ईरान-US जंग का सऊदी को भारी नुकसान, रूस पर भारत की नजर

अमेरिका और भारत के बीच एक व्यापार समझौते पर सहमति बनी थी। इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारत पर लगने वाले टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया था, साथ ही रूसी तेल की खरीद पर लगाए गए अतिरिक्त 25% टैरिफ को भी खत्म कर दिया था।

The Saudi of the Iran-US war
रूसी तेल को लेकर भारत की बदलती रणनीति (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar02 Mar 2026 08:15 PM
bookmark

Internatioanl News :मध्य-पूर्व में ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच छिड़े युद्ध ने वैश्विक तेल आपूर्ति की राह रोक दी है। होर्मुज की खाड़ी (Strait of Hormuz) को ईरान द्वारा बंद कर दिए जाने के बाद भारत को बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण रूसी तेल से दूरी बनाई थी, लेकिन सऊदी अरब समेत खाड़ी देशों से तेल की आपूर्ति अनिश्चित होने के बाद भारत एक बार फिर रूस की ओर देखने को मजबूर हो गया है।

होर्मुज की खाड़ी में ताला, सऊदी को भारी नुकसान

बीते शनिवार से अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे संघर्ष के बीच ईरान ने तेल निर्यात की जीवन रेखा मानी जाने वाली होर्मुज की खाड़ी से जहाजों की आवाजाही पर रोक लगा दी। इसका सीधा असर दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक भारत पर पड़ा है। हाल ही में भारत ने रूसी तेल की खरीद कम करके सऊदी अरब और अन्य मध्य-पूर्वी देशों पर निर्भरता बढ़ाई थी, लेकिन अब यह विकल्प भी संकट में पड़ गया है।

स्थिति इतनी गंभीर है कि ईरान ने सऊदी अरब की दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी अरामको की 'रास तनुरा' रिफाइनरी पर ड्रोन हमले भी किए। हालांकि सऊदी ने इन्हें नाकाम कर दिया, लेकिन एहतियातन रिफाइनरी को बंद करना पड़ा, जिससे सऊदी के तेल क्षेत्र को भारी नुकसान हो रहा है।

भारत का 'इमर्जेंसी प्लान' और रूसी जहाजों का इंतजार

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, इस संकट से निपटने के लिए भारत ने आकस्मिक योजना (Emergency Plan) तैयार करनी शुरू कर दी है। सोमवार को नई दिल्ली में सरकारी रिफाइनरियों और सरकारी अधिकारियों की बैठक हुई, जिसमें तेल आपूर्ति सुनिश्चित करने के उपायों पर चर्चा की गई। सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि भारत अपने समुद्री क्षेत्र के पास भटक रहे उन रूसी तेल जहाजों को खरीदने पर विचार कर रहा है जिनका कोई खरीदार नहीं है। अनुमान है कि एशियाई जलक्षेत्र में इस समय टैंकरों पर करीब 95 लाख बैरल रूसी तेल मौजूद है, जिसे भारत अपना सकता है।

टैरिफ की नीतिगत उलझन और अमेरिकी दबाव

यह घटनाक्रम तब हुआ है जब हाल ही में अमेरिका और भारत के बीच एक व्यापार समझौते पर सहमति बनी थी। इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारत पर लगने वाले टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया था, साथ ही रूसी तेल की खरीद पर लगाए गए अतिरिक्त 25% टैरिफ को भी खत्म कर दिया था। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया था कि यह छूट इसलिए दी गई क्योंकि भारत रूसी तेल खरीदना बंद करने पर सहमत हो गया है।

भारत ने आधिकारिक तौर पर रूसी तेल खरीदना बंद करने की कभी पुष्टि नहीं की, लेकिन अमेरिकी दबाव के चलते फरवरी में रूस से तेल आयात गिरकर प्रतिदिन 10 लाख बैरल रह गया था, जो सितंबर 2022 के बाद सबसे कम स्तर था। इस दौरान सऊदी अरब भारत का शीर्ष तेल आपूर्तिकर्ता बन गया था।

सरकार की कवायद: अमेरिकी छूट की मांग

रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेल मंत्रालय के अधिकारी विदेश मंत्रालय से अमेरिका से छूट दिलाने का प्रयास कर रहे हैं। भारतीय तेल कंपनियां बिना अमेरिकी छूट लिए रूसी तेल खरीदने का जोखिम नहीं उठाना चाहतीं, ताकि वे अमेरिकी प्रतिबंधों की जद में न आएं। लेकिन मध्य-पूर्व में गहराते संकट को देखते हुए रूसी तेल की खरीद बढ़ाना भारत के लिए सबसे व्यावहारिक विकल्प बनकर उभर रहा है। Internatioanl News

