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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 19 अप्रैल को ऐलान किया कि उनके प्रतिनिधि ईरान से बातचीत के लिए इस्लामाबाद जाएंगे। उनकी घोषणा ने दुनिया को चौंकाया क्योंकि ईरान अमेरिका के साथ दूसरे राउंड की बातचीत से इनकार कर रहा है। आखिर ट्रंप के बयान के बाद भी ईरान ने अपना रुख साफ क्यों नहीं किया है।

International News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 19 अप्रैल को ऐलान किया कि उनके प्रतिनिधि ईरान से बातचीत के लिए इस्लामाबाद जाएंगे। उनकी घोषणा ने दुनिया को चौंकाया क्योंकि ईरान अमेरिका के साथ दूसरे राउंड की बातचीत से इनकार कर रहा है। आखिर ट्रंप के बयान के बाद भी ईरान ने अपना रुख साफ क्यों नहीं किया है।
ईरान की उम्मीद टूटी
17 अप्रैल को ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने का ऐलान किया था। ईरान ने यह कदम इजरायल-लेबनान संघर्ष विराम के बाद उठाया था। इस्लामिक रिपब्लिक को उम्मीद थी इस फैसले के बाद ट्रंप ईरानी बंदरगाहों पर जारी अमेरिकी नाकाबंदी को हटा देंगे लेकिन ऐसा हुआ नहीं। कुछ ही मिनटों बाद, यूएस प्रसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ईरान को धन्यवाद कहा लेकिन साथ ही जोड़ दिया कि ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी तब तक जारी रहेगी, जब तक तेहरान-वाशिंगटन डील 100% पूरी नहीं हो जाती है। ट्रंप के सुर इसके बाद भी नहीं बदले और लगातार धमकी भरी सोशल मीडिया पोस्ट्स उनकी तरफ से आती रही।
'जेनेवा धोखे' का साया
इसने ईरानी अविश्वास को और बढ़ा दिया। उसे लगने लगा कि कहीं जेनेवा का धोखा फिर से न हो जाए। फरवरी 2026 में स्विट्जरलैंड के जेनेवा में हुई अमेरिका-ईरान परमाणु वार्ता में प्रगति दिख रही थी। कुछ सकारात्मक निकलने की उम्मीद थी लेकिन ठीक इसके बाद अमेरिका-इजरायल ने ईरान पर हमले शुरू कर दिए और घमासान युद्ध शुरू हो गया।
ईरान इसे कूटनीतिक छलावे के तौर पर देखता है। वह नहीं चाहता कि इस्लामाबाद में उसके साथ यही दोहराया जाए। तेहरान कोई गलती नहीं करना चाहता इसलिए 24 घंटे के अंदर ही उसने स्ट्रेट को फिर बंद कर दिया।
अब अमेरिका ने नौसैनिक नाकेबंदी के तहत खाड़ी में ईरानी झंडे वाले एक कार्गो जहाज़ को अपने कब्जे में लेने का दावा किया है। ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफ़ॉर्म पर ईरानी जहाज का नाम 'टोस्का' बताया। उनका कहना है कि जहाज को चेतावनी दी गई लेकिन वह नहीं रुका।
अमेरिका का कदम ईरान को और अलर्ट कर देगा। इस्लामाबाद जाने से पहले ईरान कोई बड़ा आश्वासन अमेरिका की तरफ से चाहेगा। फिलहाल हालात तेजी से बदल रहे हैं देखना है कि प्रेशर डिप्लोमेसी में ईरान ज्यादा फायदे में रहता है या अमेरिका।
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