अब मैं मौत का आनंद लेना चाहता हूँ
भारत
चेतना मंच
29 Nov 2025 04:13 AM
“
मैंने
इस
जीवन
का
बहुत
आनंद
ले
लिया
,
अब
मैं
मृत्यु
का
आनंद
लेना
चाहता
हूँ।
”
यह
वॉक्य
कोई
साधारण
वॉक्य
नहीं
है।
अपनी
मौत
को
सामने
खड़ी
हुई
देखकर
यह
वॉक्य
दुनिया
के
महान
दार्शनिक
सुकरात
ने
कहा
था।
सुकरात
के
विषय
में
जिस
किसी
ने
भी
पढ़ा
तथा
जाना
है
वह
यही
कहता
है
कि
शायद
दुनिया
में
सुकरात
जैसा
कोई
दार्शनिक
दूसरा
नहीं
हुआ
होगा।
सुकरात
ने
मौत
का
आनंद
लेने
की
बात
किसी
मजाक
में
नहीं
कही
थी।
मौत
का
आनंद
लेने
की
बात
के
पीछे
भी
सुकरात
की
बहुत
बड़ी
शिक्षा
मौजूद
थी।
Socrates
सुकरात को जान लिया तो मौत को डर होगा समाप्त
दुनिया
में
तमाम
बुद्धिजीवी
मानते
हैं
कि
सुकरात
का
दर्शन
पूरी
दुनिया
को
नई
रोशनी
देने
वाला
दर्शन
है।
सुकरात
के
दर्शन
को
ठीक
से
समझ
लेने
के
बाद
मौत
का
डर
हमेशा
के
लिए
समाप्त
हो
जाता
है।
सुकरात
को
पता
था
कि
मौत
जीवन
का
परम
सत्य
है।
दुनिया
में
कोई
भी
प्राणी
ऐसा
नहीं
है
जिसको
मौत
नहीं
आएगी।
यही
कारण
था
कि
अपनी
मौत
को
सामने
खड़ा
हुआ
देखकर
सुकरात
ने
बड़े
धैर्य
के
साथ
कहा
था
कि
‘‘
मैंने
इस
जीवन
का
बहुत
आनंद
लिया
,
अब
मैं
मृत्यु
का
आनंद
लेना
चाहता
हूँ।
’’
Socrates
जहर पिलाकर मारने की सजा दी गई थी सुकरात को
सुकरात
यूनान
में
पैदा
होने
वाले
सबसे
बड़े
दार्शनिक
थे।
सुकरात
से
एथेंस
के
शासक
डरे
हुए
थे।
उनके
ऊपर
देवताओं
को
ना
मानने
तथा
एथेंस
के
युवा
वर्ग
को
भडक़ाने
तथा
शासन
को
अस्थिर
करने
के
आरोप
लगाकर
उन्हें
जहर
देकर
मारने
की
सजा
सुनाई
गई
थी।
सजा
सुनाने
का
तरीका
भी
बहुत
ही
खराब
था।
सुकरात
को
किस
प्रकार
जहर
देकर
मारने
की
सजा
सुनाई
थी
उसकी
चर्चा
करने
की
बजाय
हम
उस
मुददे
पर
आते
हैं
जिसमें
सुकरात
ने
मौत
का
आनंद
लेने
की
बहुत
बड़ी
बात
कही
थी।
दुनिया
में
सुकरात
के
जैसी
बड़ी
बात
शायद
ही
किसी
दूसरे
दार्शनिक
ने
कभी
कही
हो।
सुकरात ने जेल के कर्मचारियों से जल्दी मांगा जहर
सुकरात
को
एथेंस
की
जेल
में
रखा
गया
था।
उन्हें
सूर्यास्त
होने
से
पहले
जहर
पिलाकर
मारने
का
आदेश
दिया
गया
था।
उनको
मारने
के
लिए
जेल
में
जहर
तैयार
किया
जा
रहा
था।
यह
उस
समय
की
बात
है
जब
दोपहर
ढल
चुकी
थी
और
शाम
होने
को
थी।
जो
सैनिक
सुकरात
के
लिए
जहर
तैयार
कर
रहा
था
,
उसके
पास
जाकर
सुकरात
ने
कहा
, '
विलंब
क्यों
कर
रहे
हो
,
जरा
जल्दी
करो।
'
सैनिक
चकित
होकर
बोला
, '
आप
क्या
कह
रहें
हैं
!