संबंधित खबरें

अगली खबर पढ़ें

अमेरिका-इजराइल को कितनी क्षति, युद्ध के 8 बड़े सवालों के जवाब

अमेरिका और इजराइल ने ईरान के करीब 24 प्रांतों को अपना निशाना बनाया। तेहरान, इस्फहान, कोम जैसे बड़े शहरों में भारी तबाही मची। फोर्डो और नतांज जैसे प्रमुख परमाणु ठिकानों पर भी हमले किए गए, जिससे ईरान का परमाणु कार्यक्रम गंभीर रूप से कमजोर हो गया है। हमलों के पहले दिन ही 201 नागरिकों की मौत हो गई।

Which countries support
तबाही का दृश्य (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar01 Mar 2026 04:42 PM
bookmark

Iran-Israel War : मध्य पूर्व में तनाव अब खुले सैन्य टकराव में बदल चुका है। ईरान और इजराइल के बीच छिड़े इस युद्ध ने पूरी दुनिया को दहशत में डाल दिया है। ईरान के कई शहरों पर हवाई हमले किए गए हैं, जबकि जवाबी कार्रवाई में ईरान ने अमेरिका और इजराइल को भारी नुकसान पहुंचाया है। इस लड़ाई का असर दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ने लगा है। 

आइए, इस युद्ध से जुड़े 8 सबसे बड़े सवालों के जवाब जानते हैं...

1. सबसे बड़ा झटका: खामेनेई की मौत

इस युद्ध का सबसे बड़ा और सनसनीखेज खुलासा ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत है। 28 फरवरी की सुबह तेहरान के पास्तुर जिले में उनके सुरक्षित बंकर पर अमेरिका और इजराइल ने सुसाइड ड्रोन से हमला किया। इस हमले में खामेनेई के साथ ही उनके परिवार के कई सदस्य और शीर्ष ईरानी अधिकारी भी मारे गए। इसके बाद ईरान में सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया तेजी से शुरू हो गई है, जिसे लेकर दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं।

2. ईरान में कितना हुआ विनाश?

अमेरिका और इजराइल ने ईरान के करीब 24 प्रांतों को अपना निशाना बनाया। तेहरान, इस्फहान, कोम जैसे बड़े शहरों में भारी तबाही मची। फोर्डो और नतांज जैसे प्रमुख परमाणु ठिकानों पर भी हमले किए गए, जिससे ईरान का परमाणु कार्यक्रम गंभीर रूप से कमजोर हो गया है। हमलों के पहले दिन ही 201 नागरिकों की मौत हो गई और 747 से अधिक घायल हुए। मीनाब में एक लड़कियों के स्कूल पर हुए हमले में 118 छात्राओं की जान चली गई, जो इस संघर्ष की भयावहता दर्शाता है।

3. ईरान का जवाबी हमला: अमेरिकी ठिकानों को निशाना

ईरान ने चुप्पी नहीं साधी और उसने अमेरिका के मध्य पूर्व में मौजूद 27 सैन्य ठिकानों पर जबरदस्त मिसाइल और ड्रोन हमले किए। कतर का अल उदीद एयर बेस, बहरीन में अमेरिकी नौसेना का 5वां बेड़ा और UAE-कुवैत के ठिकाने इसकी जद में आए। हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया कि उन्हें हल्का नुकसान हुआ है और कोई बड़ी जान-माल की क्षति नहीं हुई। वहीं, इराक में ईरानी हमलों में दो लोगों की मौत हुई।

4. इजराइल पर भारी पड़ाव

ईरान ने इजराइल पर भी बैलिस्टिक मिसाइलों की बौछार कर दी। तेल अवीव और हाइफा में सायरन बजते रहे और हवाई हमलों के डर से एयरस्पेस बंद कर दिया गया। इजराइल के पास मौजूद एयर डिफेंस सिस्टम ने अधिकांश मिसाइलों को रोक लिया, लेकिन फिर भी तेल अवीव में एक महिला की मौत हुई और 121 लोग घायल हुए। उत्तरी इजराइल में एक 9 मंजिला इमारत को भी नुकसान पहुंचा।

5. युद्ध का कारण: परमाणु विवाद

इस भीषण युद्ध का मुख्य कारण ईरान का परमाणु कार्यक्रम है। अमेरिका और इजराइल का आरोप है कि ईरान परमाणु हथियार बना रहा है। 6 से 27 फरवरी तक जिनेवा में हुई वार्ता के बावजूद, जब ईरान समझौते के लिए तैयार दिखा, तब भी अमेरिका और इजराइल ने हमला शुरू कर दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कर दिया है कि हमले तब तक जारी रहेंगे जब तक परमाणु खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता।

6. किसका साथ किसने दिया?

