अमेरिका-इजराइल को कितनी क्षति, युद्ध के 8 बड़े सवालों के जवाब

अमेरिका और इजराइल ने ईरान के करीब 24 प्रांतों को अपना निशाना बनाया। तेहरान, इस्फहान, कोम जैसे बड़े शहरों में भारी तबाही मची। फोर्डो और नतांज जैसे प्रमुख परमाणु ठिकानों पर भी हमले किए गए, जिससे ईरान का परमाणु कार्यक्रम गंभीर रूप से कमजोर हो गया है। हमलों के पहले दिन ही 201 नागरिकों की मौत हो गई।

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तबाही का दृश्य (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar01 Mar 2026 04:42 PM
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Iran-Israel War : मध्य पूर्व में तनाव अब खुले सैन्य टकराव में बदल चुका है। ईरान और इजराइल के बीच छिड़े इस युद्ध ने पूरी दुनिया को दहशत में डाल दिया है। ईरान के कई शहरों पर हवाई हमले किए गए हैं, जबकि जवाबी कार्रवाई में ईरान ने अमेरिका और इजराइल को भारी नुकसान पहुंचाया है। इस लड़ाई का असर दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ने लगा है। 

आइए, इस युद्ध से जुड़े 8 सबसे बड़े सवालों के जवाब जानते हैं...

1. सबसे बड़ा झटका: खामेनेई की मौत

इस युद्ध का सबसे बड़ा और सनसनीखेज खुलासा ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत है। 28 फरवरी की सुबह तेहरान के पास्तुर जिले में उनके सुरक्षित बंकर पर अमेरिका और इजराइल ने सुसाइड ड्रोन से हमला किया। इस हमले में खामेनेई के साथ ही उनके परिवार के कई सदस्य और शीर्ष ईरानी अधिकारी भी मारे गए। इसके बाद ईरान में सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया तेजी से शुरू हो गई है, जिसे लेकर दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं।

2. ईरान में कितना हुआ विनाश?

अमेरिका और इजराइल ने ईरान के करीब 24 प्रांतों को अपना निशाना बनाया। तेहरान, इस्फहान, कोम जैसे बड़े शहरों में भारी तबाही मची। फोर्डो और नतांज जैसे प्रमुख परमाणु ठिकानों पर भी हमले किए गए, जिससे ईरान का परमाणु कार्यक्रम गंभीर रूप से कमजोर हो गया है। हमलों के पहले दिन ही 201 नागरिकों की मौत हो गई और 747 से अधिक घायल हुए। मीनाब में एक लड़कियों के स्कूल पर हुए हमले में 118 छात्राओं की जान चली गई, जो इस संघर्ष की भयावहता दर्शाता है।

3. ईरान का जवाबी हमला: अमेरिकी ठिकानों को निशाना

ईरान ने चुप्पी नहीं साधी और उसने अमेरिका के मध्य पूर्व में मौजूद 27 सैन्य ठिकानों पर जबरदस्त मिसाइल और ड्रोन हमले किए। कतर का अल उदीद एयर बेस, बहरीन में अमेरिकी नौसेना का 5वां बेड़ा और UAE-कुवैत के ठिकाने इसकी जद में आए। हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया कि उन्हें हल्का नुकसान हुआ है और कोई बड़ी जान-माल की क्षति नहीं हुई। वहीं, इराक में ईरानी हमलों में दो लोगों की मौत हुई।

4. इजराइल पर भारी पड़ाव

ईरान ने इजराइल पर भी बैलिस्टिक मिसाइलों की बौछार कर दी। तेल अवीव और हाइफा में सायरन बजते रहे और हवाई हमलों के डर से एयरस्पेस बंद कर दिया गया। इजराइल के पास मौजूद एयर डिफेंस सिस्टम ने अधिकांश मिसाइलों को रोक लिया, लेकिन फिर भी तेल अवीव में एक महिला की मौत हुई और 121 लोग घायल हुए। उत्तरी इजराइल में एक 9 मंजिला इमारत को भी नुकसान पहुंचा।

