मिडिल ईस्ट में घूमने की 7 सबसे बेहतरीन जगहें, जानिए क्यों हैं ये खास

एशिया-यूरोप-अफ्रीका के संगम पर फैला यह भू-भाग धार्मिक विरासत,अल्ट्रा-मॉडर्न शहरों, रेगिस्तान के एडवेंचर और लक्जरी टूरिज्म का ऐसा मिश्रण पेश करता है, जो हर तरह के यात्री को अपनी तरफ खींच लेता है।

मिडिल ईस्ट की  सबसे अच्छी जगहें
मिडिल ईस्ट की सबसे अच्छी जगहें
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar13 Jan 2026 11:50 AM
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Middle East Best Tourist Destinations : मध्य पूर्व को लंबे समय तक दुनिया ने तेल, कूटनीति और तनाव की हेडलाइन्स के चश्मे से देखा, लेकिन अब यही इलाका अपनी नई पहचान गढ़ चुका है। आज यह क्षेत्र उन चुनिंदा डेस्टिनेशन्स में शामिल है, जहाँ एक ही ट्रिप में प्राचीन सभ्यताओं की कहानी भी मिलती है और भविष्य की चमकती स्काईलाइन भी। एशिया-यूरोप-अफ्रीका के संगम पर फैला यह भू-भाग धार्मिक विरासत,अल्ट्रा-मॉडर्न शहरों, रेगिस्तान के एडवेंचर और लक्जरी टूरिज्म का ऐसा मिश्रण पेश करता है, जो हर तरह के यात्री को अपनी तरफ खींच लेता है। 

1) दुबई (UAE)

मिडिल ईस्ट के टूरिज्म मैप पर दुबई वह शहर है जो पहली नजर में ही ध्यान खींच लेता है। कभी एक साधारण-सा व्यापारिक बंदरगाह रहा यह शहर आज ग्लोबल लाइफस्टाइल, हाई-एंड शॉपिंग और आइकॉनिक आर्किटेक्चर का बड़ा प्रतीक बन चुका है। बुर्ज खलीफा इसकी पहचान है, जबकि दुबई मॉल, पाम जुमेराह, लग्ज़री रिसॉर्ट्स और रेगिस्तान की डेजर्ट सफारी इसे हर तरह के पर्यटकों के लिए परफेक्ट बनाते हैं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि दुबई ने आधुनिकता की रफ्तार के साथ अपनी पारंपरिक अरब विरासत को भी संभाले रखा है और यही इसे बाकी शहरों से अलग बनाता है।

2) अबू धाबी (UAE)

यूएई की राजधानी अबू धाबी, दुबई की चमक-दमक से अलग एक सधी हुई, शांत और सांस्कृतिक पहचान के साथ सामने आती है। यहाँ की शेख जायेद ग्रैंड मस्जिद अपनी भव्यता, महीन कारीगरी और शानदार इस्लामिक वास्तुकला के कारण दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित करती है। वहीं लूव्र अबू धाबी जैसे अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय कला और इतिहास प्रेमियों के लिए शहर को खास बना देते हैं। अगर आप भीड़-भाड़ से दूर, क्लास और कंफर्ट के साथ “सुकून भरी लक्ज़री” का अनुभव चाहते हैं, तो अबू धाबी आपके लिए बेहतरीन ठिकाना है।

3) मक्का और मदीना (सऊदी अरब)

मिडिल ईस्ट का टूरिज्म धार्मिक विरासत के बिना अधूरा माना जाता है, और मक्का–मदीना इसकी सबसे मजबूत धुरी हैं। इस्लाम के सबसे पवित्र शहरों में शामिल ये दोनों स्थल हर साल हज और उमरा के लिए दुनिया भर से करोड़ों श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींचते हैं। बीते वर्षों में सऊदी अरब ने यात्रियों की सुविधा को केंद्र में रखकर व्यवस्थाओं और आधारभूत ढांचे में उल्लेखनीय सुधार किए हैं, जिससे यात्रा पहले से अधिक सुव्यवस्थित, सहज और सुरक्षित हुई है। यहाँ की फिजा  अनुशासन, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर रहती है

