ना यमन, ना सऊदी, भारतीयों को सबसे ज्यादा फांसी देने वाला देश है कुवैत, आंकड़ों से खुला राज
Sentence To Death
भारत
चेतना मंच
30 Nov 2025 11:40 AM
Sentence To Death : भारतीय नर्स निमिषा प्रिया की यमन में होने वाली संभावित फांसी की खबरों के बीच यह सवाल एक बार फिर चर्चा में आ गया है। विदेशों में भारतीयों को सबसे ज्यादा सजा-ए-मौत आखिर कहां मिल रही है? यदि आप सोचते हैं कि इसका जवाब यमन या सऊदी अरब होगा, तो यह आकलन गलत साबित हो सकता है। असलियत कुछ और ही है, और इसकी पुष्टि खुद विदेश मंत्रालय द्वारा साझा किए गए आंकड़े करते हैं।
47 भारतीयों को पिछले पांच वर्षों में विदेशी जमीन पर दी गई मौत की सजा
विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा में जानकारी दी कि वर्ष 2020 से 2024 के बीच 47 भारतीय नागरिकों को विदेशों में फांसी की सजा सुनाई गई है। यही नहीं, 10,000 से अधिक भारतीय नागरिक वर्तमान में विभिन्न देशों की जेलों में विचाराधीन या सजा प्राप्त कैदी के रूप में बंद हैं।
कुवैत बना भारतीयों के लिए मौत का सबसे बड़ा गंतव्य
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक फांसी कुवैत में दी गई हैं। 2020-2024 के दौरान कुवैत में 25 भारतीयों को फांसी दी गई।
वहीं, सऊदी अरब, कतर, मलेशिया, जमैका और जिम्बाब्वे जैसे देशों में भी भारतीय नागरिकों को मौत की सजा मिली है। गौरतलब है कि संयुक्त अरब अमीरात में भारतीयों को फांसी देने के कई मीडिया रिपोर्ट सामने आ चुके हैं, लेकिन विदेश मंत्रालय के पास इस संबंध में कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। रिपोर्टों में शहजादी खान, मुहम्मद रिनाश अरंगीलोट्टू, और मुरलीधरन पेरुमथट्टा वलाप्पिल जैसे भारतीयों का नाम सामने आया, जिन्हें फांसी की सजा दी गई बताई गई है। हालांकि, इन मामलों में भी पूरी पारदर्शिता और आंकड़ों की पुष्टि चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
कहां-कहां अभी भी मौत की तलवार लटकी है?
विदेश मंत्रालय की रिपोर्ट बताती है कि यूएई की जेलों में 25 भारतीय फांसी की सजा का इंतजार कर रहे हैं। सऊदी अरब में 11 भारतीयों को सजा-ए-मौत सुनाई गई है। इसके अलावा, सऊदी की जेलों में कुल 2,633 भारतीय बंद हैं। यूएई की जेलों में 2,518 और नेपाल की जेलों में 1,317 भारतीय बंद हैं।
सरकार कैसे करती है मदद?
विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह के अनुसार, किसी भी भारतीय की विदेश में गिरफ्तारी या हिरासत की सूचना मिलते ही, संबंधित भारतीय मिशन/कौंसुलर केंद्र स्थानीय प्रशासन से संपर्क करता है। इस प्रक्रिया में प्रमुख बिंदु होते हैं जिनमें व्यक्ति की भारतीय नागरिकता की पुष्टि, कानूनी सहायता और अनुवादक सेवाएं, दया याचिका और अपील की सुविधा, मानवाधिकारों की निगरानी और रिहाई की कोशिशें की जाती हैं। सरकार का दावा है कि वह सभी उपलब्ध कानूनी रास्तों के माध्यम से विदेशों में बंद भारतीय नागरिकों को राहत पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
आंकड़े चेतावनी देते हैं, समाधान कूटनीति से ही निकलेगा
निमिषा प्रिया का मामला यमन की जेल से भले फिलहाल टल गया हो, लेकिन वह उन सैकड़ों भारतीयों की कहानी का एक चेहरा है, जो विधिक प्रणाली, भाषा, और संसाधनों की कमी के बीच अकेले अपनी जिंदगी की लड़ाई लड़ रहे हैं। इन मामलों में सिर्फ सरकारी प्रयास नहीं, बल्कि भारत की वैश्विक कूटनीतिक पहुंच, धार्मिक-सामाजिक मध्यस्थता, और समाज की सामूहिक संवेदना भी निर्णायक भूमिका निभा सकती है।