5. युद्ध का कारण: परमाणु विवाद

इस भीषण युद्ध का मुख्य कारण ईरान का परमाणु कार्यक्रम है। अमेरिका और इजराइल का आरोप है कि ईरान परमाणु हथियार बना रहा है। 6 से 27 फरवरी तक जिनेवा में हुई वार्ता के बावजूद, जब ईरान समझौते के लिए तैयार दिखा, तब भी अमेरिका और इजराइल ने हमला शुरू कर दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कर दिया है कि हमले तब तक जारी रहेंगे जब तक परमाणु खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता।

6. किसका साथ किसने दिया?

इस युद्ध में किसी भी देश ने सार्वजनिक रूप से सैन्य समर्थन नहीं दिया। यह अमेरिका और इजराइल का संयुक्त अभियान है। हालांकि, सऊदी अरब, कतर, UAE जैसे देश अमेरिकी ठिकानों की मेजबानी करते हैं, लेकिन उन्होंने ईरानी हमलों की निंदा करते हुए अपने हवाई क्षेत्र को बंद कर दिया और अमेरिका-इजराइल के हमलों का खुलकर समर्थन नहीं किया।

7. खामेनेई के बाद ईरान में सत्ता

खामेनेई की मौत के बाद ईरान के संविधान के अनुच्छेद 111 के अनुसार, असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स नए सुप्रीम लीडर का चुनाव करेगी। जब तक नया नेता चुना नहीं जाता, एक अंतरिम परिषद शासन संभालेगी, जिसमें राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान शामिल होंगे। अमेरिका और इजराइल की नजर ईरान में शासन परिवर्तन पर टिकी है।

8. सोने के दामों में उछाल

युद्ध का सीधा असर वैश्विक बाजार पर पड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सोने के दाम में तेज उछाल आएगा। केडिया एडवाइजरी के निदेशक अजय केडिया के मुताबिक, मार्च तक सोना 15% तक बढ़कर 1.85 लाख रुपये तक पहुंच सकता है। निवेशक इस अनिश्चित दौर में सुरक्षित विकल्प के तौर पर सोने की ओर भाग रहे हैं। Iran-Israel War

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खामेनेई की आखिरी पोस्ट पर आखिर ऐसा क्या? जिसने दुनियाभर में मचा दी हलचल

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि खामेनेई Ali Khamenei संयुक्त अमेरिका और इजरायल के हमले में शहीद हो गए। ईरानी मीडिया ने भी शोक जताया और पूरे देश में मातम का माहौल बताया गया।

khamenei
खामेनेई की आखिरी पोस्ट
locationभारत
userअसमीना
calendar01 Mar 2026 12:14 PM
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ईरान की राजनीति और दुनिया की कूटनीति में उस समय हलचल मच गई जब सोशल मीडिया पर यह दावा तेजी से फैलने लगा कि ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत हो गई है। इसी बीच उनके आधिकारिक अकाउंट से एक धार्मिक संदेश पोस्ट हुआ जिसने लोगों के बीच हलचल पैदा कर दी है। यह पोस्ट फारसी भाषा में था “Be nām-e nāmi-ye Heydar, alayhis-salām”। इसका मतलब बताया जा रहा है “हैदर (उन पर शांति हो) के पवित्र नाम से।” इस संदेश को कई लोग आध्यात्मिक संकेत या श्रद्धांजलि के रूप में देख रहे हैं। हालांकि, इस पूरे मामले पर अभी तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

ट्रंप का दावा और सोशल मीडिया पर हलचल

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा कि “खामेनेई मर चुके हैं।” उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि अमेरिका और इज़राइल की ओर से हमला किया गया। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि प्रमुख वैश्विक समाचार एजेंसियों से नहीं हुई है। इसलिए स्थिति को लेकर अब भी संशय बना हुआ है।

धार्मिक संदेश का क्या है अर्थ?

