किसी तरह की ढिलाई या दोहरा रवैया बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि "आतंकवादी गुटों के हाथों में विनाशकारी हथियार सौंपना वैश्विक शांति के लिए अत्यंत खतरनाक है। ऐसे में हमें एकजुट होकर निर्णायक कार्रवाई करनी होगी।
भारत की राजनयिक दृढ़ता की एक मिसाल
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का यह रुख न केवल भारत की आतंकवाद-विरोधी नीति को दर्शाता है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि भारत किसी भी बहुपक्षीय मंच पर अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा। घोषणापत्र पर दस्तखत से इनकार करके भारत ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि आतंकवाद के मसले पर वह किसी भी तरह की नरमी को तैयार नहीं है।