Tariff : भारत-अमेरिका टैरिफ व्यापार में 52% बनाम 26% शुल्क के मायने
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भारत
चेतना मंच
02 Dec 2025 04:52 AM
Tariff : भारत और अमेरिका के व्यापारिक संबंध वैश्विक स्तर पर अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं। वित्त वर्ष 2021-22 से 2023-24 तक अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा है। भारत के कुल माल निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी लगभग 18% है, जबकि आयात में यह 6.22% और द्विपक्षीय व्यापार में 10.73% तक पहुंचती है। हाल ही में अमेरिका ने भारत पर 26% पारस्परिक टैरिफ लगाने की घोषणा की है, जबकि भारत अमेरिका से आयातित वस्तुओं पर 52% टैरिफ लगाता है। यह असमानता दोनों देशों के व्यापार संबंधों को प्रभावित कर सकती है।
टैरिफ का तात्पर्य और प्रभाव
टैरिफ वह शुल्क होता है, जो किसी देश द्वारा आयात की जाने वाली वस्तुओं पर लगाया जाता है। इसे आयात करने वाली कंपनियों को अपने देश की सरकार को भुगतान करना होता है। अमेरिका ने भारत को उन देशों की सूची में रखा है, जिन पर 'डिस्काउंटेड रेसिप्रोकल टैरिफ' लागू किया गया है। यह नीति 100 अन्य देशों पर भी प्रभावी होगी। अमेरिका का तर्क है कि भारत अमेरिकी उत्पादों पर अधिक शुल्क लगाता है, जिससे अमेरिका का व्यापार घाटा बढ़ता है। इसी कारण, अमेरिकी प्रशासन ने अब जवाबी शुल्क लगाने का निर्णय लिया है।
डोनाल्ड ट्रंप की प्रतिक्रिया
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर लगाए गए टैरिफ को उचित ठहराते हुए कहा कि भारत वर्षों से अमेरिकी उत्पादों पर उच्च कर लगाता रहा है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत 52% टैरिफ वसूलता है, जबकि अमेरिका ने अब तक भारतीय उत्पादों पर कोई बड़ा शुल्क नहीं लगाया था। ट्रंप का मानना है कि इस असंतुलन को ठीक करने के लिए टैरिफ बढ़ाना आवश्यक है।
भारत पर Tariff लागू होने का प्रभाव
अमेरिका द्वारा लगाए गए 26% शुल्क का असर 9 अप्रैल 2024 से प्रभावी हो जाएगा। इसका सीधा प्रभाव भारतीय निर्यातकों पर पड़ेगा, जिन्हें अब अमेरिकी बाजार में अधिक शुल्क चुकाना होगा। भारत का व्यापार अधिशेष पहले से ही अमेरिका के साथ महत्वपूर्ण रहा है:
2023-24 में: 35.32 अरब अमेरिकी डॉलर
2022-23 में: 27.7 अरब अमेरिकी डॉलर
2021-22 में: 32.85 अरब अमेरिकी डॉलर
2020-21 में: 22.73 अरब अमेरिकी डॉलर
2019-20 में: 17.26 अरब अमेरिकी डॉलर
इस अतिरिक्त शुल्क के कारण भारतीय व्यापारियों को लागत बढ़ने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है, जिससे कुछ क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धात्मकता पर असर पड़ेगा।
किन उद्योगों पर पड़ेगा असर?
भारत-अमेरिका व्यापार पर विशेषज्ञों के अनुसार, इस टैरिफ वृद्धि का प्रभाव निम्नलिखित क्षेत्रों पर अधिक देखने को मिलेगा:
कृषि उत्पाद: भारतीय कृषि उत्पाद, विशेष रूप से समुद्री खाद्य और चावल, प्रतिस्पर्धी बाजार में टैरिफ के कारण प्रभावित हो सकते हैं।
मशीनरी और इलेक्ट्रॉनिक्स: भारतीय मशीनरी और इलेक्ट्रिकल उत्पादों के लिए अमेरिकी बाजार में बढ़ी हुई लागत के कारण निर्यात प्रभावित हो सकता है।
फार्मा और केमिकल इंडस्ट्री: अमेरिका भारत की फार्मास्युटिकल और केमिकल इंडस्ट्री का एक बड़ा बाजार है। हालांकि, शुल्क वृद्धि इन क्षेत्रों में भी लागत बढ़ा सकती है।
भारत की प्रतिक्रिया और संभावित कदम
भारत सरकार इस टैरिफ के प्रभावों का आकलन कर रही है। वाणिज्य मंत्रालय अमेरिका के इस निर्णय का व्यापक विश्लेषण कर रहा है और संभावित जवाबी कदम उठाने पर विचार कर रहा है। अमेरिकी प्रशासन ने यह भी संकेत दिया है कि यदि भारत उनकी व्यापारिक चिंताओं को हल करने में सहयोग करता है, तो टैरिफ में राहत दी जा सकती है। Tariff :