खामेनेई के आधिकारिक अकाउंट से जो पोस्ट किया गया उसमें “हैदर” शब्द का इस्तेमाल हुआ। ‘हैदर’ शिया इस्लाम में पहले इमाम हज़रत अली का एक नाम है। इस तरह के शब्द आमतौर पर धार्मिक और भावनात्मक संदर्भ में उपयोग किए जाते हैं। इस पोस्ट के बाद कई लोगों ने इसे आखिरी संदेश बताया जबकि कुछ का कहना है कि यह सिर्फ धार्मिक भाव प्रकट करने वाला वाक्य हो सकता है। अभी तक इस पोस्ट को लेकर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

ईरानी मीडिया की रिपोर्ट और शोक की खबरें

ईरान के सरकारी चैनल Press TV ने अपने लोगो को काले रंग में दिखाया और कथित तौर पर शोक जताया। चैनल ने इसे “शहादत” बताया। वहीं, Tasnim News Agency और Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) की ओर से भी बयान जारी होने की खबरें सामने आईं। इनमें खामेनेई को महान नेता बताया गया। हालांकि, इन रिपोर्ट्स की भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुष्टि नहीं हुई है।

नया सुप्रीम लीडर बनाए जाने का दावा

कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर घोषित किया गया है। लेकिन ईरान की संवैधानिक प्रक्रिया के तहत सुप्रीम लीडर का चयन विशेषज्ञों की एक परिषद करती है। इस प्रक्रिया को लेकर भी कोई आधिकारिक और स्पष्ट घोषणा सामने नहीं आई है। खामेनेई 1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता थे। उन्होंने रूहोल्लाह खुमैनी के बाद यह पद संभाला था और लंबे समय तक देश की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था पर मजबूत पकड़ बनाए रखी।

क्या है मौजूदा स्थिति?

इस समय सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे और खबरें चल रही हैं, लेकिन विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय स्रोतों से स्पष्ट पुष्टि का इंतजार है। ऐसे संवेदनशील मामलों में आधिकारिक बयान और पक्की जानकारी का इंतजार करना जरूरी होता है। फिलहाल, “In The Name Of Haidar” वाला पोस्ट चर्चा का केंद्र बना हुआ है और लोग इसके धार्मिक और राजनीतिक अर्थ तलाश रहे हैं। आने वाले समय में ही साफ होगा कि इन दावों में कितनी सच्चाई है।

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ईरान पर US-इजराइल के हमले के बाद वैश्विक नेताओं ने जताई गहरी चिंता

रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा, "वॉशिंगटन और तेल-अवीव ने एक बार फिर एक खतरनाक एडवेंचर शुरू किया है, जो तेजी से इस इलाके को मानवीय, आर्थिक और रेडियोलॉजिकल तबाही के कगार पर ला रहा है।" मंत्रालय ने आरोप लगाया कि अमेरिका का मकसद ईरान की संवैधानिक व्यवस्था को खत्म करना और वहां की सरकार को उखाड़ फेंकना है।

Israel US Airstrike
ईरान और अमेरिका-इजराइल में जंग (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar28 Feb 2026 10:38 PM
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Israel US Airstrike: ईरान पर अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हवाई हमलों के बाद मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) का माहौल एक बार फिर तूफानी हो गया है। इस बड़े सैन्य कार्रवाई के बाद दुनिया भर के नेताओं ने इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव और संघर्ष को लेकर गहरी चिंता जताई है। वैश्विक स्तर पर सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की जा रही है, जबकि रूस ने इस हमले को 'खतरनाक एडवेंचर' करार दिया है।

क्या है हालात?

