विज्ञापन
पश्चिम एशिया की राजनीति में एक बड़ा मोड़ आया है। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को खत्म करने के लिए एक एमओयू (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर होने का दावा किया गया है।

Washington/Tehran : पश्चिम एशिया की राजनीति में एक बड़ा मोड़ आया है। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को खत्म करने के लिए एक एमओयू (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर होने का दावा किया गया है। इस समझौते के बाद मिडिल ईस्ट में शांति की उम्मीदें तेज हो गई हैं और सबसे अहम कदम के तौर पर होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने की बात सामने आई है। हालांकि इस समझौते को लेकर आधिकारिक स्तर पर विस्तृत पुष्टि और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया अभी भी सामने आना बाकी है, लेकिन दोनों पक्षों की ओर से संकेतों ने वैश्विक कूटनीति में हलचल मचा दी है।
Washington/Tehran
सूत्रों के मुताबिक, यह समझौता डिजिटल माध्यम से साइन किया गया। बताया जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जी 7 समिट के बाद फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ डिनर के दौरान दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। ईरान के विदेश मंत्रालय की ओर से भी इस एमओयू की पुष्टि का दावा किया गया है, जिससे यह मामला और अधिक गंभीर राजनीतिक महत्व का बन गया है।
Washington/Tehran
समझौते का सबसे बड़ा हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ा है, जिसे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की लाइफलाइन माना जाता है।
ड्राफ्ट के अनुसार-
* लंबे समय से बंद स्ट्रेट को दोबारा खोलने की योजना
* समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की व्यवस्था
* अस्थायी रूप से 60 दिनों तक बिना शुल्क सुरक्षित आवागमन का प्रस्ताव।
इस कदम से वैश्विक तेल और ऊर्जा बाजार पर बड़ा असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
Washington/Tehran
समझौते में ईरान पर लगे तेल प्रतिबंधों में तुरंत राहत देने की बात कही गई है। इसके तहत
* ईरानी तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों में ढील
* फ्रीज की गई संपत्तियों को अनफ्रीज करने की प्रक्रिया
* ईरानी अर्थव्यवस्था को दोबारा सक्रिय करने के प्रयास।
इसके साथ ही परमाणु मुद्दों पर आगे बातचीत का रास्ता भी खुला रखा गया है।
Washington/Tehran
डील के मुताबिक ईरान ने यह दोहराया है कि वह परमाणु हथियार न तो बनाएगा और न ही हासिल करेगा। अमेरिकी पक्ष का दावा है कि ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम भंडार को नष्ट करने पर भी सहमत हुआ है, जिसे वॉशिंगटन अपनी बड़ी कूटनीतिक जीत के रूप में देख रहा है। समझौते में एक बड़ा आर्थिक प्रावधान भी शामिल बताया जा रहा है। इसके अनुसार-
* परमाणु समझौते के अंतिम चरण के बाद 300 अरब डॉलर का पुनर्निर्माण फंड
* क्षेत्रीय देशों के सहयोग से विकास परियोजनाओं को बढ़ावा
* ईरान की अर्थव्यवस्था को स्थिर करने की योजना है।
हालांकि यह स्पष्ट किया गया है कि इस फंड में सीधे अमेरिकी सरकारी धन का उपयोग नहीं होगा।
Washington/Tehran
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि यह समझौता शांति की दिशा में बड़ा कदम है, लेकिन उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि यदि ईरान समझौते का पालन नहीं करता, तो कड़े कदम उठाए जा सकते हैं। यह समझौता यदि पूरी तरह लागू होता है, तो मिडिल ईस्ट की भू-राजनीति, तेल बाजार और वैश्विक सुरक्षा संतुलन पर गहरा असर डाल सकता है। फिलहाल दुनिया की नजरें इस डील के क्रियान्वयन और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया पर टिकी हुई हैं।
Washington/Tehran
विज्ञापन