तेल से टूरिज्म तक: सऊदी अरब कैसे बन रहा है नया ग्लोबल ट्रैवल हब

इस बदलाव की धुरी है Vision 2030, जिसके तहत देश तेल पर निर्भरता घटाकर पर्यटन, मनोरंजन और संस्कृति को विकास की नई रीढ़ बनाने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश, सुधार और अंतरराष्ट्रीय स्तर की योजनाओं को गति दे रहा है।

सऊदी अरब बन रहा है ग्लोबल ट्रैवल डेस्टिनेशन
सऊदी अरब बन रहा है ग्लोबल ट्रैवल डेस्टिनेशन
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar10 Jan 2026 11:26 AM
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Saudi Arabia : सऊदी अरब मध्यपूर्व का एक प्रमुख सुन्नी मुस्लिम देश है, जिसे आधिकारिक रूप से सऊदी अरब साम्राज्य के नाम से जाना जाता है। यह एक इस्लामी राजतंत्र है, जिसकी राजनीतिक-सामाजिक संरचना लंबे समय से परंपरा और शाही व्यवस्था के इर्द-गिर्द रही है। रेतीले मैदानों और उष्ण मरुस्थलीय जलवायु वाला यह देश वैश्विक मंच पर खासकर अपने विशाल तेल भंडार और तेल निर्यात के कारण प्रभावशाली भूमिका निभाता रहा है। लेकिन अब रियाद की कहानी नए मोड़ पर है तेल और धार्मिक यात्राओं तक सीमित छवि से बाहर निकलकर सऊदी अरब खुद को Global Tourism Hub के रूप में गढ़ने में जुट गया है। इस बदलाव की धुरी है Vision 2030, जिसके तहत देश तेल पर निर्भरता घटाकर पर्यटन, मनोरंजन और संस्कृति को विकास की नई रीढ़ बनाने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश, सुधार और अंतरराष्ट्रीय स्तर की योजनाओं को गति दे रहा है।

Vision 2030: बदलाव की आधारशिला

सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान द्वारा प्रस्तुत Vision 2030 केवल एक आर्थिक योजना नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक परिवर्तन का रोडमैप है। इस विजन के तहत पर्यटन को अर्थव्यवस्था का प्रमुख स्तंभ बनाया गया है। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में सऊदी अरब दुनिया के शीर्ष पर्यटन स्थलों में शामिल हो और लाखों अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करे। यही कारण है कि आज सऊदी अरब न केवल धार्मिक पर्यटन तक सीमित है, बल्कि लक्सरी टूरिज्म, एडवेंचर, इको-टूरिज्म, कल्चर और एंटरटेनमेंट टूरिज्म जैसे नए क्षेत्रों में तेजी से निवेश कर रहा है।

मेगा टूरिज्म प्रोजेक्ट्स

सऊदी अरब के टूरिज्म विजन की सबसे बड़ी पहचान उसके मेगा प्रोजेक्ट्स हैं। Red Sea Project इसका प्रमुख उदाहरण है, जहां लक्जरी रिसॉर्ट्स, कोरल रीफ्स और पर्यावरण-संवेदनशील पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है। यह परियोजना दुनिया को यह संदेश देती है कि सऊदी अरब अब Sustainable Tourism की दिशा में आगे बढ़ चुका है। वहीं AlUla Project ऐतिहासिक विरासत और आधुनिक पर्यटन का अनूठा संगम प्रस्तुत करता है। हजारों साल पुरानी सभ्यताओं के अवशेष, रॉक कट आर्किटेक्चर और सांस्कृतिक महोत्सव इसे एक वैश्विक सांस्कृतिक पर्यटन स्थल बना रहे हैं।

Entertainment और Lifestyle का विस्तार

पर्यटन केवल ऐतिहासिक स्थल देखने तक सीमित नहीं होता। इसे समझते हुए सऊदी अरब ने Entertainment और Lifestyle सेक्टर को भी तेजी से विकसित किया है। Qiddiya Project इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जिसे दुनिया का सबसे बड़ा मनोरंजन शहर बनाने की योजना है। थीम पार्क, मोटरस्पोर्ट्स, स्पोर्ट्स एरिना और फैमिली एंटरटेनमेंट ज़ोन इसे Middle East का डिज़्नी लैंड बनाने की दिशा में ले जा रहे हैं। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय संगीत कार्यक्रम, फिल्म फेस्टिवल, खेल प्रतियोगिताएं और ग्लोबल इवेंट्स सऊदी अरब की सॉफ्ट पावर को मजबूत कर रहे हैं।

