
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ये बसें पंजाब की ओर जा रही थीं। एन-70 राजमार्ग पर सुर-दकई इलाके में हथियारबंद आतंकियों ने सड़क जाम कर बसों को रोका। फिर यात्रियों के पहचान पत्रों की जांच शुरू हुई और उनमें से 10 लोगों को जबरन नीचे उतारा गया। कुछ देर बाद गोलियों की आवाजें सुनाई दीं और बाद में नौ शव बरामद किए गए। यह सुनियोजित नरसंहार एक स्पष्ट संदेश है — बलूच आतंकवाद अब लोगों की जातीय या क्षेत्रीय पहचान को भी निशाना बना रहा है।
प्रतिबंधित बलूच संगठन बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLA) ने इस वीभत्स घटना की जिम्मेदारी ली है। संगठन के प्रवक्ता ने दावा किया कि उनके लड़ाकों ने मुसाखाइल, मख्तार और खजूरी के बीच मार्ग को अवरुद्ध कर यह कार्रवाई अंजाम दी। इस ‘ऑपरेशन’ को खुले तौर पर जायज ठहराने की कोशिश की गई है — जो दर्शाता है कि यह घटना केवल क्रूरता नहीं, बल्कि आतंकी राजनीति की शतरंज का हिस्सा है।
झोब के सहायक आयुक्त नवीद आलम ने इस हत्या की पुष्टि करते हुए बताया कि मृतकों के शवों को उनके पैतृक स्थानों पर भेजने की प्रक्रिया चल रही है। बलूचिस्तान सरकार के प्रवक्ता शाहिद रिंद ने यह भी स्वीकार किया कि एक साथ कई जगहों पर आतंकी हमले हुए, जिनमें काकट, मस्तुंग और सुर-दकई शामिल हैं। वहीं मुख्यमंत्री मीर सरफराज बुगती ने इस बर्बर कृत्य की निंदा करते हुए कहा कि निर्दोष लोगों को उनकी पहचान के आधार पर चुन-चुनकर मारा गया है, जो आतंक की एक शर्मनाक मिसाल है। उन्होंने कहा, हमलावरों ने एक बार फिर दिखा दिया है कि वे न केवल मानवता के दुश्मन हैं, बल्कि कायरता की हदें भी पार कर चुके हैं।
मुख्यमंत्री बुगती ने बताया कि सरकार ने यात्रियों की सुरक्षा के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू कर रखी है, जिसके तहत रात में एन-70 पर यात्री बसों के आवागमन पर रोक है। बावजूद इसके, घटना वाली एक बस ने नियमों का पालन करते हुए शाम को यात्रा शुरू की थी। अब यह जांच का विषय है कि सुरक्षा इंतजामों में कहां चूक रह गई। उन्होंने यह भी बताया कि कुछ दिन पहले इलाके में आतंकी हमले की सामान्य चेतावनी मिली थी, जिस पर कलात और मस्तुंग में सुरक्षा बढ़ाई गई थी। लेकिन जिस क्षेत्र में यह नरसंहार हुआ, उसे ‘कम खतरे वाला’ माना गया था। Pakistan News