अमेरिका का सख्त रुख : क्वाड शिखर सम्मेलन में भारत नहीं आएंगे ट्रंप, रिश्तों में बढ़ी खटास
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 11:56 PM
ट्रंप द्वारा भारत सहित दुनियाभर के देशों पर लगाए गए भारी टैरिफ के कारण भारत-अमेरिका संबंधों में हाल के महीनों में तनाव साफ झलकने लगा है। द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस साल के अंत में प्रस्तावित क्वाड शिखर सम्मेलन के लिए भारत दौरे की योजना रद कर दी है।
अखबार का कहना है कि जी-7 शिखर सम्मेलन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हुई फोन कॉल ने दोनों नेताओं के रिश्तों में ठंडापन ला दिया। इस बातचीत के दौरान ट्रंप ने न केवल भारत-पाकिस्तान संघर्ष विराम का श्रेय खुद को दिया, बल्कि यह भी दावा किया कि पाकिस्तान उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित कर सकता है। बताया जाता है कि अप्रत्यक्ष रूप से उन्होंने भारत से भी ऐसा ही समर्थन चाहा, जिसे मोदी ने ठुकरा दिया। Trump Tariff :
नोबेल विवाद और बिगड़ते समीकरण
रिपोर्ट में कहा गया है कि जून में हुई उस 35 मिनट की कॉल के बाद से दोनों नेताओं के बीच दूरी बढ़ी है। भारत लगातार यह स्पष्ट करता रहा कि मई में हुआ संघर्ष विराम केवल भारत-पाकिस्तान के बीच सीधी बातचीत का परिणाम था, अमेरिका की इसमें कोई भूमिका नहीं रही। वहीं, ट्रंप इस दावे को सार्वजनिक मंचों पर बार-बार दोहराते रहे।
टैरिफ वॉर ने बढ़ाया तनाव
तनाव केवल कूटनीतिक दावों तक सीमित नहीं रहा। रिपोर्ट बताती है कि ट्रंप प्रशासन ने भारत पर रूसी तेल खरीदने को लेकर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क लगाया। जानकारों का मानना है कि यह कदम सिर्फ रूस के मुद्दे पर नहीं, बल्कि भारत को दबाव में लेने की रणनीति का हिस्सा था। भारत ने इसके बाद वैकल्पिक बाजारों की तलाश शुरू कर दी। इधर, न्यूयॉर्क टाइम्स का दावा है कि टैरिफ वार्ता में ठहराव के चलते ट्रंप ने कई बार मोदी से संपर्क साधने की कोशिश की, लेकिन प्रधानमंत्री ने उनके अनुरोधों का जवाब नहीं दिया। इससे दोनों देशों के बीच आर्थिक मोर्चे पर भी खींचतान और गहरी होती गई।
वॉशिंगटन और नई दिल्ली के बीच रिश्ते फिलहाल सहज नहीं
हालांकि इस रिपोर्ट पर न तो व्हाइट हाउस और न ही भारत सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आई है, लेकिन इतना साफ है कि वॉशिंगटन और नई दिल्ली के बीच रिश्ते फिलहाल सहज नहीं हैं। क्वाड शिखर सम्मेलन में ट्रंप की गैर-मौजूदगी इस कूटनीतिक खटास की बड़ी निशानी मानी जा रही है। अमेरिका की नाराजगी उसके दादागिरी वाले रवैये का प्रतिरोध करने को लेकर है, वहीं भारत अपनी साख को लेकर पूरी तरह अडिग है।