ट्रंप की नई टैरिफ नीति से पूरी दुनिया परेशान, खुद अमेरिका भी चुकाने लगा भारी कीमत
Donald Trump
भारत
RP Raghuvanshi
30 Nov 2025 06:41 PM
डोनाल्ड ट्रंप की नई टैरिफ नीति ने वैश्विक व्यापार जगत में खलबली मचा दी है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और रिपब्लिकन नेता ट्रंप ने एक बार फिर व्यापारिक नीतियों को कूटनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है, जिसका असर न सिर्फ दूसरे देशों पर बल्कि खुद अमेरिका की अर्थव्यवस्था और आम जनता पर भी पड़ रहा है। Donald Trump
ग्लोबल ट्रेड पर सबसे बड़ा हमला
7 अगस्त से लागू हुई ट्रंप की भारी-भरकम टैरिफ नीति का असर भारत, जापान, यूके, कनाडा जैसे विकसित देशों से लेकर लाओस, अल्जीरिया जैसे विकासशील देशों तक में महसूस किया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम 'जीत-हार' का खेल नहीं, बल्कि 'सब हारते हैं' जैसी स्थिति बनाता है। न्यूयॉर्क लॉ स्कूल के प्रोफेसर बैरी एपलटन ने कहा, "इस नीति से कोई विजेता नहीं निकलेगा। अमेरिका भी इससे अछूता नहीं रहेगा।"
धमकी से डील की विदेश नीति
दूसरी बार राष्ट्रपति पद संभालने के बाद ट्रंप ने पारंपरिक नियमों को दरकिनार कर अपनी मर्जी से टैरिफ थोपना शुरू कर दिया। उन्होंने 2 अप्रैल को व्यापार घाटे को 'राष्ट्रीय आपातकाल' घोषित कर दिया और 1977 के एक पुराने कानून का सहारा लेकर बिना कांग्रेस की मंजूरी के आयात पर भारी टैक्स लगा दिया। अब देश-दुनिया से सौदे कूटनीति से नहीं, सीधे धमकी देकर किए जा रहे हैं। WTO के पूर्व उपमहानिदेशक एलन वोल्फ ने इसे बेहद खतरनाक रुझान बताया है।
अमीर-गरीब देश सभी चपेट में
ट्रंप की नीति का असर सिर्फ चीन या यूरोप जैसे बड़े खिलाड़ियों पर नहीं पड़ा बल्कि गरीब देशों पर सबसे ज्यादा बोझ पड़ा है। लाओस पर 40% टैरिफ, जबकि उसकी प्रति व्यक्ति आय केवल 2,100 डॉलर। अल्जीरिया पर 30% टैक्स, जिसकी प्रति व्यक्ति आय सिर्फ 5,600 डॉलर। वहीं, ब्राजील पर 50% टैरिफ इसलिए लगाया गया क्योंकि ट्रंप को वहां के पूर्व राष्ट्रपति की नीतियां पसंद नहीं थीं। कनाडा पर 35% टैक्स सिर्फ इसलिए लगा क्योंकि ओटावा ने फिलीस्तीन को मान्यता देने का समर्थन किया था।
ट्रंप की शर्तें मानने वाले देशों को भी राहत नहीं मिली। ब्रिटेन को अब अमेरिका में सामान बेचने पर 10% टैक्स देना पड़ रहा है (पहले 1.3%), जापान और यूरोपीय संघ भी 15% टैरिफ झेल रहे हैं दक्षिण कोरिया, पाकिस्तान, वियतनाम, फिलीपींस जैसे देशों को भी समझौते के बावजूद ज्यादा टैक्स देना पड़ रहा है इन टैरिफों का सबसे बड़ा झटका अमेरिकी उपभोक्ताओं को लगा है। रोजमर्रा की चीजें जैसे स्नीकर्स, बैग, टीवी, इलेक्ट्रॉनिक्स और गेमिंग प्रोडक्ट्स की कीमतों में जबरदस्त इजाफा हुआ है। येल यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट के मुताबिक, एक औसत अमेरिकी परिवार को अब सालाना 2,400 डॉलर (लगभग 2 लाख रुपये) का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है। 2018 में अमेरिका का औसत आयात टैक्स 2.5% था, जो अब 2025 तक बढ़कर 18.3% तक पहुंच गया है 1934 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर। एलन वोल्फ के अनुसार, "यह नीति अंततः अमेरिका के ही गरीब और मध्यम वर्ग को सबसे ज्यादा चोट पहुंचा रही है।" Donald Trump