4) अल-उला (सऊदी अरब)

अल-उला अब सऊदी अरब का वह नाम बनता जा रहा है, जो तेजी से दुनिया के टॉप टूरिस्ट डेस्टिनेशन्स की सूची में जगह बना रहा है। यहाँ मौजूद हिज्र (मदाइन सालेह) प्राचीन नबातियन सभ्यता की विरासत का सबसे प्रभावशाली प्रमाण है, जहाँ इतिहास पत्थरों पर लिखा दिखाई देता है। विशाल चट्टानें, हवा और समय से बनी प्राकृतिक आकृतियाँ और सदियों पुराने मकबरे,इस पूरे लैंडस्केप को देखकर लगता है मानो आप आधुनिक दुनिया से निकलकर अतीत के गलियारों में पहुंच गए हों। इतिहास, फोटोग्राफी और अनोखे भू-दृश्यों के शौकीनों के लिए अल-उला सचमुच एक यादगार पड़ाव है।

5) यरूशलम (इजराइल)

यरूशलम दुनिया के सबसे ऐतिहासिक और संवेदनशील शहरों में शामिल है। यह यहूदी, ईसाई और इस्लाम तीनों के लिए गहरे धार्मिक महत्व वाला स्थल है। वेस्टर्न वॉल, चर्च ऑफ द होली सेपल्चर और अल-अक्सा परिसर जैसे स्थान यरूशलम को वैश्विक आध्यात्मिक और ऐतिहासिक केंद्र बनाते हैं। इस शहर की गलियों में चलते हुए हर मोड़ पर इतिहास की परतें खुलती हैं—यह एक जगह नहीं, एक अनुभव है।

6) पेट्रा (जॉर्डन)

जॉर्डन का पेट्रा, जिसे ‘रोज़ सिटी’ कहा जाता है, मध्य पूर्व के सबसे शानदार प्राचीन स्थलों में गिना जाता है। चट्टानों को काटकर बनाए गए प्रवेश द्वार, संरचनाएँ और रास्ते स्थापत्य-कला की अद्भुत मिसाल हैं। संकरी घाटियों से गुजरते हुए पेट्रा तक पहुँचना अपने आप में रोमांच है और सामने दिखता दृश्य यात्रा की थकान को उत्साह में बदल देता है।

7) दोहा (कतर)

कतर की राजधानी दोहा तेजी से पर्यटन के नए केंद्र के रूप में उभर रही है। इस्लामिक आर्ट म्यूज़ियम, कटारा कल्चरल विलेज और मॉडर्न स्काईलाइन इसे एक अलग पहचान देते हैं। 2022 फीफा वर्ल्ड कप के बाद दोहा का इंफ्रास्ट्रक्चर, मेहमाननवाज़ी और वैश्विक आकर्षण और मजबूत हुआ है। जो यात्री कल्चर + मॉडर्निटीका बैलेंस चाहते हैं, उनके लिए दोहा शानदार विकल्प है। Middle East Best Tourist Destinations

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ईरान में विरोध प्रदर्शन : 5 बड़ी बातें जो जानना हैं जरूरी

ईरान को लेकर दुनिया भर की मीडिया में बहुत कुछ कहा जा रहा है। कई विश्लेषक दावा कर रहे हैं कि ईरान में इस्लामिक शासन के अब गिनती के दिन ही बचे हैं। लेकिन ईरान एक ऐसा देश है जिस पर कोई भी राय बनाने से पहले हमें बेहद सावधानी बरतने की जरुरत है।

