यूक्रेन के लिथियम पर रूस का नियंत्रण : 'सफेद सोना' पर कब्जे से बदलेगा वैश्विक शक्ति संतुलन?
White Gold
भारत
RP Raghuvanshi
29 Nov 2025 02:22 PM
White Gold : पूर्वी यूक्रेन में चल रही जंग के बीच रूस ने एक और रणनीतिक बढ़त हासिल की है। रूसी सेना ने डोनेट्स्क क्षेत्र स्थित शेवचेंको गांव और इसके आसपास के इलाकों पर कब्जा जमा लिया है। यह क्षेत्र सिर्फ एक भूखंड नहीं, बल्कि 'सफेद सोना' यानी लिथियम का एक विशाल भंडार है, जिसकी वैश्विक तकनीकी और रक्षा उद्योगों में भारी मांग है। ऐसे में रूस की यह जीत न केवल युद्धक्षेत्र में बल्कि भविष्य के भू-राजनीतिक दबदबे की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
13.8 मिलियन टन लिथियम अयस्क : सामरिक संपदा पर कब्जा
शेवचेंको गांव में करीब 13.8 मिलियन टन लिथियम अयस्क की मौजूदगी की पुष्टि वैज्ञानिकों ने 1982 में की थी। यह भंडार लगभग 40 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है और इसमें लिथियम आक्साइड की सांद्रता काफी अधिक मानी जाती है। यही वह संपदा है जिससे ड्रोन, काउंटर-बैटरी रडार, पोर्टेबल कम्युनिकेशन उपकरण और हाई-एंड बैटरियां बनाई जाती हैं।
रूसी सेना की यह जीत केवल यूक्रेन ही नहीं, बल्कि अमेरिका और यूरोप की आपूर्ति शृंखलाओं के लिए गंभीर झटका मानी जा रही है। खासकर तब जब हाल ही में अमेरिका और यूक्रेन के बीच महत्वपूर्ण खनिज समझौता हुआ था।
पुतिन और जिनपिंग का साझा फायदा
विश्लेषकों का मानना है कि इस भंडार पर कब्जा रूस को चीन के और करीब ला सकता है। चीन पहले ही वैश्विक लिथियम प्रसंस्करण का करीब 60% हिस्सा नियंत्रित करता है और अब रूस के कब्जे में आया कच्चा माल बीजिंग के लिए रणनीतिक फायदों का द्वार खोल सकता है। इसके अलावा, चीन और रूस के बीच बीते वर्षों में रक्षा व तकनीकी सहयोग बढ़ा है। ऐसे में दोनों देशों के लिए शेवचेंको क्षेत्र भविष्य की बैटरी व मिसाइल तकनीकों में आत्मनिर्भरता और वर्चस्व की नींव बन सकता है।
खनन में अभी बाधा, लेकिन सहयोग से रास्ता साफ
हालांकि शेवचेंको की भूगर्भीय बनावट जटिल है और इसकी खनन प्रक्रिया में अत्याधुनिक तकनीक की आवश्यकता होगी। पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण फिलहाल रूस के पास यह तकनीक नहीं है। लेकिन अनुमान है कि चीन की मदद से रूस इस बाधा को पार कर सकता है। इस क्षेत्र पर रूस के कब्जे से अमेरिकी रणनीति को झटका लगा है। अमेरिका और यूक्रेन द्वारा खनिज आपूर्ति को लेकर बनाई गई रणनीति को इस घटनाक्रम से बड़ा झटका लगा है। यदि रूस इस क्षेत्र में खनन शुरू करने में सफल हो गया तो वह लिथियम आयात पर अपनी निर्भरता कम कर पाएगा, जिससे उसकी सैन्य-औद्योगिक स्वायत्तता बढ़ेगी।
क्या यह युद्ध का नया चेहरा है?
शेवचेंको पर नियंत्रण इस बात का संकेत है कि अब युद्ध केवल सीमा या सत्ता तक सीमित नहीं रह गया है। आधुनिक युद्धों में खनिज संपदा, तकनीकी आत्मनिर्भरता और वैश्विक आपूर्ति नियंत्रण नए मोर्चे बन चुके हैं। और इन सबके बीच लिथियम 'सफेद सोना'एक निर्णायक भूमिका में उभर रहा है। अगर सफेद सोना के पहाड़ों वाले इस क्षेत्र में रूस का कब्जा हो गया है तो सतझ लीजिए एक तरह से रूस ने यह युद्ध जीत लिया है।