कोरियन ड्रामा का असर : छात्रों में क्रेज, इंजीनियरिंग की छात्रा हुई शिकार

रोमांटिक कहानियां, भावनात्मक संवाद, परफेक्ट लुक्स और अलग जीवनशैली युवाओं को अपनी ओर खींचती है। हाल ही में गोरखपुर की एक इंजीनियरिंग छात्रा से जुड़ा मामला इसी बदलते ट्रेंड पर बहस की वजह बना है।

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कोरियन ड्रामा
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar07 Feb 2026 07:16 PM
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korean-Dramas : पिछले कुछ वर्षों में भारत के युवाओं, खासकर कॉलेज छात्रों के बीच कोरियन ड्रामा और के-पॉप का आकर्षण तेजी से बढ़ा है। रोमांटिक कहानियां, भावनात्मक संवाद, परफेक्ट लुक्स और अलग जीवनशैली युवाओं को अपनी ओर खींचती है। हाल ही में गोरखपुर की एक इंजीनियरिंग छात्रा से जुड़ा मामला इसी बदलते ट्रेंड पर बहस की वजह बना है।

जब मनोरंजन आदत बन जाए

बताया गया कि छात्रा रोजाना कई घंटे कोरियन ड्रामा और फिल्में देखने लगी थी। धीरे-धीरे उसकी बोलचाल में विदेशी शब्द आने लगे, पहनावे और मेकअप में भी बदलाव दिखने लगा। यह सब अपने आप में असामान्य नहीं है, क्योंकि युवा अवस्था में लोग नई पहचान तलाशते हैं और पसंदीदा किरदारों से प्रभावित होना स्वाभाविक है। समस्या तब सामने आई जब यह रुचि पढ़ाई और रोजमर्रा की जिम्मेदारियों पर भारी पड़ने लगी। परीक्षा में अंक गिरने लगे और परिवार को चिंता हुई, जिसके बाद काउंसलिंग की जरूरत महसूस की गई।

प्रभाव और लत के बीच की रेखा

किसी संस्कृति, भाषा या कला से प्रभावित होना गलत नहीं है। लेकिन जब कोई व्यक्ति दिन का बड़ा हिस्सा स्क्रीन के सामने बिताने लगे, नींद, पढ़ाई और सामाजिक जीवन प्रभावित होने लगे, तब यह एक चेतावनी बन जाती है। यही फर्क है रुचि और लत के बीच। कोरियन ड्रामा हो या आॅनलाइन गेम ये केवल माध्यम हैं। असल चुनौती है बढ़ता स्क्रीन टाइम, भावनात्मक अकेलापन और युवाओं के पास सीमित रचनात्मक विकल्प।

सिर्फ कंटेंट को दोष देना आसान है

अक्सर ऐसी घटनाओं में सारा दोष विदेशी कंटेंट या मोबाइल फोन पर डाल दिया जाता है। लेकिन यह एकतरफा सोच है। अगर संवाद, मार्गदर्शन और संतुलन मौजूद हो, तो वही कंटेंट सीखने और मनोरंजन का साधन भी बन सकता है। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि बच्चों और युवाओं को पूरी तरह रोकने के बजाय उनसे खुलकर बात करना ज्यादा प्रभावी होता है। समय तय करना, दिनचर्या बनाना और खेल, संगीत या किताबों जैसे विकल्प देना व्यवहार में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।

माता-पिता और संस्थानों की भूमिका

परिवार और शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे समय रहते बदलावों को समझें। चिड़चिड़ापन, अकेलापन या पढ़ाई में लगातार गिरावट जैसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। जरूरत पड़ने पर काउंसलर या विशेषज्ञ की मदद लेना कमजोरी नहीं, समझदारी है। कोरियन ड्रामा या किसी भी विदेशी संस्कृति से प्रभावित होना न तो अपराध है और न ही मानसिक समस्या। असली सवाल है संतुलन का। जब मनोरंजन जीवन को नियंत्रित करने लगे, तब हस्तक्षेप जरूरी हो जाता है। युवाओं को समझ, समर्थन और सही दिशा मिले तो क्रेज कभी पागलपन नहीं बनता।