IRAN NEWS
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locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar12 Jan 2026 03:35 PM
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IRAN NEWS: ईरान एक बार फिर उथल पुथल के दौर से गुजर रहा है। सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन 15 दिनों से जारी है। अर्थव्यवस्था के बुरे हालात से उपजा अंसतोष अब सत्ता परिवर्तन की दिशा में मुड़ता दिख रहा है। ईरान को लेकर दुनिया भर की मीडिया में बहुत कुछ कहा जा रहा है। कई विश्लेषक दावा कर रहे हैं कि ईरान में इस्लामिक शासन के अब गिनती के दिन ही बचे हैं। लेकिन ईरान एक ऐसा देश है जिस पर कोई भी राय बनाने से पहले हमें बेहद सावधानी बरतने की जरुरत है। हम उन पांच प्वाइंट पर चर्चा करेंगे जो ईरान को जानने-समझने के लिए जरुरी हैं:

1-ईरान पर सच कौन बोल रहा है?

ईरान में प्रेस और नागिरक अधिकारों पर कड़े प्रतिबंध लगे हैं। विरोध प्रदर्शन के चलते देश भर में इंटरनेट पर रोक लगा दी गई है। वैसे भी ईरान दुनियाभर में सबसे अधिक इंटरनेट सेंसरशिप वाला देश रहा है। ऐसे में ईरान की सही खबरें बाहर आना मुश्किल है। दूसरी तरफ है वेस्टर्न मीडिया जो मुख्य तौर पर ईरान का आलोचक रही है। उसकी जानकारी पर भरोसा करना बड़ी गलती हो सकती है। ईरान और अमेरिका की दुश्मनी जग जाहिर है। ईरान मिडिल ईस्ट में अमेरिका हितों के रास्ते में सबसे बड़ी रुकावट रहा है। ईरान की जनता सड़कों पर उतरी तो यूएस प्रेसिडेंट तुरंत एक्टिव हुए और प्रदर्शनकारियों के पक्ष में बयान देने लगे। दूसरी तरफ ईरानी सुप्रीम लीडर ने कहा कि प्रदर्शनकारी यूएस प्रेसिडेंट को खुश करने में लगे हैं।

इन दो विरोधी नजरियों के बीच ईरान की वास्तविकता को समझना एक चुनौती है। इसके लिए हमें लगातार फैक्ट्स को क्रॉस चेक करना होगा और घटनाक्रम का निष्पक्ष आकलन करना पड़ेगा?

2-क्या ईरान में हो सकता है सत्ता परिवर्तन?

यह पहली बार नहीं है जब ईरान में बड़े विरोध प्रदर्शन हुए हैं। पिछले 2 दशकों में देश में कई बार विरोध की लहरे उठीं लेकिन ईरानी सरकार इनसे पार पाने में सफल रही है। इससे पहले सबसे बड़े विरोध प्रदर्शन 2009 में देखे गए थे जिसे ग्रीन मूवमेंट का नाम दिया गया। राष्ट्रपति चुनाव में धांधली के आरोप इस आंदोलन की वजह बने थे। हालांकि तेहरान इन पर काबू पाने में कामयाब रहा। 2022 का साल भी ईरान में उथल पुथल का साल बन कर आया जब महसा अमिनी की हिरासत में मौत के बाद विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। लेकिन काफी मशक्कत के बाद सरकार विरोध की आवाज दबाने में सफल रही। फिलहाल कहना मुश्किल है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन हो सकता है या नहीं क्योंकि सरकार ऐसे प्रोटेस्ट को नियंत्रित करने का अनुभव रखती है। एतिहासिक रिकॉर्ड भी यही कहता है।

3-क्या अमेरिका कर सकता है सैन्य कार्रवाई ?

