शादियों, तीज या करवा चौथ की बात हो मेहंदी के बिना महिलाओं का श्रृंगार अधूरा माना जाता है। इसकी खूबसूरत डिजाइन, गहरी खुशबू और सांस्कृतिक मान्यता इसे बेहद खास बनाती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि मेहंदी की यह परंपरा भारत में कब और कैसे आई? क्या मेहंदी हमेशा से हमारी संस्कृति का हिस्सा रही है या फिर किसी और देश से मेहंदी चलन शुरू हुआ? आइए जानते हैं मेहंदी का इतिहास और इसका भारत से रिश्ता। Mehndi History in India
सबसे पहले कहां दिखी मेहंदी?
जानकारी के अनुसार, मेहंदी का सबसे पहला प्रमाण हमें प्राचीन मिस्र (Egypt) की ममियों में मिलता है। हजारों साल पुरानी इन ममियों के नाखून और बाल मेहंदी से रंगे हुए थे। माना जाता है कि मृत्यु से पहले शरीर को सजाने के लिए मेहंदी का उपयोग होता था। वहां से होते हुए इसका चलन मध्य एशिया और फिर अरब देशों तक पहुंचा।
भारत में कैसे आई मेहंदी?
भारत में मेहंदी की परंपरा के दो पहलू माने जाते हैं। एक मत यह है कि प्राचीन भारत में ही इसका इस्तेमाल शुरू हो गया था खासकर धार्मिक और सौंदर्य के उद्देश्यों से। वहीं कुछ इतिहासकारों का मानना है कि 12वीं सदी के आसपास जब मुस्लिम शासक भारत आए तब मेहंदी का चलन यहां तेजी से फैला। मुगल काल में यह एक खास परंपरा बन गई, जहां रानियों और राजकुमारियों के हाथ मेहंदी से सजाए जाते थे।
दुल्हन के 16 श्रृंगार में क्यों शामिल है मेहंदी?
शादी के वक्त दुल्हन को सजाने के लिए सोलह श्रृंगार की परंपरा होती है जिसमें मेहंदी भी शामिल है। इसे शुभता, प्रेम और सौंदर्य का प्रतीक माना जाता है। एक मान्यता ये भी है कि जितना गहरा मेहंदी का रंग होता है उतना ही गहरा प्यार पति-पत्नी के बीच माना जाता है। मेहंदी की एक खास बात यह भी है कि इसमें ठंडक देने वाले प्राकृतिक गुण होते हैं। यही वजह है कि शादी से पहले दुल्हन के हाथ-पैरों पर इसे लगाया जाता है ताकि तनाव कम हो और मन शांत रहे।
मेहंदी एक पौधे (Lawsonia Inermis) की पत्तियों से बनाई जाती है। इन पत्तियों को सुखाकर पीसा जाता है और फिर उसमें नींबू, चीनी या चाय जैसी चीजें मिलाकर पेस्ट तैयार किया जाता है। इस पेस्ट में एक प्राकृतिक रंगद्रव्य होता है लॉसोन (Lawsone) जो त्वचा, बाल और नाखूनों के प्रोटीन से मिलकर गहरा रंग छोड़ता है। मेहंदी को सिर्फ सजने-संवरने के लिए ही नहीं बल्कि शरीर को ठंडक देने, खुजली और जलन से राहत देने और फंगल संक्रमण से बचाने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। गर्मियों में हाथ-पैरों पर मेहंदी लगाना वैज्ञानिक रूप से भी फायदेमंद माना गया है। Mehndi History in India