एआई के 'देवताओं' के बंगले में बंधक बनी महिलाएं... हवा में उड़ती कारें... पूल में जलपरियां! सिलिकॉन वैली के चमकते चेहरे के पीछे का सच
San Francisco: एआई की दुनिया को 'दिव्य' बताने वाली सिलिकॉन वैली का चमकदार मुखौटा अब उतर चुका है। वही टेक हाउस जो 'आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस से दुनिया बदलने' का ख्वाब बेचता है, उसके अंदर का सच सुनकर रूह कांप उठती है। नशीले पदार्थों से लबालब झोले... महिलाओं को बंधक बनाना... जबरन यौन संबंध और आधी रात को गेट फांदकर भागना! जी हां, यह इसका सच है।
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हिल्सबोरो का वह आलीशान बंगला जिसे एजीआई हाउस कहते हैं। 2022 से अब तक 37 पुलिस मामलों और शिकायतों के दस्तावेज में दर्ज है। द न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी पड़ताल में बंगले के परदे उठाए तो करतब नहीं, करतूतें मिलीं — दुष्कर्म, जबरन शारीरिक संबंध और महिलाओं को बंधक बनाने तक की संगीन शिकायतें!
कानूनी दस्तावेजों में आरोप — नेटवर्किंग के नाम पर मिलते हैं और 'पार्टनर्स की अदला-बदली' जैसी बातें सिर्फ शेयर-मार्केट में नहीं, इन बेसमेंट पार्टियों में भी होती हैं। जो कभी युवा प्रोग्रामरों का साझा कोडिंग-अड्डा हुआ करता था, एआई बूम ने उसे बदलकर अय्याशी का अड्डा बना दिया।
18,000 वर्गफुट का भू-मध्यसागरीय शैली का यह बंगला — आठ कमरे। और बस एक कमरे का किराया 10,000 डॉलर यानी 9.5 लाख रुपये प्रति माह! इंसानियत से इतनी दूर विलासिता की यही वह दुनिया है, जो दावा करती है — 'मानवता को बदल देंगे।'
इस परदे के पीछे जिनके नाम छुपे हैं, वे कोई आम नहीं — गूगल के पूर्व शोधकर्ता जेरेमी निक्सन ने रखी थी नींव। ओपनएआई और एंथ्रोपिक के इंजीनियर-फाउंडर्स रहते हैं। सैम ऑल्टमैन 'द रेजिडेंसी' के सलाहकार रहे, सर्गेई ब्रिन ने यहां व्याख्यान किया, और ग्राइम्स ने परफॉर्म किया। क्या इनके पैर जमीन पर थे, या वे भी उन्हीं रोशनी में थे, जिनमें लॉन पर हवा में स्टंट करती उड़ती कारें और नकली एफिल टॉवर की बग्घी-सवारी शामिल है?
पिछले साल दिसंबर की उस रात को याद कीजिए। रात 2:22 बजे एक महिला की पुकार — उसे अंदर रोका गया, जबरन शारीरिक संबंध का दबाव डाला गया, विरोध पर अपमान किया गया। वह महिला किसी तरह बंगले का ऊंचा गेट फांदकर बाहर भागी। एक महिला के लिए इससे बड़ा हौसला क्या हो सकता है — जो रात को चारदीवारी तोड़कर निकली। एजीआई हाउस से दो मील दूर टेक इन्फ्लुएंसर जिमी चेन का 6,000 वर्गफुट का बंगला — जहां पार्टियों में युवतियां पूल में जलपरियां बनकर तैरती थीं और दीवारों पर मायन सभ्यता के परदे पर चित्र सजते थे। क्या हकीकत में यह पृथ्वी है, या कोई अलग ग्रह — जहां पानी में सजावट के लिए इनसानों की जिंदगी तैर रही है?
अभी तक न एजीआई हाउस की ओर से कोई सफाई दी गई है, न जुड़ी हस्तियों ने बयान जारी किया है। जांच जारी है। लेकिन सवाल गहरे हैं — एआई के इन 'देवताओं' की मंदिर-मार्केटिंग में छिपा अंधेरा कितना बड़ा है? क्या ये पार्टियां सिर्फ पार्टियां हैं, या कुछ और? वक्त ही बताएगा कि इस दुनिया का अगला 'फ्रंटियर' रोबोट होगा या जवाबदेही।
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