ट्रंप प्रशासन ने 3 जनवरी को वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। चीन और रूस की तरफ से सिर्फ औपचारिक विरोध दर्ज किया गया लेकिन कोई गंभीर चुनौती पेश नहीं की गई। ईरान का सहयोगी रूस यूक्रेन युद्ध में उलझा है इसलिए वह ईरान की मदद करने की स्थिति में नहीं है। चीन की नीति किसी भी देश में सीधे हस्तक्षेप की नहीं रही है ऐसे में बीजिंग ईरान में कोई बड़ी भूमिका निभाएगा इसकी संभावनाएं बेहद कम है। यूएस प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के बयानों से साफ है कि वह ईरान को लेकर कड़ा फैसला कर सकते हैं। पिछले साल ही उन्होंने इजरायल के साथ मिलकर ईरान के परमाणु ठिकानों पर बमबारी की थी। अमेरिका की तरफ से फिर से सैन्य कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।

4-ईरान की जनता राजशाही चाहती है या लोकतंत्र

ये सबसे बड़ा सवाल है जो इन विरोध प्रदर्शनों से खड़ा हुआ है। दरअसल प्रदर्शनों की शुरुआत से ही ऐसे वीडियो जमकर इंटरनेट पर वायरल हुए जिनमें लोग ईरान के अंतिम शाह मोहम्मद रेजा पहलवी के समर्थन में नारेबाजी करते दिखे। ईरान में नागरिक और महिला अधिकारों पर पाबंदियां लगी है लेकिन जनता याद कर रही है शाह पहलवी को जिनके दमनकारी शासन ने 1979 की इस्लामिक क्रांति को जन्म दिया था। वहीं शाह के निर्वासित बेटे लगातार लोगों से विरोध में शामिल होने और सिटी सेंटर्स पर कब्जे का आह्वान कर रहे हैं। वह जल्द ही देश लौटने की घोषणा भी कर रहे हैं। उन्होंने ट्रंप से भी प्रदर्शनाकारियों की मदद करने की अपील की थी। कोई भी पूर्व पीएम मोहम्मद मोसद्दक का नाम नहीं ले रहा है। जिन्होंने तेल उद्योग का राष्ट्रीयकरण किया था जिससे नाराज होकर यूएस और यूके ने मिलकर एक साजिश के तहत उन्हें 1953 में सत्ता से हटा दिया था।

 5- ईरान के साथ जुड़ा है दुनिया का भविष्य

ईरान तेल, गैस और खनिज संसाधनों के मामले में दुनिया के सबसे अमीर देशों में से एक है। यह तेल रिजर्व के मामले में तीसरे, गैस रिजर्व के बारे में दूसरे नंबर पर है। ईरान में खनन (माइनिंग) अभी भी विकास के चरण में है, फिर भी यह देश दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण खनिज उत्पादकों में से एक है। यह दुनिया के टॉप-15 मेजर मिनिरल रिच देशों में शामिल है, जहां 68 प्रकार के खनिज पाए जाते हैं। अगर ईरान में इस्लामिक शासन का अंत होता तो और तेल और अन्य संसाधनों पर अमेरिका समर्थित सरकार का कब्जा होगा ऐसे में दुनिया भर में तेल और गैस की सप्लाई और कीमतों को तय करने अमेरिका अहम भूमिका निभाएगा। वो पहले ही सबसे बड़े तेल रिजर्व वाले वेनेजुएला पर कब्जा कर चुका है। अगर ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में लिया कड़ा एक्शन तो दुनिया में एक बड़ा तेल संकट खड़ा हो सकता है। ईरान को दुनिया के इस महत्वपूर्ण तेल रूट में एक अहम रणनीतिक बढ़त हासिल है। वह इसे ब्लॉक कर सकता है। यहां से दुनिया का 20 से 30 फीसदी तेल गुजरता है। अगर हालात काबू से बाहर होते देख ईरानी सरकार यह कदम उठा सकती है। IRAN NEWS

 

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पीएसएलवी राकेट के तीसरे चरण में आई खराबी, अन्वेषा उपग्रह का क्या हुआ

