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US-Pakistan Relations: पाकिस्तान ईरान-US शांति डील के प्रयासों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। ट्रंप ने कई मौकों पर पीएम शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर की तारीफ की है। अगर पाकिस्तान “न” कहता है तो अमेरिकी दोस्ती और फायदे से हाथ धो सकता है।

Abraham Accords: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान समेत कई मुस्लिम देशों को कूटनीतिक चौराहे पर खड़ा कर दिया है। ईरान के साथ चल रही डील के बीच उन्होंने अब्राहम अकॉर्ड्स को अनिवार्य बता दिया है। उनके इस कदम ने एक बार फिर साबित कर दिया कि ट्रंप की हां में हां मिलाने के जोखिम बहुत बड़े हो सकते हैं।
अब्राहम अकॉर्ड क्या है?
2020 में ट्रंप के पहले कार्यकाल में UAE, बहरीन, मोरक्को और सूडान ने इजरायल के साथ राजनयिक संबंध सामान्य कर लिए थे। इन समझौतों का फोकस आर्थिक सहयोग, व्यापार, सुरक्षा और पर्यटन पर था। फिलिस्तीन मुद्दे को अलग रखकर इजरायल को मान्यता देने का यह नया मॉडल था। अब ट्रंप इसे और आगे बढ़ाना चाहते हैं।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर क्या लिखा?
25 मई 2026 को Truth Social पर ट्रंप ने लिखा: “अमेरिका द्वारा इस जटिल पहेली को सुलझाने के तमाम प्रयासों के बाद, अब यह अनिवार्य होना चाहिए कि ये सभी देश एक साथ अब्राहम अकॉर्ड्स पर हस्ताक्षर करें... मैं mandatory रूप से मांग कर रहा हूं कि सभी देश तुरंत अब्राहम अकॉर्ड्स पर साइन करें। और अगर ईरान मेरे साथ समझौता करता है, तो यह सम्मान की बात होगी कि वे भी इस विश्व गठबंधन का हिस्सा बनें।”
ट्रंप ने सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, तुर्की, मिस्र और जॉर्डन के नेताओं को इस लिस्ट में शामिल किया। इसमें से केवल मिस्र और जॉर्डन के ही इजरायल से पूर्ण राजनयिक संबंध हैं। बाकी पूर्ण संबंध नहीं रखते हैं।
ट्रंप के बयान के मायने और ईरान कनेक्शन:
ट्रंप का तर्क है — अगर अमेरिका ईरान के साथ शांति डील कर रहा है, तो इन मुस्लिम देशों को भी इजरायल को मान्यता देकर इसमें योगदान देना चाहिए। उन्होंने ईरान डील को अब्राहम अकॉर्ड्स से सीधे जोड़ दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शनिवार को ट्रंप ने इन देशों के नेताओं से फोन पर बात की थी।
पाकिस्तान क्यों टेंशन में?
पाकिस्तान की पुरानी नीति है — फिलिस्तीन को स्वतंत्र राज्य (1967 की सीमाओं के साथ) मिलने तक इजरायल को मान्यता नहीं। घरेलू स्तर पर फिलिस्तीन समर्थन बहुत मजबूत है। अगर सरकार ट्रंप की डिमांड मानती है तो धार्मिक संगठन और जनता भारी विरोध करेंगे।
दूसरी तरफ, पाकिस्तान ईरान-US शांति डील के प्रयासों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। ट्रंप ने कई मौकों पर पीएम शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर की तारीफ की है। अगर पाकिस्तान “न” कहता है तो अमेरिकी दोस्ती और फायदे से हाथ धो सकता है।
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