अमेरिका में लिखी जा रही पाकिस्तान की बर्बादी की पटकथा
भारत
चेतना मंच
02 Dec 2025 04:14 AM
नई दिल्ली। अमेरिकी सीनेट के 22 रिपब्लिकन मेंबर्स ने तालिबान और आतंकवाद पर नकेल कसने के लिए एक बेहद जरूरी बिल पेश किया है। इस बिल में तालिबान से ज्यादा पाकिस्तान पर फोकस किया गया है। अगर 180 दिन के अंदर यह बिल पास हो जाता है और राष्ट्रपति जो बाइडेन इसको हरी झंडी दिखा देते हैं तो आप सच जानिए पाकिस्तान की बर्बादी लगभग तय है। इस बिल के पेश होने के बाद इमरान सरकार से लेकर कायर बाजवा की और आईएसआई सब दहशत में हैं। बिल के पास होने में भी दिक्कत आने की संभावना भी नजर नहीं आ रही है क्योंकि पाकिस्तान की हरकतों को देखते हुए डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन दोनों का लगभग एक ही मत है। डोनाल्ड ट्रंप ने तो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से मुलाकात कर ली थी लेकिन वर्तमान राष्ट्रपति जो बाइडेन ने तो अपना पद ग्रहण करने के बाद अभी तक इमरान से फोन पर बात तक नहीं की है।
जाने क्या है ये बिल :
इस बिल का नाम है, 'अफगानिस्तान में आतंकवाद विरोधी अभियान, निगरानी और जवाबदेही' इस बिल को जिस कमेटी ने तैयार किया है उसके चेयरमैन रिपब्लिकन सीनेटर जिम रीश हैं। बिल में बाइडेन प्रशासन से कुछ बेहद सख्त सवाल किए गए हैं। इसके अलावा 20 साल चली अफगान जंग में पाकिस्तान की जवाबदेही और तालिबान के मददगारों की जानकारी मांगी गई है। बिल के माध्यम से यह भी पूछा गया है कि क्या पंजशीर घाटी में हुई जंग में पाकिस्तान ने तालिबान को खुली मदद दी? क्या पाकिस्तान ने नॉन स्टेट एक्टर्स और ड्रग तस्करों के जरिए तालिबान को मदद और अमेरिका को नुकसान पहुंचाया? यानी सवाल बेहद गंभीर और सख्त हैं। हालांकि इन्हें नया कहना गलत होगा। खुद अमेरिका हर सच जानता है, लेकिन न जाने क्यों, कभी पाकिस्तान को सजा नहीं दे पाया।
बिल के पास हो जाने के बाद पाकिस्तान की कमर टूटना तय माना जा रहा है। इसके पास होने के बाद आईएमएफ, एडीबी और बैंक पाकिस्तान को किसी भी तरह का लोन नहीं दे पाएंगे। डॉलर के मुकाबले पाकिस्तान की करेंगी बर्बाद हो जाएगी। एक्सपोर्ट और ट्रेड पर बैन लग जाएगा। जिसके चलते पाकिस्तान का 70 प्रतिशत एक्सपोर्ट पूरी तरह बंद हो जाएगा।
अमेरिकी सेना के सबसे बड़े अफसर जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ जनरल मार्क मिले हाल ही में सीनेट के सामने पेश हुए थे। कुछ सीनेटर्स ने उनसे पाकिस्तान को लेकर सवाल पूछे तो जनरल मार्क ने कहा- कुछ बातें टॉप सीक्रेट हैं। मैं बंद कमरे में ही इनका जवाब दूंगा। मार्क ने ऐसा इसलिए किया, क्योंकि सीनेट की सुनवाई कैमरों के सामने होती है और दुनिया में इसे कहीं भी देखा जा सकता है। लिहाजा अति संवेदनशील जानकारी जनरल मार्क ने नहीं दी। आपको बता दें कि इस बिल को तैयार करने में कई संसदीय समितियों ने सहयोग दिया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री और खुफिया एजेंसियां 180 दिन में तमाम जानकारी इन कमेटियों को मुहैया कराएंगी। इन पर उच्च स्तर पर विचार और बहस होगी। इसके बाद कानून को अंतिम रूप दिया जाएगा। राष्ट्रपति बाइडेन ने मंजूरी दी तो कानून लागू हो जाएगा। अमेरिकी मीडिया और आम लोगों का मानना है कि अफगानिस्तान से अमेरिकी फौज की शर्मनाक वापसी इस देश के सुपर पॉवर होने