लॉन्च के बाद मीडिया से बात करते हुए डॉ. नारायणन ने कहा कि रॉकेट के तीसरे चरण के अंत में तकनीकी गड़बड़ी का सामना करना पड़ा, जिससे मिशन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई।

pslv 1
1पीएसएलवी-सी62
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar12 Jan 2026 01:42 PM
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PSLV Launch : सोमवार को सुबह हुए पीएसएलवी-सी62 मिशन के तीसरे चरण में तकनीकी खामी आ गई, जिसके कारण मिशन को आगे नहीं बढ़ाया जा सका। इसरो के चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन ने इस तकनीकी समस्या की पुष्टि करते हुए बताया कि इसकी जांच प्रारंभ कर दी गई है। इस मिशन का उद्देश्य ईओएस-एन1 नामक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह और साथ में भेजे गए 15 छोटे उपग्रहों को सूर्य समकालिक कक्षा में स्थापित करना था। यह प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सुबह 10:17 बजे किया गया था।

रॉकेट के तीसरे चरण के अंत में तकनीकी गड़बड़ी आई

लॉन्च के बाद मीडिया से बात करते हुए डॉ. नारायणन ने कहा कि रॉकेट के तीसरे चरण के अंत में तकनीकी गड़बड़ी का सामना करना पड़ा, जिससे मिशन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई। उन्होंने बताया कि पहले तीन चरणों में रॉकेट का प्रदर्शन सामान्य था, लेकिन चौथे चरण के दौरान एक हल्का बदलाव देखा गया, जिससे रॉकेट का मार्ग बदल गया। इस समय वैज्ञानिक टीम ग्राउंड स्टेशन से प्राप्त आंकड़ों का अध्ययन कर रही है, ताकि समस्या का कारण स्पष्ट किया जा सके।

पिछले साल भी पीएसएलवी मिशन में आई थी समस्या

पीएसएलवी रॉकेट में चार चरण होते हैं। पहला ठोस ईंधन से, दूसरा तरल ईंधन से, तीसरा फिर ठोस ईंधन से और चौथा तरल ईंधन से। तीसरे चरण तक रॉकेट ने अपेक्षित प्रदर्शन किया था, लेकिन उसके बाद कुछ समस्या उत्पन्न हो गई। इसरो के प्रमुख ने यह भी कहा कि पिछले साल मई में हुए पीएसएलवी-सी61 मिशन में भी तीसरे चरण में तकनीकी समस्या आई थी, जिससे वह मिशन भी पूरी तरह सफल नहीं हो सका था।

कई उपग्रह भी दुर्घटना के हुए शिकार

ईओएस-एन1 उपग्रह, जिसे अन्वेषा भी कहा जा रहा है, का उद्देश्य भारत की कृषि, शहरी योजना और पर्यावरण निगरानी क्षमता को बढ़ाना था। साथ ही, मिशन के तहत स्पेन की एक स्टार्टअप द्वारा विकसित केआईडी नामक एक छोटे पुन:प्रवेश यान का प्रदर्शन भी किया जाना था। यह मिशन इसरो की वाणिज्यिक शाखा न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड का नौवां वाणिज्यिक मिशन था। हालांकि पीएसएलवी रॉकेट का यह मिशन सफल नहीं हो सका, लेकिन इसरो का पीएसएलवी कार्यक्रम अब तक 63 सफल उड़ानें पूरी कर चुका है। इसके प्रमुख मिशनों में चंद्रयान-1, मंगल कक्षा मिशन, आदित्य-एल1 और एस्ट्रोसैट जैसे ऐतिहासिक अभियान शामिल हैं। 2017 में पीएसएलवी ने एक ही मिशन में 104 उपग्रहों को लॉन्च कर विश्व रिकॉर्ड भी स्थापित किया था। इसरो की टीम ने जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है, और पूरी उम्मीद है कि वे इस समस्या का समाधान जल्द निकालेंगे और भविष्य में इस तरह की गड़बड़ी से बचने के उपाय अपनाएंगे। अब यह देखना होगा कि यह गड़बड़ी भविष्य में भारतीय अंतरिक्ष मिशनों पर क्या असर डालती है। क्या आपको लगता है कि इसरो जल्द ही इस समस्या का समाधान निकाल पाएगा?

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