नई दिल्ली। भारी खून-खराबे और लम्बी जद्दोजेहद के बाद आखिरकार अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज हुए तालिबान ने पहली बार भारत सरकार से औपचारिक बात करते हुए दोनों देशों के बीच उड़ान सेवा को फिर शुरू करने की अपील की है। दोनों देशों के बीच एमओयू का हवाला देते हुए तालिबान ने कहा कि यात्रियों की आवाजाही के लिए फ्लाइट्स का चलना जरूरी है। तालिबान ने कहा कि अफगानिस्तान की सिविल एविएशन अथॉरिटी आपसे अपील करती है कि जल्दी ही दोनों देशों के बीच कामर्शियल फ्लाइट्स का संचालन शुरू किया जाए। यह पहला मौका है, जब तालिबान ने औपचारिक तौर पर भारत सरकार से कोई मांग की है।
भारतीय उड्डयन महानिदेशक अरुण कुमार के नाम लिखे लेटर में अफगानिस्तान के कार्यकारी उड्डयन मंत्री अलहाज हमीदुल्लाह अखुंदजादा ने यह मांग की है। अखुंदजादा ने लिखा है, 'आप जैसा कि जानते हैं कि अमेरिकी सैनिकों ने अपनी वापसी से पहले काबुल के इंटरनेशनल एयरपोर्ट को नुकसान पहुंचाया है और उसे काम लायक नहीं छोड़ा है। कतर के भाइयों की तकनीकी मदद से यह एयरपोर्ट एक बार फिर से संचालन के योग्य हो गया है और इस संबंध में 6 सितंबर को सभी देशों को जानकारी दी गई है।' 7 सितंबर को भारत को लिखे खत में अखुंदजादा ने कहा है कि भारत को अब अफगानिस्तान के लिए कमर्शल फ्लाइट्स शुरू करनी चाहिए। अखुंदजादा ने लिखा, 'इस लेटर को लिखने का मकसद यह है कि दोनों देशों के बीच कमर्शल फ्लाइट्स का संचलान शुरू किया जाए। दोनों देशों के बीच ही इसे लेकर एमओयू है, जिस पर काम जारी रहना चाहिए।' उन्होंने कहा कि हमारी राष्ट्रीय एयरलाइंस अरियानना अफगान एयरलाइन और Kam Air भारत के लिए अपनी फ्लाइट्स को शुरू करने के लिए तैयार हैं। लेकिन हम आपसे भी अपील करते हैं कि अफगानिस्तान के लिए हवाई सेवाएं शुरू की जाएं।
आपको बता दें कि अफगानिस्तान को लेकर भारत पहले ही अपना रुख स्पष्ट कर चुका है। भारत के विदेश मंत्री एस.जयशंकर पहले ही कह चुके हैं कि भारत अफगानिस्तान के साथ अपनी ऐतिहासिक दोस्ती नहीं तोड़ेगा। साथ ही विदेश मंत्री अफगानिस्तान की मदद के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से आगे आने की भी अपील कर चुके हैं। उनका कहना है कि वर्तमान में अफगानिस्तान एक संकट और चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहा है और वहां बेहतर माहौल बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को साथ आना चाहिए।