1 करोड़ की फीस भी पड़ी कम! ट्रंप सरकार H-1B वीजा पर फिर से चला रही है कैंची
भारत
चेतना मंच
24 Sep 2025 11:03 AM
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने एक बार फिर से H-1B वीजा को लेकर कड़ा रुख अपना लिया है। पहले जहां वीजा फीस को बढ़ाकर $100,000 (करीब 1 करोड़ रुपये) करने की घोषणा ने हलचल मचाई थी अब एक और बड़ा बदलाव सामने आया है। ट्रंप प्रशासन H-1B वीजा की चयन प्रक्रिया को पूरी तरह से बदलने की योजना बना रहा है। H-1B Visa
स्किल और सैलरी होगी प्राथमिकता
नए प्रस्ताव के तहत, H-1B वीजा अब रैंडम लॉटरी सिस्टम से नहीं बल्कि उम्मीदवार की स्किल लेवल और ऑफर की गई सैलरी के आधार पर दिया जाएगा। यानी जिन्हें ज्यादा वेतन का ऑफर है और जिनका स्किल लेवल ऊंचा है उन्हें वीजा मिलने की संभावना ज्यादा होगी। वेतन के अनुसार उम्मीदवारों को चार स्तरों में बांटा जाएगा। उच्चतम वेतन स्तर वालों को चार बार सिलेक्शन पूल में शामिल किया जाएगा जबकि सबसे कम वेतन स्तर के उम्मीदवार केवल एक बार इसमें आएंगे। इससे साफ है कि शुरुआती करियर के प्रोफेशनल्स और नए ग्रैजुएट्स की राह मुश्किल हो सकती है।
H-1B के दुरुपयोग पर सख्ती
अमेरिकी श्रम विभाग ने ‘प्रोजेक्ट फायरवॉल’ नाम से एक अभियान भी शुरू किया है जिसका मकसद H-1B वीजा के दुरुपयोग को रोकना है। अब H-1B उल्लंघनों की जांच खुद श्रम मंत्री करेंगे और दोषी पाए गए नियोक्ताओं को वीजा कार्यक्रम से अस्थायी रूप से बैन किया जा सकता है। टेक इंडस्ट्री और कमर्शियल संगठनों ने चेतावनी दी है कि यह वेतन आधारित प्रणाली हाल ही में कॉलेज से पास हुए छात्रों की भर्ती पर सीधा असर डालेगी। साथ ही, उन्होंने श्रम विभाग की वेतन रैंकिंग को स्किल लेवल के पैमाने के रूप में इस्तेमाल करने पर भी आपत्ति जताई है।
हाल ही में व्हाइट हाउस ने H-1B वीजा के लिए $100,000 की आवेदन फीस तय की है, जो 21 सितंबर से लागू हो चुकी है। हालांकि बाद में ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह शुल्क केवल नए आवेदनों पर ही लागू होगा। इस फैसले और नई चयन प्रक्रिया को लेकर कानूनी चुनौतियों की भी संभावना है। लीगल एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह प्रस्ताव इमिग्रेशन एंड नेशनलिटी एक्ट का उल्लंघन कर सकता है, जो वीजा आवंटन को “पहले आओ, पहले पाओ” के सिद्धांत पर आधारित करता है।
क्यों है H-1B इतना अहम?
H-1B वीजा अमेरिका में खासतौर पर टेक कंपनियों द्वारा उपयोग किया जाता है, जिससे वो भारत और अन्य देशों से कुशल प्रोफेशनल्स को हायर कर पाते हैं। हर साल इस वीजा के तहत 85,000 नए स्लॉट तय होते हैं, जिनमें से 20,000 पोस्टग्रेजुएट्स के लिए आरक्षित होते हैं। रिसर्च और उच्च शिक्षा संस्थानों को इस लिमिट से छूट दी जाती है। H-1B Visa