Sunita Williams : सुनीता विलियम्स को स्ट्रेचर पर क्यों ले जाया गया?
Sunita Williams
भारत
चेतना मंच
02 Dec 2025 03:34 AM
Sunita Williams : भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और उनके साथी बुच विलमोर अंतरिक्ष में 9 महीने से अधिक समय बिताने के बाद हाल ही में पृथ्वी पर लौटे। उनकी वापसी स्पेसएक्स के ड्रैगन अंतरिक्ष यान के माध्यम से हुई। लेकिन जैसे ही वे पृथ्वी की सतह पर पहुंचे और कैप्सूल से बाहर आए, उन्हें स्ट्रेचर पर ले जाया गया। यह दृश्य देखकर कई लोगों के मन में सवाल उठने लगे कि आखिर उन्हें स्ट्रेचर पर क्यों ले जाया गया? क्या उनकी सेहत पर कोई प्रभाव पड़ा है? चलिए जानते है इसके पीछे का असली कारण ?
क्या सुनीता विलियम्स की सेहत ठीक है?
सबसे पहले यह स्पष्ट कर देना आवश्यक है कि सुनीता विलियम्स पूरी तरह से स्वस्थ हैं। वे न तो बीमार हैं और न ही किसी चोट से ग्रसित हैं। उन्हें स्ट्रेचर पर ले जाने की वजह कोई स्वास्थ्य समस्या नहीं बल्कि एक निर्धारित वैज्ञानिक प्रक्रिया और प्रोटोकॉल है।
अंतरिक्ष यात्रा और शरीर में होने वाले बदलाव
अंतरिक्ष में लंबी अवधि तक रहने के दौरान मानव शरीर में कई प्रकार के अस्थायी बदलाव होते हैं। यह बदलाव गुरुत्वाकर्षण के अभाव के कारण होते हैं। अंतरिक्ष में भारहीनता की स्थिति में शरीर की मांसपेशियां और हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। वहीं, शरीर की तरल पदार्थों का पुनर्वितरण भी अलग तरीके से होता है, जिससे संतुलन और रक्त संचार प्रणाली प्रभावित होती है।
गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में अचानक वापसी
जब अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी पर वापस लौटते हैं, तो वे फिर से गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में आते हैं। लंबे समय तक भारहीनता में रहने के कारण उनका शरीर पृथ्वी के वातावरण और गुरुत्वाकर्षण के अनुकूल होने में कुछ समय लेता है।
जॉनसन स्पेस सेंटर के पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक जॉन डेविट के अनुसार, अंतरिक्ष यात्री जब पृथ्वी पर लौटते हैं तो उन्हें चक्कर आने, कमजोरी महसूस होने और मतली की समस्या हो सकती है। इस कारण से, उन्हें तुरंत चलने की अनुमति नहीं दी जाती, बल्कि स्ट्रेचर पर ले जाया जाता है ताकि उनके शरीर को धीरे-धीरे नए माहौल के अनुरूप ढाला जा सके।
नासा का प्रोटोकॉल और सुरक्षा उपाय
नासा और अन्य अंतरिक्ष एजेंसियां अपने अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती हैं। यही कारण है कि वापसी के बाद अंतरिक्ष यात्रियों को स्ट्रेचर पर ले जाने का प्रोटोकॉल अनिवार्य होता है। यह एक एहतियाती कदम है जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनका शरीर धीरे-धीरे सामान्य हो और उन्हें किसी तरह की शारीरिक असुविधा न हो।
लाइव साइंस के अनुसार, यह प्रक्रिया सिर्फ अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) मिशन के यात्रियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह सभी अंतरिक्ष यात्राओं के लिए लागू होती है। Sunita Williams