
अमेरिका की कथनी और करनी में कितना फर्क है, इसका चौंकाने वाला खुलासा हाल ही में सामने आया है। एक ओर अमेरिकी सरकार दुनिया के सामने चीन को राष्ट्रीय सुरक्षा, साइबर जासूसी और मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामलों में कठघरे में खड़ा करती है, वहीं दूसरी ओर वही सरकार सालों से अपनी टेक कंपनियों को चीन के साथ ‘संवेदनशील तकनीक’ साझा करने में न केवल अनुमति देती रही है, बल्कि कई बार इसमें मददगार भी बनी है। US China Tech War
एपी की पड़ताल के मुताबिक, बीते तीन दशकों में पांच अमेरिकी प्रशासन रिपब्लिकन हों या डेमोक्रेट सभी ने किसी न किसी रूप में चीन को अमेरिकी तकनीक तक पहुंचने का रास्ता खुला छोड़ा। नतीजा यह हुआ कि आज चीन वही तकनीक इस्तेमाल कर अपनी सेना और खुफिया तंत्र को मजबूत बना रहा है, जिसे अमेरिका अपने लिए खतरा बताता है। US China Tech War
अमेरिका ने भले ही चीन को सीधे उन्नत AI चिप्स बेचने पर प्रतिबंध लगाया हो, लेकिन 'क्लाउड सर्विस' का एक ऐसा लूपहोल खुला है, जिससे चीन इन चिप्स को ‘किराए’ पर लेकर अपने AI मॉडल ट्रेन कर रहा है। अमेज़न वेब सर्विसेज (AWS) और माइक्रोसॉफ्ट एज़्योर जैसी कंपनियां इस रास्ते से अरबों डॉलर का कारोबार कर रही हैं। पिछले एक साल में अमेरिकी सांसदों ने इस खामी को बंद करने के चार प्रयास किए, लेकिन हर बार टेक लॉबी की ताकतवर लॉबिंग ने सरकार को झुका दिया।
रिपोर्ट बताती है कि टेक और टेलीकॉम कंपनियों ने पिछले दो दशकों में चीन से जुड़ी नीतियों को प्रभावित करने के लिए लॉबिस्टों पर करोड़ों डॉलर खर्च किए हैं। उनका तर्क है अगर अमेरिका ने रोक लगाई, तो चीन अपनी तकनीक खुद बना लेगा, जो अमेरिका के लिए और ज़्यादा ख़तरनाक होगा। साथ ही यह भी दावा किया गया कि ऐसे कदमों से अमेरिकी नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं।
अब यह खेल सिर्फ लॉबिंग तक सीमित नहीं रहा। राष्ट्रपति ट्रम्प ने हाल ही में एनवीडिया (Nvidia) और AMD जैसी कंपनियों से ऐसे समझौते किए, जिनसे चीन को चिप्स निर्यात पर लगी पाबंदी में ढील दी गई। बदले में अमेरिकी सरकार को 15% राजस्व हिस्सा मिलने वाला है यानी राष्ट्रीय सुरक्षा पर व्यापारिक मुनाफा भारी पड़ गया। इंटेल (Intel) में अमेरिकी सरकार की 10% हिस्सेदारी ने तो इस गठजोड़ को और उजागर कर दिया है। अब अमेरिकी टैक्सपेयर का पैसा उन कंपनियों में लगा है जो चीन को तकनीक बेचकर मुनाफा कमा रही हैं। US China Tech War
सबसे चिंताजनक पहलू है मानवाधिकार उल्लंघन में अमेरिकी तकनीक की भूमिका। शिनजियांग में उइगर मुस्लिमों पर अत्याचार के दौरान वहां के निगरानी सिस्टम में अमेरिकी तकनीक के इस्तेमाल के ठोस सबूत मिले हैं। डिटेंशन कैंप से रिहा उइगर महिला गुलबहार हैतिवाजी ने बताया कि निगरानी कैमरे हर जगह लगे थे यहां तक कि टॉयलेट तक में। तियानमेन चौक आंदोलन के पूर्व नेता झोउ फेंगसुओ ने इसे “अमेरिका की रणनीतिक विफलता” बताया और कहा “यह सब मुनाफे के लिए किया गया। US China Tech War