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भारत-अमेरिका ट्रेड डील को क्यों कहा जा रहा ‘फादर ऑफ ऑल डील’? समझिए पूरा गणित

भारत और अमेरिका ने अंतरिम व्यापार समझौते पर सहमति जताई है जिसका उद्देश्य शुल्क कम करना आर्थिक सहयोग बढ़ाना और सप्लाई चेन को मजबूत बनाना है। इस डील के तहत भारत अमेरिकी औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर टैरिफ में कटौती करेगा जबकि अमेरिका भारतीय उत्पादों पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाएगा।

US India Trade Deal
भारत‑अमेरिका ट्रेड डील
locationभारत
userअसमीना
calendar07 Feb 2026 11:34 AM
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भारत और अमेरिका ने हाल ही में अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Deal Framework) पर सहमति जताई है जिसे विशेषज्ञ ‘फादर ऑफ ऑल डील’ कह रहे हैं। यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार को आसान बनाने, शुल्क कम करने और आर्थिक सहयोग बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसे अमेरिकी बाजार की चाबी भारत के हाथ में देने वाला भी माना जा रहा है। आइए विस्तार से जानते हैं इस डील के मुख्य बिंदु और इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था पर।

भारत की सहमति और टैरिफ में कटौती

इस समझौते के तहत भारत ने अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं और कृषि उत्पादों पर शुल्क कम करने या समाप्त करने पर सहमति दी है। इसमें, सूखे अनाज, लाल ज्वार, मेवे, फल, सोयाबीन तेल और शराब जैसे कृषि उत्पाद। व्यापार को आसान बनाने के लिए कुछ क्षेत्रों में तरजीही बाजार पहुंच (Preferential Market Access) प्रदान करना। इससे अमेरिकी कंपनियों के लिए भारतीय बाजार में प्रवेश आसान होगा और भारतीय उत्पादकों के लिए भी प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, शामिल है।

अमेरिका की सहमति और रेसिप्रोकल टैरिफ

अमेरिका ने भी कुछ महत्वपूर्ण सहमति दी है। अमेरिकी पक्ष ने कहा कि वस्त्र, जूते, प्लास्टिक, रबर, जैविक रसायन, हस्तशिल्प और कुछ मशीनरी पर 18% रेसिप्रोकल टैरिफ लागू होगा। लेकिन जब अंतरिम समझौता सफलतापूर्वक लागू होगा तो जेनेरिक दवाइयां, रत्न और विमान पुर्जे जैसे क्षेत्रों में रेसिप्रोकल टैरिफ हटा दिए जाएंगे।

इस्पात, एल्युमीनियम और ऑटो पार्ट्स में सुधार

इस डील के तहत भारत को अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा नियमों से जुड़े शुल्कों में राहत भी मिली है। भारतीय विमानों और स्टील, एल्युमीनियम व तांबे से जुड़े विमान पुर्जों पर धारा 232 के तहत लगे कुछ शुल्क हटा दिए जाएंगे। भारत को ऑटो पार्ट्स पर तरजीही शुल्क दर कोटा प्राप्त होगा। अमेरिकी दवाओं पर लगाए गए शुल्क की समीक्षा भी होगी।

नॉन-टैरिफ बाधाओं पर समाधान

इस समझौते में नॉन-टैरिफ बाधाओं (Non-Tariff Barriers) को भी खत्म करने पर जोर दिया गया है। इसमें अमेरिकी चिकित्सा उपकरण, सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) उत्पाद, खाद्य और कृषि उत्पाद शामिल है। इसके अलावा, छह महीने के भीतर प्रमुख क्षेत्रों में अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय स्टैंडर्ड अपनाने की योजना है जिससे व्यापार और अधिक सुचारु होगा।

