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अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण सैन्य टकराव अब चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और पूरे मध्य-पूर्व में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। हवाई हमले, मिसाइल हमलों और समुद्री मार्गों पर नियंत्रण को लेकर दोनों देशों के बीच टकराव लगातार बढ़ रहा है।

US-Iran War : अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण सैन्य टकराव अब चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और पूरे मध्य-पूर्व में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। हवाई हमले, मिसाइल हमलों और समुद्री मार्गों पर नियंत्रण को लेकर दोनों देशों के बीच टकराव लगातार बढ़ रहा है। इस संघर्ष में इजरायल, खाड़ी देशों और कई अंतरराष्ट्रीय शक्तियों की सक्रिय या अप्रत्यक्ष भागीदारी के कारण इसे क्षेत्रीय युद्ध का रूप मिलता दिखाई दे रहा है।
इस युद्ध की शुरुआत फरवरी 2026 के अंत में हुई जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के कई सैन्य और परमाणु ठिकानों पर अचानक हवाई हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने मिसाइल और ड्रोन हमलों के जरिए इजरायल तथा अमेरिका के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया।
इसके बाद से पूरे मिडिल ईस्ट में लगातार हमले और जवाबी हमले जारी हैं और हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।
इस समय युद्ध का सबसे संवेदनशील मोर्चा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) बन गया है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है।
इस स्थिति से वैश्विक तेल आपूर्ति पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
हाल के दिनों में ईरान की राजधानी तेहरान सहित कई शहरों में जोरदार धमाकों और हवाई हमलों की खबरें सामने आई हैं।
ईरान ने भी जवाबी हमलों में कई देशों को निशाना बनाया है।
इस युद्ध का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है।
रिपोर्टों के मुताबिक इस संघर्ष के कारण भारतीय रुपया भी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया है और तेल आयात करने वाले देशों की चिंता बढ़ गई है।
भारत ने भी इस संघर्ष पर चिंता जताई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया की स्थिति का असर लंबे समय तक रह सकता है और भारत को सतर्क रहकर वैश्विक परिस्थितियों का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कूटनीतिक प्रयास जल्द शुरू नहीं हुए तो यह संघर्ष और व्यापक हो सकता है।
इन परिस्थितियों के चलते दुनिया एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की आशंका से चिंतित है। US-Iran War
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