वीजा सुधार और ओपन पॉलिसी

किसी भी देश के लिए पर्यटन बढ़ाने में वीज़ा नीति अहम भूमिका निभाती है। सऊदी अरब ने इसे समझते हुए टूरिस्ट ई-वीजा की शुरुआत की, जिससे दर्जनों देशों के पर्यटक आसानी से सऊदी अरब की यात्रा कर सकते हैं। यह एक ऐतिहासिक बदलाव माना गया, क्योंकि पहले सऊदी में प्रवेश सीमित था। इसके साथ ही महिलाओं और परिवारों के लिए यात्रा को आसान और सुरक्षित बनाने के प्रयास भी किए गए हैं, जिससे वैश्विक पर्यटकों का भरोसा बढ़ा है।

धार्मिक पर्यटन से आगे की सोच

हज और उमराह सऊदी अरब की पर्यटन अर्थव्यवस्था का सदियों पुराना आधार रहे हैं। लेकिन अब सरकार इन्हें और आधुनिक बनाने के साथ-साथ इनके दायरे को भी बढ़ा रही है। स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल सेवाएं और बेहतर परिवहन व्यवस्था धार्मिक पर्यटन को भी वैश्विक मानकों के अनुरूप ढाल रही हैं।

निवेश और वैश्विक साझेदारी

सऊदी अरब के पर्यटन क्षेत्र में विदेशी निवेश लगातार बढ़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय होटल चेन, एविएशन कंपनियां और टूरिज्म ब्रांड्स सऊदी बाजार में प्रवेश कर रहे हैं। यह विश्वास इस बात का संकेत है कि सऊदी अरब का पर्यटन मॉडल केवल महत्वाकांक्षी नहीं, बल्कि व्यावहारिक भी है। Saudi Arabia

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तेहरान में रातभर बवाल, 217 लोगों की मौत के बाद पूरे ईरान में इंटरनेट बंद

Iran News: ईरान की राजधानी तेहरान में हालात बेहद तनावपूर्ण हो चुके हैं जहां महंगाई से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब सत्ता और धार्मिक नेतृत्व के खिलाफ हिंसक आंदोलन में बदल गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है। सरकार ने इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी है।

तेहरान
ईरान के तेहरान में रातभर बवाल
locationभारत
userअसमीना
calendar10 Jan 2026 11:10 AM
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ईरान की राजधानी तेहरान इस समय गंभीर राजनीतिक और सामाजिक संकट से गुजर रही है। बीते दो हफ्तों से चल रहा विरोध प्रदर्शन अब हिंसक रूप ले चुका है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, केवल तेहरान में अब तक 217 लोगों की जान जा चुकी है जबकि 2,000 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। ईरानी सरकार ने हालात बेकाबू होते देख पूरे देश में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं।

महंगाई और बेरोजगारी से भड़का गुस्सा

इस आंदोलन की शुरुआत महंगाई, बेरोजगारी और ईरानी रियाल की गिरती कीमत के विरोध से हुई थी। आम लोगों का गुस्सा धीरे-धीरे सरकार और धार्मिक नेतृत्व के खिलाफ खुली बगावत में बदल गया। शुरुआती दौर में प्रदर्शन शांतिपूर्ण थे लेकिन हाल के दिनों में हालात बेहद हिंसक हो गए हैं।

तेहरान में सबसे ज्यादा हिंसा

तेहरान के एक डॉक्टर ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर टाइम मैगजीन को बताया कि राजधानी के केवल 6 अस्पतालों में 217 प्रदर्शनकारियों की मौत दर्ज की गई है। इनमें से अधिकांश की मौत गोली लगने से हुई है। इसके अलावा, झड़पों में 14 सेना के जवानों की भी जान गई है।

देशभर में फैल चुका है आंदोलन

यह विरोध प्रदर्शन अब केवल तेहरान तक सीमित नहीं रहा। मशहद, कोम, इस्फ़हान, मशिरियेह, कज़विन, बुशहर और वज्द जैसे कई बड़े शहरों में भी हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। प्रदर्शनकारियों ने कई इलाकों में सड़कों पर आगजनी, तोड़फोड़ और सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया है।

14 दिनों में 5 लाख लोग सड़कों पर

सरकारी और स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले 14 दिनों में 5 लाख से ज्यादा लोग इस आंदोलन में शामिल हो चुके हैं। देशभर में करीब 400 जगहों पर प्रदर्शन हो रहे हैं। पुलिस अब तक 2,300 लोगों को हिरासत में ले चुकी है लेकिन हालात अभी भी नियंत्रण से बाहर हैं।

मस्जिदें, बैंक और सरकारी इमारतें बनीं निशाना

हिंसा के दौरान प्रदर्शनकारियों ने बड़े पैमाने पर सरकारी और धार्मिक संस्थानों को नुकसान पहुंचाया है। बताया जा रहा है कि, अब तक 25 मस्जिदों में आग लगाई गई, 26 बैंकों में लूट की गई, 10 सरकारी इमारतें जलकर खाक हो गईं, 48 फायर ट्रक और 42 बसें जला दी गईं, 24 अपार्टमेंट को भारी नुकसान पहुंचा। इसके अलावा, बासिज और IRGC कैंप पर हमले की घटनाएं भी सामने आई हैं।

