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दुनिया की सबसे अहम तेल आपूर्ति मार्गों में से एक स्ट्रेट आफ होर्मुज एक बार फिर वैश्विक तनाव का केंद्र बन गया है। शनिवार को यहां अचानक हालात बिगड़ गए, जब ईरान की ओर से फायरिंग की घटनाएं सामने आईं।

Middle East Crisis : दुनिया की सबसे अहम तेल आपूर्ति मार्गों में से एक स्ट्रेट आफ होर्मुज एक बार फिर वैश्विक तनाव का केंद्र बन गया है। शनिवार को यहां अचानक हालात बिगड़ गए, जब ईरान की ओर से फायरिंग की घटनाएं सामने आईं। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस दौरान भारतीय झंडे वाले दो व्यापारिक जहाज भी निशाने पर आए, जिससे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग सेक्टर में हड़कंप मच गया।
Middle East Crisis
सूत्रों के मुताबिक दो भारतीय जहाजों पर फायरिंग की गई। एक जहाज में करीब 20 लाख बैरल इराकी तेल लदा था। राहत की बात यह है कि जहाज और क्रू पूरी तरह सुरक्षित हैं। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई आईआरजीसी से जुड़ी गनबोट्स द्वारा की गई। इस घटना के बाद करीब 20 जहाजों को वापस लौटाया गया। जहाजों को ओमान की दिशा में मोड़ दिया गया। वैश्विक शिपिंग रूट पर तत्काल असर पड़ा। कुछ रिपोर्ट्स में यह संख्या 23 तक बताई गई है, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाती हैं।Middle East Crisis
स्ट्रेट आफ होर्मुज को दुनिया की तेल लाइफलाइन माना जाता है। दुनिया का लगभग 20% तेल इसी रास्ते से गुजरता है। मिडिल ईस्ट से एशिया, यूरोप तक सप्लाई का मुख्य मार्ग है। यहां तनाव का मतलब वैश्विक तेल संकट का खतरा बहुत ज्यादा है। ईरान ने आरोप लगाया है कि युनाइटेड स्टेट्स ने उसके जहाजों को रोकने की कोशिश की। ईरानी बंदरगाहों के पास नाकाबंदी जैसे हालात बनाए जिसकी वजह से यह घटना हुई। इसी के जवाब में ईरान ने होर्मुज पर सख्त सैन्य नियंत्रण लागू कर दिया। Middle East Crisis
घटना के दौरान यूएस नेवी की मौजूदगी के बावजूद फायरिंग को रोकने में कोई हस्तक्षेप नहीं हुआ। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी बलों को समय पर भनक तक नहीं लगी। इससे अमेरिका की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस घटना के बाद कच्चे तेल की कीमतों में उछाल की आशंका है। शिपिंग इंश्योरेंस महंगा हो सकता है और सप्लाई चेन प्रभावित होने का खतरा बन गया है। भारत सरकार ने ईरान के राजदूत को तलब किया। घटना पर कड़ी आपत्ति जताई और भारतीय जहाजों की सुरक्षा को प्राथमिकता बताया है। Middle East Crisis
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