रेगिस्तान में बिछ रही है भारत की बिजनेस बिसात! दुबई बन रहा नया हब
भारत
चेतना मंच
23 Aug 2025 11:20 AM
पिछले कुछ वर्षों में भारतीय कंपनियों की दिलचस्पी दुबई और पूरे यूएई में तेजी से बढ़ी है। कभी तेल पर निर्भर रहने वाला यूएई आज ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन का नया हब बनता जा रहा है और भारतीय कंपनियां इसे बड़ी रणनीतिक संभावना के रूप में देख रही हैं। Dubai
भारत-यूएई व्यापार में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
वित्त वर्ष 2025 में भारत और यूएई के बीच द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब डॉलर के पार पहुंच चुका है, जिसमें भारत का निवेश अकेले 42 अरब डॉलर तक जा पहुंचा है। वहीं, भारत का ट्रेड डेफिसिट यूएई के साथ करीब 27 अरब डॉलर का है जो चीन के मुकाबले कहीं ज्यादा संतुलित माना जा रहा है। जहां भारत का चीन के साथ कुल व्यापार 127 अरब डॉलर से ज्यादा है, वहीं ट्रेड डेफिसिट लगभग 100 अरब डॉलर तक जा पहुंचा है। भारत चीन को जहां केवल 14 अरब डॉलर का एक्सपोर्ट करता है, वहीं इंपोर्ट 113 अरब डॉलर से भी ज्यादा का है। इसके उलट, यूएई के साथ व्यापारिक संबंध तुलनात्मक रूप से अधिक संतुलित हैं। यही वजह है कि भारत अब व्यापारिक दृष्टिकोण से चीन के मुकाबले यूएई को प्राथमिकता दे रहा है।
क्यों भा रहा है दुबई भारतीय कंपनियों को?
यूएई ने हाल के वर्षों में ‘मेक इन अमीरात, मेक फॉर वर्ल्ड’ जैसे अभियानों के तहत अपनी अर्थव्यवस्था को विविधता देना शुरू कर दिया है। अब देश केवल तेल पर नहीं बल्कि मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी और टूरिज्म जैसे सेक्टर्स पर भी जोर दे रहा है। भारतीय कंपनियों को यूएई के फ्री ट्रेड ज़ोन्स में आकर्षक टैक्स पॉलिसीज, सरल व्यापारिक प्रक्रियाएं और वैश्विक बाजारों तक आसान पहुंच मिल रही है। जहां भारत में 276 ऑपरेशनल SEZ हैं, वहीं छोटे से यूएई में 40 फ्री ज़ोन्स में 2 लाख से ज्यादा कंपनियां सक्रिय हैं। यही तुलना बताती है कि क्यों भारतीय कंपनियों का रुझान यूएई की तरफ हो रहा है।
कौन-कौन सी भारतीय कंपनियां पहुंच चुकी हैं यूएई?
टाटा ग्रुप: दुबई में 'ताज एक्सोटिका' से लेकर 'जाफजा' फ्री ज़ोन में टाटा स्टील की फैक्ट्री तक इसकी मौजूदगी है।
डाबर और लेंसकार्ट: पहले से ही यूएई में ऑपरेशनल हैं।
ओमेगा सेकी मोबिलिटी (OSM): इलेक्ट्रिक व्हीकल और ड्रोन सेगमेंट के विस्तार के लिए यूएई को बेस बना रही है।
स्विच मोबिलिटी (अशोक लीलैंड की सब्सिडियरी) और जिंदल पाइप्स भी यूएई में यूनिट स्थापित करने की योजना में हैं।
हिमालय वेलनेस: पर्सनल केयर और फार्मा सेगमेंट में यूएई में नई यूनिट खोलने की योजना बना रही है।
यूएई का भारत में निवेश भी मजबूत
फरवरी 2024 में भारत और यूएई के बीच हुई निवेश संधि अब 31 अगस्त 2024 से लागू हो गई है। अप्रैल 2000 से मार्च 2025 तक, यूएई ने भारत में कुल 22.84 अरब डॉलर का एफडीआई किया है, जिससे वह भारत का सातवां सबसे बड़ा निवेशक बन गया है। अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (ADIA) ने हाल ही में गुजरात की गिफ्ट सिटी में ऑफिस भी खोला है। वहीं, भारतीय कंपनियों का निवेश यूएई में 2025 में 41.6 अरब डॉलर तक पहुंच गया है जो 2024 के मुकाबले करीब 68% ज्यादा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यूएई की रणनीति और भारत के साथ मजबूत होते रिश्ते भविष्य में भी इस ट्रेंड को और मजबूत बनाएंगे। भारत जो अब तक चीन पर भारी निर्भरता के चलते बड़े व्यापार घाटे का सामना कर रहा था, अब यूएई को एक स्थायी और रणनीतिक व्यापारिक विकल्प के रूप में देख रहा है। यूएई अब सिर्फ एक पर्यटन या ट्रांजिट हब नहीं रहा। यह तेजी से एक ऐसा कारोबारी केंद्र बन रहा है जहां भारत की कंपनियां निवेश, निर्माण और वैश्विक विस्तार के नए रास्ते तलाश रही हैं। वहीं भारत भी यूएई को चीन का एक संभावित विकल्प मानते हुए अपने कारोबारी रिश्तों को और मजबूत करने में जुट गया है। Dubai