डिजिटल ट्रेड और सप्लाई चेन सुरक्षा

डील में डिजिटल ट्रेड को बढ़ावा देने और बोझिल प्रथाओं को खत्म करने का प्रावधान भी है। इसके अलावा, सप्लाई चेन को मजबूत बनाने और आर्थिक सुरक्षा बढ़ाने के उपायों पर भी सहयोग होगा।

भारत के परचेज कमिटमेंट्स

भारत ने अगले पांच वर्षों में 500 अरब डॉलर मूल्य के अमेरिकी सामान खरीदने का कमिटमेंट किया है। इसमें शामिल हैं-

  • ऊर्जा उत्पाद
  • विमान और पुर्जे
  • कीमती धातुएं
  • प्रौद्योगिकी उत्पाद
  • कोकिंग कोयला

इस डील से भारत की टेक्नोलॉजी और औद्योगिक सेक्टर में भी विस्तार होने की उम्मीद है। अंतरिम फ्रेमवर्क को शीघ्र लागू किया जाएगा और दोनों देश पूर्ण द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement - BTA) की दिशा में बातचीत जारी रखेंगे। इसका उद्देश्य व्यापक बाजार पहुंच, निवेश, आर्थिक सहयोग और सप्लाई चेन की मजबूती सुनिश्चित करना है।

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एलॉन मस्क की दौलत जानकर चौंक जाएंगे आप, सरकार से भी ज्यादा कमाई

दुनिया के सबसे बड़े धनपति एलॉन मस्क की दौलत तो भारत सरकार की एक साल की आमदनी से भी अधिक है। आपको विस्तार के साथ बता देते हैं कि एलॉन मस्क के पास कुल कितनी दौैलत मौजूद है।

एलॉन मस्क
एलॉन मस्क
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar06 Feb 2026 05:36 PM
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Elon Musk : दुनिया के सबसे बड़े पूंजीपति का नाम एलॉन मस्क है। एलन मस्क दुनिया का सबसे अमीर व्यक्ति है। इतनी बात तो हर कोई जानता है किन्तु एलॉन मस्क के पास जितनी दौलत है उसे जानकर हर कोई चौंक जाता है। दुनिया के सबसे बड़े धनपति एलॉन मस्क की दौलत तो भारत सरकार की एक साल की आमदनी से भी अधिक है। आपको विस्तार के साथ बता देते हैं कि एलॉन मस्क के पास कुल कितनी दौैलत मौजूद है।

एलॉन मस्क से ज्यादा बड़ा पूंजीपति कोई नहीं

आपको बता दें कि एलॉन मस्क वह व्यक्ति है जिसके पास दुनिया की सबसे ज्यादा दौलत है। एलॉन मस्क से पहले भी दुनिया में बड़े-बड़े पूंजीपति हुए हैं। यह पहला मौका है कि एलॉन मस्क के बराबर दौलत आज तक किसी भी पूंजीपति के पास नहीं रही। एलॉन मस्क दुनिया का सबसे बड़ा पूंजीपति बनने के साथ ही साथ इतिहास का सबसे बड़ा पूंजीपति भी बन गया है। इन दिनों एलॉन मस्क के पास 850 बिलियन डॉलर की दौलत है। भारतीय मुद्रा में बात करें तो एलॉन मस्क के पास 77 लाख करोड़ रूपए की दौलत है। भारत सरकार की सालाना कमाई 35 लाख करोड़ रूपए की है। इस प्रकार भारत सरकार की सालाना कमाई से दोगुनी दौलत अकेले एक व्यक्ति एलॉन मस्क के पास मौजूद है। भारत में मौजूद 40 बड़े-बड़े पूंजीपतियों की दौलत को मिलाकर जो दौलत बनती है उतनी दौलत अकेले एलॉन मस्क के पास मौजूद है। एलॉन मस्क की दौलत पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश तथा नेपाल जैसे अनेक देशों की जीडीपी... से भी अधिक है।