इस युद्ध में किसी भी देश ने सार्वजनिक रूप से सैन्य समर्थन नहीं दिया। यह अमेरिका और इजराइल का संयुक्त अभियान है। हालांकि, सऊदी अरब, कतर, UAE जैसे देश अमेरिकी ठिकानों की मेजबानी करते हैं, लेकिन उन्होंने ईरानी हमलों की निंदा करते हुए अपने हवाई क्षेत्र को बंद कर दिया और अमेरिका-इजराइल के हमलों का खुलकर समर्थन नहीं किया।

7. खामेनेई के बाद ईरान में सत्ता

खामेनेई की मौत के बाद ईरान के संविधान के अनुच्छेद 111 के अनुसार, असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स नए सुप्रीम लीडर का चुनाव करेगी। जब तक नया नेता चुना नहीं जाता, एक अंतरिम परिषद शासन संभालेगी, जिसमें राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान शामिल होंगे। अमेरिका और इजराइल की नजर ईरान में शासन परिवर्तन पर टिकी है।

8. सोने के दामों में उछाल

युद्ध का सीधा असर वैश्विक बाजार पर पड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सोने के दाम में तेज उछाल आएगा। केडिया एडवाइजरी के निदेशक अजय केडिया के मुताबिक, मार्च तक सोना 15% तक बढ़कर 1.85 लाख रुपये तक पहुंच सकता है। निवेशक इस अनिश्चित दौर में सुरक्षित विकल्प के तौर पर सोने की ओर भाग रहे हैं। Iran-Israel War

संबंधित खबरें

अगली खबर पढ़ें

खामेनेई की मौत के बाद पाकिस्तान में भड़की हिंसा, 8 की मौत

डेली पाकिस्तान मीडिया की रिपोर्ट का दावा है कि पुलिस की जवाबी कार्रवाई में 8 लोगों की मौत हो गई, जबकि 30 से ज्यादा लोग जख्मी हो गए। घायलों को एंबुलेंस के जरिए सिविल अस्पताल पहुंचाया गया है।

Protesters outside the US Embassy in Karachi
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे तोड़फोड़ के वीडियो (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar02 Mar 2026 08:36 AM
bookmark

Attack on US Embassy in Pakistan: ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की मौत की खबर के बाद पाकिस्तान में हालात बेकाबू हो गए हैं। कराची में गुस्साई भीड़ ने अमेरिकी दूतावास पर हमला कर दिया और वहां आग लगा दी। पुलिस द्वारा भीड़ को नियंत्रित करने के दौरान हुई कार्रवाई में 8 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई और 30 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

अमेरिकी दूतावास पर हमला और आगजनी

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत के विरोध में कराची में लोगों का एक बड़ा समूह सड़कों पर उतर आया। प्रदर्शनकारियों ने पहले जमकर नारेबाजी की और फिर अमेरिकी दूतावास की तरफ बढ़ गए। भीड़ ने दूतावास पर हमला करते हुए जमकर तोड़फोड़ की और वहां आग लगा दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले दागे, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने पत्थरबाजी करते हुए पुलिस का मुकाबला किया।

पुलिस कार्रवाई में 8 की मौत

डेली पाकिस्तान मीडिया की रिपोर्ट का दावा है कि पुलिस की जवाबी कार्रवाई में 8 लोगों की मौत हो गई, जबकि 30 से ज्यादा लोग जख्मी हो गए। घायलों को एंबुलेंस के जरिए सिविल अस्पताल पहुंचाया गया है। हालांकि, प्रशासन ने अभी तक मौतों की संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए कराची में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है और दूतावास के आसपास भारी पुलिस बल तैनात है।

अन्य शहरों में भी तनाव

कराची के अलावा पाकिस्तान के अन्य शहरों में भी शिया समुदाय के लोग सड़कों पर निकल आए हैं। लाहौर, पेशावर और रावलपिंडी में भी प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। प्रशासन अन्य शहरों में भी हिंसा भड़कने की आशंका से चौकस है और सड़कों पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। सिंध के गृह मंत्री जियाउल हसन लांजर ने कराची के अतिरिक्त पुलिस महानिरीक्षक से घटना की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

खामेनेई की मौत का सच

इस पूरे हंगामे की वजह ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की दर्दनाक मौत है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शनिवार को अमेरिका और इजराइल ने तेहरान पर संयुक्त हमला बोला, जिसमें खामेनेई के घर और ऑफिस को निशाना बनाया गया। इस हमले में खामेनेई के साथ ही उनकी बेटी, दामाद और परिवार के कई सदस्यों की मौत हो गई। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इसकी पुष्टि की थी, जिसके बाद ईरान ने भी रविवार को खामेनेई की मौत को स्वीकार कर लिया। इस खबर ने पूरे देश में अमेरिका के खिलाफ गुस्सा भड़का दिया है। Attack on US Embassy in Pakistan

संबंधित खबरें