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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक विवादित पत्र शेयर किया गया। पत्र में भारत और चीन को 'नर्क का गड्डे' कहा गया था।

International News: ईरान ने गुरुवार को यूएस प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप को भारत और चीन के समर्थन में खरी-खरी सुना दी। यह तब हुआ जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक विवादित पत्र शेयर किया गया। पत्र में भारत और चीन को 'नर्क का गड्डे' कहा गया था।
हैदराबाद में ईरानी दूतावास ने एक्स पर लिखा, "चीन और भारत सभ्यता के पालने हैं। असल में, 'नरक का गड्ढा' तो वह जगह है, जहां का युद्ध-अपराधी राष्ट्रपति ईरानी सभ्यता को तबाह करने की धमकी देता है।"
भारत और चीन दुनिया की दो सबसे पुरानी सभ्यताएं हैं, जिनकी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक जड़ें हजारों साल से भी ज़्यादा पुरानी हैं। वहीं अमेरिका की स्थापना 1776 में हुई थी और 4 जुलाई को यह अपने अस्तित्व के 250वें वर्ष के करीब पहुंच रहा है।
क्या है पूरा मामला?
ट्रंप ने रूढ़िवादी लेखक और रेडियो होस्ट माइकल सैवेज का जन्मसिद्ध नागरिकता के बारे में एक विवादित टेक्स्ट सोशल मीडिया पर शेयर किया। सैवेज ने दावा किया कि मौजूदा कानून, प्रवासियों को अपनी गर्भावस्था के "नौवें महीने" में अमेरिका पहुंचकर स्थानीय कानूनों का फायदा उठाने की अनुमति देता है।
माइकल सैवेज का जो बयान ट्रंप ने शेयर किया है, उसमें लिखा है, "यहां एक बच्चा तुरंत नागरिक बन जाता है और फिर वे पूरे परिवार को चीन या भारत या दुनिया की किसी और नरक से ले आते हैं. यह देखने के लिए आपको ज़्यादा दूर जाने की ज़रूरत नहीं है. यहां अब इंग्लिश नहीं बोली जाती।"
अमेरिका में जन्म के आधार पर मिलने वाली नागरिकता इन दिनों बहस का एक मुद्दा है। इसी महीने की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के जन्मजात नागरिकता को सीमित करने वाले कार्यकारी आदेश पर संदेह जताया था। ट्रंप प्रशासन अवैध इमिग्रेशन पर अंकुश लगाने के लिए बर्थराइट सिटिजनशिप को सीमित करना जरुरी बताता रहा है। लेकिन विरोधियों का कहना है कि इससे एक सदी से अधिक पुरानी परंपरा उलट जाएगी।
ट्रंप के बयान की कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने तीखी आलोचाना की है।
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