मैं
तो
जान
-
बूझकर
धीरे
-
धीरे
कर
रहा
हूं।
'
सुकरात
ने
कहा
, '
अपने
कर्तव्य
का
पालन
करने
में
ढिलाई
नहीं
बरतनी
चाहिए।
'
उनकी
बातें
सुन
वहीं
बैठे
सुकरात
के
कुछ
शिष्य
रो
पड़े।
एक
शिष्य
ने
कहा
, '
आप
हम
लोगों
के
साथ
ऐसा
क्यों
कर
रहे
हैं
?
आपका
जीवन
हम
सबके
लिए
कीमती
है।
अब
भी
वक्त
है।
जेल
के
सारे
सिपाही
हमारे
साथ
हैं।
हम
सब
आपको
यहां
से
लेकर
सुरक्षित
जगह
चले
चलते
हैं।
'
सुकरात
ने
पहले
रोते
हुए
शिष्यों
को
झिडक़ा
,
फिर
अन्य
शिष्यों
से
बोले
'
तुम
लोग
इस
मिट्टी
की
देह
के
लिए
क्यों
इतने
परेशान
हो
?
मेरे
विचार
तो
हमेशा
तुम्हारे
साथ
रहेंगे।
इस
देह
के
लिए
मैं
चोरों
की
तरह
भाग
जाऊं
और
छिपकर
रहूं
? ‘‘
मैंने
इस
जीवन
का
बहुत
आनंद
लिया
,
अब
मैं
मृत्यु
का
आनंद
लेना
चाहता
हूं।
'
सांझ
ढलने
को
आ
गई
थी।
जहर
का
प्याला
लाया
गया।
जैसे
लोग
चाय
-
कॉफी
लेते
हैं
,
वैसे
ही
सुकरात
ने
जहर
का
प्याला
उठाया
और
उसे
खाली
कर
दिया।
जहर
पीकर
वह
लेट
गए।
शिष्यों
ने
पूछा
, '
प्रभो
!
बहुत
पीड़ा
हो
रही
होगी।
'
सुकरात
ने
मुस्कुराते
हुए
कहा
, '
शिष्यो
!
यह
मेरे
जीवन
के
जागरण
का
अवसर
है।
अब
मैं
हृदय
,
मन
,
विचार
और
शरीर
से
अलग
हो
गया
हूं।
'
अपने
जीवन
से
ही
नहीं
,
मौत
से
भी
सुकरात
मनुष्यता
को
अमर
संदेश
देते
गए।
Socrates
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मौत से प्यार करने वाले सुकरात की प्रमुख शिक्षा
1-
ज्ञानी
वह
नहीं
जो
सब
कुछ
जानता
है
,
बल्कि
वह
है
जो
जानता
है
कि
वह
क्या
नहीं
जानता
"
2-
एक
अच्छी
जीवनशैली
अपनाने
से
आत्मा
शुद्ध
होती
है
,
न
कि
समृद्धि
या
भौतिक
सुख
से
"
3-
सच्चा
ज्ञान
यह
है
कि
हम
कुछ
नहीं
जानते
"
4-
अपने
आत्मा
को
जानो
,
यही
सबसे
बड़ी
शिक्षा
है
"
5-
जो
आप
नहीं
चाहते
,
वही
दूसरों
के
साथ
न
करें
"
6-
हमारा
जीवन
केवल
विचारों
और
कार्यों
की
गुणवत्ता
पर
निर्भर
करता
है
,
न
कि
धन
या
प्रसिद्धि
पर
"
7-
जो
लोग
सोचते
नहीं
हैं
,
वे
जीवन
को
केवल
महसूस
करते
हैं
,
वे
सच
को
नहीं
पा
सकते
"
8-
अच्छे
व्यक्ति
की
सबसे
बड़ी
पहचान
उसकी
समझ
है
,
न
कि
उसकी
ताकत
"
9-
वह
व्यक्ति
सबसे
गरीब
है
जो
अपने
जीवन
का
उद्देश्य
नहीं
जानता
"
10-
शांति
तब
मिलती
है
जब
हम
अपने
भीतर
संतुलन
पाते
हैं
"
Socrates
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