तेहरान के मेयर का बयान

तेहरान के मेयर अलीरेज़ा ज़कानी ने सरकारी टीवी पर कहा कि दंगों से राजधानी के इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने बताया कि “एक अस्पताल, दो मेडिकल सेंटर, 26 बैंक, 25 मस्जिदें और कई कानून लागू करने वाली चौकियों को नुकसान पहुंचा है। इमरजेंसी टीमें हालात संभालने में लगी हैं।”

इंटरनेट बंद, कॉलेज और यूनिवर्सिटी बंद

सरकार ने अफवाहों और समन्वय को रोकने के लिए पूरे ईरान में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं। इसके साथ ही कई इलाकों में कॉलेज और यूनिवर्सिटी भी बंद कर दिए गए हैं। बता दें कि, 29 दिसंबर 2025 को तेहरान में व्यापारियों ने ईरानी रियाल की गिरती कीमत के खिलाफ प्रदर्शन शुरू किया। अगले दिन इसमें तेहरान यूनिवर्सिटी के छात्र भी शामिल हो गए। 2 जनवरी को इलम प्रांत में हथियारबंद नकाबपोश लोगों की मौजूदगी की खबरें आईं जिसके बाद हालात तेजी से बिगड़ते चले गए।

ईरान के लिए अब तक का सबसे बड़ा संकट

विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंदोलन अब केवल आर्थिक संकट नहीं बल्कि ईरान की सत्ता व्यवस्था के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है। हालात कब और कैसे संभलेंगे इस पर अभी कोई स्पष्ट संकेत नहीं है।

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ट्रंप के ग्रीनलैंड बयान के बाद यूरोपीय देशों की एकजुटता

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने वेनेजुएला में सैन्य हस्तक्षेप को तेल रिकवरी और शांति मिशन बताया और सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए ग्रीनलैंड पर दावा जताया। इस पर प्रतिक्रिया में फ्रांस, जर्मनी और पांच अन्य यूरोपीय देशों ने संयुक्त बयान जारी कर ट्रंप को संदेश दिया है।

US President Trump
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar06 Jan 2026 08:28 PM
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप की आक्रामक टिप्पणी के बाद यूरोप के सात प्रमुख देश एकजुट हो गए हैं और उन्होंने साफ कर दिया है कि ग्रीनलैंड के भविष्य पर किसी भी तरह का बाहरी दबाव स्वीकार नहीं किया जाएगा।

यूरोपीय देशों का संयुक्त बयान

फ्रांस, जर्मनी, इटली, पोलैंड, स्पेन, ब्रिटेन और डेनमार्क ने एक संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा कि आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा यूरोप की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। बयान में स्पष्ट किया गया कि ग्रीनलैंड के भविष्य पर फैसला केवल डेनमार्क और वहां के लोगों का अधिकार है।

इस संयुक्त बयान पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी, पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टुस्क, स्पेन के प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर और डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन के हस्ताक्षर हैं।

आर्कटिक सुरक्षा पर यूरोप का रुख

संयुक्त बयान में कहा गया कि आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा न केवल यूरोप बल्कि अंतरराष्ट्रीय और ट्रांस-अटलांटिक सुरक्षा के लिए भी बेहद अहम है। नाटो पहले ही आर्कटिक को अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल कर चुका है और यूरोपीय सहयोगी देश वहां अपनी सैन्य मौजूदगी और निवेश लगातार बढ़ा रहे हैं। यूरोपीय नेताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि*डेनमार्क साम्राज्य, जिसमें ग्रीनलैंड शामिल है, नाटो का हिस्सा है और इस क्षेत्र की सुरक्षा नाटो सहयोगियों, खासकर अमेरिका, के साथ मिलकर सुनिश्चित की जानी चाहिए। हालांकि, इसमें संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और सीमाओं की अक्षुण्णता से कोई समझौता नहीं होगा।

अमेरिका अहम साझेदार, लेकिन फैसला स्वतंत्र

बयान में 1951 के रक्षा समझौते का हवाला देते हुए कहा गया कि अमेरिका आर्कटिक सुरक्षा में एक महत्वपूर्ण साझेदार है, लेकिन ग्रीनलैंड से जुड़े फैसले किसी भी बाहरी दबाव में नहीं लिए जाएंगे।

ट्रंप के बयान से बढ़ी चिंता

दरअसल, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा था किे हमें ग्रीनलैंड चाहिए… वहां इस वक्त रूसी और चीनी जहाज मौजूद हैं। ट्रंप ने यह दावा भी किया कि यूरोपीय संघ चाहता है कि अमेरिका ग्रीनलैंड को अपने नियंत्रण में ले, क्योंकि यह अमेरिका की सुरक्षा और आर्थिक हितों के लिए जरूरी है। उनके इस बयान के बाद यूरोप में गंभीर चिंता जताई गई।

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