
ट्रंप ने इस मंशा पर जोर देते हुए कहा कि वे भारत के साथ सभी व्यापार अवरोधों को खत्म करना चाहते हैं, जो अभी तक अमेरिकी कंपनियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बने हुए थे। ट्रंप ने कहा- “यह विश्वास से परे है कि अब हम भारत में जाकर खुले रूप से व्यापार कर सकेंगे। अभी वहां कारोबारी पहुंच इतनी सीमित है कि आप उसकी कल्पना भी नहीं कर सकते । यह बयान ऐसे समय आया है जब 9 जुलाई को प्रस्तावित टैरिफ डेडलाइन समाप्त हो रही है।
ट्रंप ने कहा, “यह कोई अंतिम तारीख नहीं है। अमेरिका जो चाहे कर सकता है—चाहे तो इसे बढ़ा सकते हैं, घटा सकते हैं या समाप्त कर सकते हैं। मैं खुद चाहता हूं कि यह दरें छोटी हों, लेकिन सभी देशों को यह स्पष्ट कर दिया जाए कि वे 25% टैरिफ अदा कर रहे हैं।” उन्होंने आगे बताया कि वे अगले 10 से 12 दिनों में एक आधिकारिक पत्र सभी सहयोगी देशों को भेजेंगे जिसमें बताया जाएगा कि अमेरिका से वस्तुओं के आयात पर उन्हें कितनी शुल्क दर देनी होगी। ट्रंप ने कहा कि चीन के साथ टैरिफ विवाद को हल कर लिया गया है और भारत के साथ भी अमेरिका उसी दिशा में बढ़ रहा है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक वार्ता इस समय कुछ संवेदनशील मुद्दों पर अटकी हुई है। मुख्य विवाद इस्पात, कृषि उत्पाद और ऑटो कलपुर्जों पर आयात शुल्क को लेकर है। भारत 9 जुलाई से प्रस्तावित 26% रेसिप्रोकल टैरिफ को हटाने की मांग कर रहा है, जिसे अमेरिका लागू करना चाहता है। भारत ने अमेरिका को संकेत दिया है कि वह बादाम, पिस्ता और अखरोट जैसी वस्तुओं पर शुल्क में कटौती कर सकता है।
साथ ही ऊर्जा, रक्षा और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों में अमेरिकी उत्पादों को तरजीही प्रवेश की पेशकश की गई है। लेकिन अमेरिकी वार्ताकार फिलहाल भारतीय प्रस्तावों पर सहमत नहीं दिख रहे। 2 अप्रैल को ट्रंप प्रशासन ने 200 से अधिक देशों पर 'पारस्परिक टैरिफ नीति' लागू की, जिसमें भारत पर 26% टैरिफ लगाया गया। यह शुल्क 9 अप्रैल से प्रभावी हुआ, जिसकी न्यूनतम दर 10% और अधिकतम 49% थी। हालांकि, 10 अप्रैल को वैश्विक बाजार में भारी गिरावट को देखते हुए ट्रंप ने 90 दिनों की छूट देने की घोषणा की थी। Donald Trump