ट्रंप के दबाव में भारत ने रूस से तेल कम किया या बंद किया? जानिए असली स्थिति और नुकसान
भारत
चेतना मंच
26 Aug 2025 01:12 PM
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर लगाए जा रहे दबाव ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भारत ने ट्रंप के डर से रूस से तेल लेना बंद कर दिया या कम किया? और इस टैरिफ धमाके से भारत को कितना नुकसान हो सकता है? भारत पर अमेरिका द्वारा कुल 50 प्रतिशत टैरिफ आज से लागू कर दिया गया है लेकिन भारत ने अभी तेल खरीद पर क्या रुख अपनाया यह स्पष्ट नहीं किया है। Trump Tariffs :
क्या भारत ने रूस से तेल लेना बंद किया?
हाल के महीनों में यानी जुलाई और अगस्त में भारत के बंदरगाहों पर रूसी तेल की डिलीवरी में कमी देखी गई। लेकिन उद्योग के जानकारों का कहना है कि यह कमी ट्रंप के दबाव की वजह से नहीं, बल्कि रूस पर मिलने वाली छूट (डिस्काउंट) कम होने की वजह से है। इन खेपों को ट्रंप के बयानों और टैरिफ की घोषणा से पहले ही बुक किया जा चुका था। कुछ टैंकर अभी भी अपनी अंतिम मंजिल तय नहीं कर पाए हैं और भारत उनके लिए संभावित गंतव्य बना हुआ है। अगस्त में रूसी तेल की लोडिंग करीब 1 मिलियन बैरल प्रति दिन रही, जो जुलाई से थोड़ी कम है।
ट्रंप के टैरिफ का असर
अमेरिका ने भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। अगस्त में भारतीय सामानों पर 25% अतिरिक्त टैरिफ की घोषणा की गई, जो पहले से लागू 25% टैरिफ के ऊपर है। भारत ने इसे अनुचित और अव्यवहारिक बताया। भारतीय सरकारी रिफाइनरियों का कहना है कि उन्हें रूस से तेल आयात पर कोई सरकारी निर्देश नहीं मिला है। उनकी खरीदारी पूरी तरह से आर्थिक और व्यावसायिक आधार पर हो रही है। भारत सरकार का रुख भी स्पष्ट है कि तेल वहाँ से खरीदा जाएगा जहां सबसे अच्छा सौदा हो, बशर्ते यह तेल प्रतिबंधों के दायरे में न हो। रूसी तेल पर कोई प्रत्यक्ष प्रतिबंध नहीं है, केवल पश्चिमी शिपिंग और बीमा सेवाओं का उपयोग होने पर प्राइस कैप (60 डॉलर प्रति बैरल) लागू होता है। इसलिए भारतीय कंपनियां अपनी रणनीति में कोई बड़ा बदलाव नहीं कर रही हैं।
रूस-भारत-यूएस त्रिकोण
ट्रंप प्रशासन के लिए भारत का रूस से तेल आयात एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है। यह दबाव रूस-यूक्रेन युद्ध को जल्द खत्म करने की अमेरिकी रणनीति का हिस्सा है। वहीं भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देता है। विश्लेषकों का कहना है कि भारत ट्रंप के दबाव में नहीं झुकेगा। भारत की कूटनीति संतुलित है, जो अमेरिका और रूस दोनों के साथ रिश्ते बनाए रखती है। रूस ने भी भारत का समर्थन करते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी देश को अपने व्यापारिक साझेदार चुनने की स्वतंत्रता है। Trump Tariffs
आर्थिक और रणनीतिक असर
टैरिफ और राजनीतिक दबाव से भारत के कुछ निर्यात और उद्योग सेक्टरों को नुकसान हो सकता है, लेकिन अर्थव्यवस्था पर इसका बड़ा असर होने की संभावना नहीं है। भारत की रणनीति है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करे और लागत-कुशल स्रोतों से तेल आयात जारी रखे। भारत ने रूस से तेल खरीद पूरी तरह बंद नहीं की है। हाल में आयात में कमी देखी गई तो वह छूट कम होने और वैश्विक मार्केट की परिस्थितियों का परिणाम है। ट्रंप का दबाव राजनीतिक है, लेकिन भारत की नीति स्वतंत्र और व्यावसायिक निर्णय लेने वाली बनी हुई है। Trump Tariffs