एलॉन मस्क की दौलत के विषय में बोलते हुए आंकड़े

अलग-अलग सर्वे रिपोर्ट्स में एलॉन मस्क की दौलत तथा उसकी कंपनियों के आँकड़े बताए गए हैं। इन आँकड़ों में यह भी बताया गया है कि एलॉन मस्क की रॉकेट कंपनी स्पेसएक्स ने उनकी एआई कंपनी xAI को खरीद लिया है। पहले ये दोनों अलग-अलग थीं। अब ये एक ही बड़ी कंपनी बन गई हैं, जिसकी कुल कीमत $1.25 ट्रिलियन (करीब 104 लाख करोड़ रुपए) आंकी गई है। इस विलय से मस्क की वैल्यू $84 बिलियन बढ़ गई।मर्जर से पहले मस्क के पास स्पेसएक्स की 42% हिस्सेदारी थी, जिसकी वैल्यू $336 बिलियन थी। वहीं xAI में उनकी 49% हिस्सेदारी की कीमत $122 बिलियन थी। मर्जर के बाद बनी नई कंपनी में मस्क की हिस्सेदारी अब 43% हो गई है, जिसकी अकेले की वैल्यू $542 बिलियन है।

यह भी बताते हैं आँकड़े

अक्टूबर 2025: वे दुनिया के पहले $500 बिलियन वाले इंसान बने। यह तब हुआ जब उन्होंने टेस्ला पर फोकस करने के लिए ट्रंप के सरकारी विभाग (DOGE) को छोड़ा।· 

15 दिसंबर: स्पेसएक्स की वैल्यूएशन बढ़ने से वे $600 बिलियन के पार पहुंचे। 19 दिसंबर: कोर्ट से टेस्ला स्टॉक ऑप्शंस बहाल होने के बाद वे $700 बिलियन क्लब के इकलौते सदस्य बने। जनवरी 2026: स्पेसएक्स और xAI के मर्जर से कुल संपत्ति 850 बिलियन डॉलर पहुंच गई। मस्क और दुनिया के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति के बीच का फासला तीन गुण से ज्यादा बढ़ा है। गूगल के को-फाउंडर लैरी पेज $281 बिलियन की नेटवर्थ के साथ दूसरे नंबर पर हैं। मस्क उनसे $578 बिलियन ज्यादा अमीर हैं। जिस रफ्तार से उनकी दौलत बढ़ रही है, वे जल्द ही दुनिया के पहले 'ट्रिलियनेयर' (1000 अरब डॉलर के मालिक) बन सकते हैं। ·   

टेस्ला: टेस्ला की स्थापना 2003 में मार्टिन एबरहार्ड और मार्क टारपेनिंग ने की थी। इलॉन मस्क कंपनी के शुरुआती निवेशकों में से एक थे और फरवरी 2004 में उन्होंने टेस्ला में भारी निवेश किया। इसके बाद मस्क टेस्ला के चेयरमैन और फिर CEO बन गए। टेस्ला का मकसद इलेक्ट्रिक गाड़ियों को आम लोगों तक पहुंचाना और सस्टेनेबल एनर्जी को बढ़ावा देना था।

स्पेसएक्स: स्पेसएक्स की शुरुआत इलॉन मस्क ने मार्च 2002 में की थी। उनका सपना स्पेस लॉन्च की लागत घटाना और मंगल ग्रह पर इंसानी बस्ती बसाना था। स्पेसएक्स ने 2008 में पहला सफल रॉकेट (Falcon 1) लॉन्च किया और 2012 में इसका Dragon कैप्सूल इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से जुड़ा।

न्यूरालिंक: न्यूरालिंक की स्थापना इलॉन मस्क ने 2016 में की थी। इस कंपनी का मकसद इंसानी दिमाग और कंप्यूटर को जोड़ने वाली ब्रेन-मशीन इंटरफेस तकनीक विकसित करना है। न्यूरालिंक का उद्देश्य न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का इलाज करना और भविष्य में इंसानों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ बेहतर तरीके से जोड़ना है। Elon Musk

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