एक बार फिर बजा दुनिया भर में भारत का डंका, रचा जा रहा है इतिहास
SPADEX
भारत
चेतना मंच
30 Dec 2024 07:56 PM
SPADEX : पूरी दुनिया में एक बार फिर से भारत का डंका बज रहा है। स्पैडेक्स लांच करके भारत नया इतिहास बना रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) सोमवार को आकाश में स्पेस डॉकिंग एक्सपेरीमेंट (SPADEX) लांच करके पूरी दुनिया में अपना डंका बजाने वाला है। दरअसल भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) सोमवार रात 9:58 बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र शार से स्पेस डॉकिंग एक्सपेरीमेंट (SPADEX) को लॉन्च करेगा। इसे पीएसएलवी-सी60 से रवाना किया जाएगा। इस मिशन की सफलता के बाद भारत दुनिया के चुनिंदा देशों अमेरिका, रूस और चीन के विशेष क्लब में शामिल हो जाएगा। ISRO का यह इस साल का आखिरी मिशन है। इसकी कामयाबी भारतीय अंतरिक्ष केंद्र और मानव अंतरिक्ष उड़ानों के लिए अहम साबित होगी।
इसरो दे रहा है नव वर्ष का तोहफा
आपको बता दें कि अंतरिक्ष में यह भारत की एक और बड़ी छलांग है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का वर्ष-2024 का अंतिम मिशन स्पैडेक्स (Mission SPADEX) के रूप में सोमवार को पूरा हो जाएगा। इसरो के वैज्ञानिकों तथा अधिकारियों को स्पैडेक्स मिशन की सफलता का पूरा भरोसा है। अंतरिक्ष में स्पैडेक्स की सफलता के साथ ही इसरो भारत के हर नागरिक को नव वर्ष का एक नायाब तोहफा प्रदान करेगा। इसरो के इस मिशन से एक बार फिर से भारत का डंका दुनिया भर में बजेगा। इसरो ने इससे पहले एक से बढ़कर एक अंतरिक्ष मिशन सफलतापूर्वक पूरे किए हैं।
क्या है भारत का स्पैडेक्स मिशन?
आपको बता दें कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का स्पैडेक्स मिशन बहुत ही खास मिशन है। भले ही पूरी दुनिया में स्पैडेक्स मिशन का ज्यादा प्रचार नहीं हो रहा है किन्तु पूरी दुनिया के अंतरिक्ष विशेषज्ञों की नजर भारत के स्पैडेक्स मिशन पर लगी हुई है। भारत के इसरो का स्पैडेक्स मिशन एक किफायती तकनीक का प्रदर्शन करने वाला मिशन है। यह तकनीक भारत की अंतरिक्ष से जुड़ी महत्वकांक्षाओं के लिए आवश्यक है। इनमें भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन का निर्माण और संचालन के अलावा चंद्रमा पर भारतीय एस्ट्रोनॉट (Indian Astronaut) के भेजने जैसी योजनाएं शामिल हैं। 'इन-स्पेस डॉकिंग' टेक्नोलॉजी की आवश्यकता उस वक़्त होती है, जब एक कॉमन मिशन को अंजाम देने के लिए कई रॉकेट लॉन्च करने की जरूरत होती है। जैसे स्पैडेक्स मिशन के तहत अंतरिक्ष में भेजे जाने वाले दो उपग्रहों में एक चेजर (एसडीएक्स01) और दूसरा टारगेट (एसडीएक्स02) होगा। ये दोनों तेज गति से पृथ्वी का चक्कर लगाएंगे। ये दोनों समान गति के साथ एक ही कक्षा में स्थापित होंगे, मगर लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर अलग हो जाएंगे। इसे 'फार रांदेवू' भी कहा जाता है। स्पैडेक्स मिशन की सफलता के बाद भारत दुनिया में ऐसा चौथा देश बन जाएगा, जिसके पास स्पेस डॉकिंग टेक्नोलॉजी होगी।
अंतरिक्ष में डॉकिंग एक जटिल काम है
फिलहाल, अंतरिक्ष डॉकिंग टेक्नोलॉजी के मामले में अमेरिका, रूस और चीन को ही सक्षम माना जाता है। भारत के पास स्पैडेक्स मिशन के जरिए स्पेस डॉकिंग टेक्नोलॉजी में महारत हासिल करने का मौका है। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह मिशन अंतरिक्ष डॉकिंग में महारत हासिल कर भारत का नाम खास देशों की फेहरिस्त में आ जाएगा। उन्होंने कहा कि डॉकिंग तकनीक "चंद्रयान-4" जैसे दीर्घकालिक मिशनों और भविष्य में बनने वाले भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए महत्वपूर्ण है। जितेंद्र सिंह ने इसे "गगनयान" मिशन के लिए भी महत्वपूर्ण बताया।
क्या-क्या खास है स्पैडेक्स मिशन में
भारत के अंतरिक्ष विशेषज्ञों की संस्था इसरो के इस मिशन का एक मकसद डॉक किए गए अंतरिक्ष यान के बीच पॉवर के हस्तांतरण का प्रदर्शन करना भी है, जो भविष्य में स्पेस रोबोटिक्स जैसे प्रयोगों में अहम साबित हो सकता है। इसके अलावा अंतरिक्ष यान का पूरा नियंत्रण और अनडॉकिंग के बाद पेलोड का संचालन जैसी बातें भी इस मिशन के उद्देश्य का हिस्सा हैं। स्पैडेक्स प्रयोगों के लिए पीएसएलवी के चौथे चरण यानी पीओईएम-4 (पीएसएलवी ऑर्बिटल एक्सपेरीमेंटल मॉड्यूल) का भी इस्तेमाल करेगा। यह चरण शैक्षणिक संस्थानों और स्टार्टअप्स के 24 पेलोड को ले जाने का काम करेगा। इस मिशन के तहत इसरो 28,800 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से चक्कर लगा रहे दो उपग्रहों को डॉक करने की कोशिश करेगा। यह एक चुनौतीपूर्ण काम होगा, जिसमें सावधानी जरूरी होगी।