अमेरिका और इजराइल ने शनिवार को ईरान पर एक बड़ा संयुक्त हवाई हमला किया। इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी जनता से अपनी किस्मत खुद तय करने और इस्लामिक लीडरशिप के खिलाफ उठ खड़े होने की अपील की। इसके जवाब में, ईरान ने भी बहरीन, अबू धाबी, दुबई और रियाद समेत मिडिल ईस्ट के कई महत्वपूर्ण इलाकों पर जवाबी हमले किए, जिससे तनाव और बढ़ गया।

रूस का बयान- 'तबाही का खतरा'

रूस ने ईरान पर हमलों की सबसे सख्त आलोचना की है। क्रेमलिन ने इसे एक 'खतरनाक एडवेंचर' बताया है और अपने नागरिकों से ईरान छोड़ने की अपील की है। रूस की सिक्योरिटी काउंसिल के चेयरमैन दिमित्री मेदवेदेव ने कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत सिर्फ एक 'कवर' थी।

रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा, "वॉशिंगटन और तेल-अवीव ने एक बार फिर एक खतरनाक एडवेंचर शुरू किया है, जो तेजी से इस इलाके को मानवीय, आर्थिक और रेडियोलॉजिकल तबाही के कगार पर ला रहा है।" मंत्रालय ने आरोप लगाया कि अमेरिका का मकसद ईरान की संवैधानिक व्यवस्था को खत्म करना और वहां की सरकार को उखाड़ फेंकना है।

कतर ने ईरानी मिसाइलों को किया इंटरसेप्ट

कतर, जहां अमेरिका का एक प्रमुख सैन्य अड्डा है, ने ईरान के जवाबी हमले को लेकर सख्त रुख अपनाया। दोहा में कई धमाके सुनाई दिए, जिसके बाद कतर की रक्षा व्यवस्था ने ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट (रोक) कर लिया।

कतर के विदेश मंत्रालय ने हमलों की कड़ी निंदा करते हुए कहा, "ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों द्वारा कतर के इलाके को निशाना बनाना राष्ट्रीय संप्रभुता का खुला उल्लंघन है।" कतर ने साफ कर दिया कि उसे इस हमले का जवाब देने का पूरा अधिकार सुरक्षित है।

EU और UK ने दिखाई चिंता

यूरोपीय संघ (EU) ने इस घटनाक्रम को 'खतरनाक' बताते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने का आग्रह किया है। यूरोपीय आयोग की प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने न्यूक्लियर सुरक्षा सुनिश्चित करने को 'महत्वपूर्ण' बताया। EU की टॉप डिप्लोमैट काजा कैलास ने इलाके से गैर-जरूरी स्टाफ को वापस बुला लिया है।

वहीं, ब्रिटेन ने साफ किया कि उसने US-इजराइल के इस हमले में कोई हिस्सा नहीं लिया है। ब्रिटिश सरकार ने कहा, "हम नहीं चाहते कि तनाव और बढ़े और यह बड़े इलाके के झगड़े में बदल जाए।" उसने अपनी प्राथमिकता वहां मौजूद अपने नागरिकों की सुरक्षा बताई।

यूक्रेन और फ्रांस का रुख

यूक्रेन ने ईरान पर हमलों के लिए खुद ईरानी अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया। यूक्रेन ने कहा कि ईरानी शासन की अपने ही लोगों और दूसरे देशों के खिलाफ हिंसा और मनमानी ही इस स्थिति का कारण बनी। फ्रांस ने भी अपनी प्राथमिकता अपने नागरिकों और इस क्षेत्र में तैनात अपनी सेनाओं की सुरक्षा को बताया। पेरिस ने कहा कि वह स्थिति पर करीब से नजर रखे हुए है।

अफ्रीकी संघ और रेड क्रॉस की चेतावनी

अफ्रीकी संघ (African Union) ने तत्काल तनाव कम करने और बातचीत की अपील की है। संगठन ने चेतावनी दी कि इस संघर्ष से अफ्रीका की आर्थिक सुरक्षा पर बुरा असर पड़ सकता है और वैश्विक अस्थिरता बढ़ सकती है। इंटरनेशनल कमिटी ऑफ द रेड क्रॉस (ICRC) की प्रेसिडेंट मिरजाना स्पोलजारिक ने चेतावनी दी कि यह लड़ाई पूरे इलाके में एक खतरनाक चेन रिएक्शन पैदा कर सकती है, जिसका सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ेगा। उन्होंने देशों से युद्ध के नियमों का सम्मान करने और मौत-तबाही रोकने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाने को कहा। Israel US Airstrike

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