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अमेरिका और ईरान के बीच चल रही तनाव कम करने की कूटनीतिक कोशिशों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। दोनों देशों के बीच संभावित शांति वार्ता की उम्मीदें उस वक्त टूट गईं जब ईरान ने अमेरिका के 14-सूत्रीय प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया।

Iran-US Conflict : अमेरिका और ईरान के बीच चल रही तनाव कम करने की कूटनीतिक कोशिशों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। दोनों देशों के बीच संभावित शांति वार्ता की उम्मीदें उस वक्त टूट गईं जब ईरान ने अमेरिका के 14-सूत्रीय प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। इस घटनाक्रम के बाद अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तीखी प्रतिक्रिया दी, जबकि वैश्विक तेल बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई। Iran-US Conflict
ईरान ने अपने जवाब में स्पष्ट किया कि युद्ध का अंत सभी मोर्चों पर एक साथ होना चाहिए। तेहरान ने विशेष रूप से लेबनान की स्थिति, क्षेत्रीय सुरक्षा और होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता का मुद्दा उठाया। ईरान का दावा है कि अमेरिका की शर्तें अत्यधिक और अस्वीकार्य हैं। उधर, ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरान के रुख को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उनकी इस टिप्पणी के बाद कूटनीतिक तनाव और बढ़ गया है। Iran-US Conflict
इस गतिरोध का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ा। बातचीत विफल होने की खबरों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में करीब 3 डॉलर प्रति बैरल की तेजी दर्ज की गई, जिससे बाजार में चिंता और बढ़ गई है। ईरान ने अपने जवाब में युद्ध से हुए नुकसान के लिए मुआवजे की मांग भी रखी है। इसके साथ ही उसने अमेरिका से नौसैनिक गतिविधियों पर रोक, प्रतिबंधों में राहत और तेल निर्यात पर लगी पाबंदियों को हटाने की मांग दोहराई है। ईरान का यह भी कहना है कि उसकी संप्रभुता और होर्मुज स्ट्रेट पर अधिकार को चुनौती नहीं दी जा सकती। Iran-US Conflict
वहीं, अमेरिकी पक्ष का रुख इसके विपरीत रहा है। वॉशिंगटन का मानना है कि पहले पूरी तरह संघर्ष विराम जरूरी है, उसके बाद ही परमाणु कार्यक्रम जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बातचीत संभव हो सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने सीमित यूरेनियम भंडार को कम करने और कुछ हिस्से को तीसरे देश में स्थानांतरित करने का भी संकेत दिया है। Iran-US Conflict
इसी बीच क्षेत्रीय स्तर पर हलचल भी तेज रही। कतर एनर्जी का एलएनजी जहाज अल खरैतियात होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजरकर पाकिस्तान के पोर्ट कासिम पहुंचा, जिसे तनावपूर्ण माहौल में एक अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, यह यात्रा क्षेत्रीय भरोसे को बनाए रखने की कोशिश का हिस्सा थी। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान इस पूरे मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और ईरान का जवाब अमेरिकी पक्ष तक पहुंचाने में उसने अहम भूमिका निभाई है। कुल मिलाकर, हालिया घटनाक्रम ने एक बार फिर पश्चिम एशिया में तनाव की स्थिति को गहरा दिया है, जबकि वैश्विक तेल बाजार पर इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है।
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