अमेरिका में दवा भेजने वाली इन 5 भारतीय कंपनियों पर बड़ा संकट
भारत
चेतना मंच
02 Dec 2025 02:47 AM
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दुनिया के सामने अपनी ‘टैरिफ वॉर’ नीति को स्पष्ट कर दिया है। इस बार उनका निशाना फार्मास्युटिकल सेक्टर है। ट्रंप ने ऐलान किया है कि 1 अक्टूबर 2025 से अमेरिका में बनने वाली दवाओं को छोड़कर बाकी सभी ब्रांडेड और पेटेंटेड दवाओं पर 100% टैरिफ लगाया जाएगा। इससे भारत की फार्मा इंडस्ट्री खासकर वे कंपनियां जो अमेरिका को दवाएं सप्लाई करती हैं गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती हैं। Trump Pharma Tariff 2025
अमेरिका पर टिकी हैं भारत की ये 5 फार्मा कंपनियां
भारत की फार्मा इंडस्ट्री दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इंडस्ट्री है (वॉल्यूम के हिसाब से) और अमेरिका इस इंडस्ट्री का सबसे बड़ा बाजार है। भारत का कुल फार्मा निर्यात 30 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जिसमें से अकेले अमेरिका को 8.7 अरब डॉलर की दवाएं भेजी जाती हैं। भारत की जिन कंपनियों को ट्रंप के टैरिफ से सबसे बड़ा झटका लग सकता है उनमें डॉ. रेड्डीज लैब्स, सन फार्मा, जाइडस लाइफसाइंसेज, ग्लैंड फार्मा और औरोबिंदो फार्मा शामिल हैं। इन कंपनियों की 30% से 50% तक की कमाई अमेरिका के बाजार से होती है जो अब खतरे में पड़ सकती है।
ट्रंप का साफ अल्टीमेटम
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर यह घोषणा की कि 1 अक्टूबर 2025 से सभी ब्रांडेड या पेटेंटेड दवाओं पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा, अगर उनकी मैन्युफैक्चरिंग अमेरिका में नहीं हो रही या निर्माण की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। इसका मतलब है कि भारत की जिन कंपनियों के अमेरिका में प्रोडक्शन प्लांट्स नहीं हैं, उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। हालांकि, जो कंपनियां पहले से अमेरिका में निवेश कर रही हैं वे इस नियम से बाहर रहेंगी।
दवा निर्यात में भारत की स्थिति
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का फार्मा निर्यात 30 अरब डॉलर तक पहुंचा। केवल अगस्त 2025 में ही 2.51 अरब डॉलर की दवाएं एक्सपोर्ट की गईं जो पिछले साल की तुलना में 6.94% अधिक है। अमेरिका इस निर्यात का सबसे बड़ा भागीदार है इसलिए टैरिफ का असर सीधे भारत की एक्सपोर्ट ग्रोथ पर पड़ेगा।
सरकार की तैयारी और योजनाएं
भारत सरकार ने फार्मा इंडस्ट्री को मजबूती देने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। PLI स्कीम के तहत सरकार ने 15,000 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है जिससे कैंसर और डायबिटीज जैसी बीमारियों की दवाएं बनाने वाले 55 प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है। वहीं SPI स्कीम के तहत 500 करोड़ रुपये का फंड छोटे और मझोले उद्यमों को प्रतिस्पर्धी बनाने और लैब्स को आधुनिक करने के लिए दिया जा रहा है। हालांकि, इन योजनाओं के असर दिखने में समय लगेगा।
फार्मा सेक्टर के अलावा ट्रंप ने घरेलू उत्पादों पर भी टैरिफ बढ़ाने की घोषणा की है। किचन कैबिनेट्स और बाथरूम वैनिटी पर 50% टैरिफ, असबाबदार फर्नीचर पर 30% टैरिफ। इन फैसलों से साफ है कि ट्रंप अपने चुनावी एजेंडे के तहत घरेलू निर्माण को बढ़ावा देने के लिए आक्रामक टैरिफ पॉलिसी अपना रहे हैं जिसका असर भारत जैसे साझेदार देशों पर पड़ना तय है। Trump Pharma Tariff 2025