पर बड़ा सवालिया निशान है। दुनिया में अमेरिकी साख को बट्टा लगा है। बाइडेन प्रशासरन को देश में चारों तरफ से खरी-खोटी सुनने को मिल रही है। अमेरिकी संसद और आम लोगों के जेहन में यह बात मौजूद है कि पाकिस्तान की वजह से ही तालिबान ने हुकूमत पर कब्जा किया और वो ही अब इस सरकार को मान्यता दिलाने के लिए दिन-रात एक कर रहा है। इस मुद्दे पर रिपब्लिकन और डेमोक्रेट एक होते नजर आ रहे हैं। इसलिए यह बिल जल्द पास हो सकता है। वैसे तो पाकिस्तान पूरे विश्व में आतंकियों के लिए सबसे सुरक्षित पनाहगाह माना जाता है। विश्व में कहीं भी कोई भी आतंकी घटना होती है तो उसके पीछे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान का नाम सामने आता है। अभी हाल ही में संयुक्त राष्ट्र के मंच से इमरान खान के भाषण का जवाब देते हुए भारतीय अधिकारी स्नेहा दूबे ने पाकिस्तान की बखिया उधेड़ते हुए कहा था कि इससे ज्यादा हास्यास्पद और कुछ नहीं हो सकता कि पाकिस्तान दूसरों के घरों में आग लगाता है लेकिन विश्व पटल पर वो खुद को फायर फाइटर की भूमिका में पेश करता है। इस बिल के माध्यम से उसके ऊपर लग रहे आरोपों को भी नजर अंदाज नहीं किया जाएगा। उस पर आरोप हैं कि पाकिस्तान ने तालिबान को सैन्य मदद और ट्रेनिंग दी। उसने आतंकियों को सुरक्षित स्थान मुहैया कराए। नॉन स्टेट एक्टर्स को उसने सहारा दिया। उसने आतंकियों को खुफिया जानकारी भी उपलब्ध कराई।
बिल के सीनेट में पास होते ही पाकिस्तान में दहशत फैल गई। इमरान सरकार में मंत्री शिरीन मजारी ने सोशल मीडिया पर कहा- हमने 20 साल अमेरिका और नाटो का साथ दिया। हमें फिर बलि का बकरा बनाया जा रहा है। हमारे 80 हजार लोग और फौजी मारे गए। 450 ड्रोन हमले झेले। अब फिर भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। वहीं होम मिनिस्टर शेख राशिद का कहना है कि, अमेरिकी सीनेट में बिल आ चुका है। हमारे बड़े और कड़े इम्तिहान होंगे, लेकिन हम सरेंडर नहीं करेंगे। पूर्व डिप्लोमैट और पीपीपी नेता शेरी रहमान का कहना है कि, अगर यह बिल पास हो गया तो हम पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ेगा। ये हमारे साथ पहले कभी नहीं हुआ। विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा- अमेरिका में पाकिस्तान विरोधी सक्रिय हैं। हमने हमेशा अमेरिका की मदद की है। आज हमें ही गलत ठहराया जा रहा है।
बिल पास होने के बाद पाकिस्तान का क्या हश्र होगा?
पाकिस्तान में इकोनॉमी के एक्सपर्ट प्रोफेसर हामिद सिद्दीकी ने एक चैनल से कहा- यह हमारे लिए बहुत बड़े खतरे की घंटी है। दुआ कीजिए कि ये बिल पास न हो। सिद्दीकी के मुताबिक, बिल पास हुआ तो मुल्क पर ये असर होंगे।
दुनिया के तमाम फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन यानी आर्थिक संगठन जैसे IMF, वर्ल्ड बैंक और एशियन डेवलपमेंट बैंक आर्थिक मदद और कर्ज देना फौरन बंद कर देंगे। ये सिलसिला बहुत आगे बढ़ जाएगा। अभी डॉलर का एक्सचेंज रेट 172 पाकिस्तानी रुपए है। पाबंदियां लगी तो ये चंद दिनों में 200 रुपए के पार हो जाएगा।
अमेरिका ने एम्बार्गो एक्ट 1807 में बनाया था। प्रस्तावित बिल उसका ही एक्सटेंशन है। हम पर आर्म्स डील, टेक्नोलॉजी, ट्रेड और एक्सपोर्ट से जुड़ी सख्त पाबंदियां लग सकती हैं। अमेरिका, उसके मित्र देश और संगठन एक साथ हमारी हर तरह की मदद बंद कर देंगे।