भारतीय मूल की अमेरिकी वकील मथुरा श्रीधरन को अमेरिका के ओहायो राज्य का नया सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किया गया है। लेकिन इस उपलब्धि के साथ ही उन्हें अपनी भारतीय पहचान और पारंपरिक बिंदी को लेकर नस्लवादी ट्रोलिंग का भी सामना करना पड़ा।

मथुरा के माथे की बिंदी को लेकर ट्रोल्स ने उन्हें गैर-अमेरिकी करार देते हुए सवाल उठाया कि इतनी अहम जिम्मेदारी किसी मूल अमेरिकी को क्यों नहीं दी गई। एक यूजर ने यहां तक कहा, "बिंदी भले ही छोटी है, लेकिन दिखती तो है।" हालांकि, अटॉर्नी जनरल डेव योस्ट ने इन टिप्पणियों को सिरे से खारिज करते हुए दो टूक कहा कि मथुरा श्रीधरन और उनके पति पूरी तरह अमेरिकी नागरिक हैं। उन्होंने श्रीधरन को ओहायोवासियों की उत्कृष्ट सेवा के लिए उपयुक्त बताया। मथुरा श्रीधरन की नियुक्ति उस समय और भी मायने रखती है जब अमेरिका में संस्कृति, पहचान और विविधता को लेकर बहस तेज है। ट्रोल्स की टिप्पणियाँ भले ही सोच का स्तर दिखाती हैं, लेकिन श्रीधरन की उपलब्धि उन हजारों प्रवासी भारतीयों के लिए प्रेरणा है जो दो दुनियाओं के बीच संतुलन साध रहे हैं। गर्व से बिंदी लगाकर और पूरी काबिलियत से पद हासिल किया है इस भारतीय मूल की बेटी मथुरा श्रीधरन ने।
भारतीय मूल की अमेरिकी नागरिक, मथुरा श्रीधरन ने न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी स्कूल आफ लॉ से 2018 में स्नातक किया। ओहायो के अटॉर्नी जनरल आॅफिस में टेंथ अमेंडमेंट सेंटर की निदेशक रहीं। ओहायोवासियों को संघीय अतिक्रमण से बचाने और केंद्र-राज्य शक्तियों के संतुलन हेतु मुकदमों की निगरानी की। उन्होंने अमेरिकी कोर्ट आॅफ अपील (सेकंड सर्किट) के जज स्टीवन जे. मेनाशी और साउदर्न डिस्ट्रिक्ट आॅफ न्यूयॉर्क की जज डेबोरा ए. बैट्स के साथ लॉ क्लर्क के रूप में भी कार्य किया।
डेव योस्ट ने कहा, मथुरा बेहद प्रतिभाशाली हैं। पिछले वर्ष राउडनवर केस में उन्होंने बेहतरीन पैरवी की थी और जीत दिलाई। उनके दोनों पूर्व बॉस फ्लावर्स और गेसर ने भी उनकी काबिलियत की सराहना की है। उन्होंने आगे जोड़ा, जब मैंने उन्हें पहली बार हायर किया, तो कहा था तुम्हें मुझसे बहस करनी होगी, और वह सचमुच करती हैं... हर बार! अब उन्हें प्रमोशन देना मेरे लिए गर्व की बात है।