
नेपाल की राजनीति में बदलाव की हवा बह रही है। लंबे समय तक जारी विरोध प्रदर्शन और युवा शक्ति की आवाज के बीच केपी शर्मा ओली को सत्ता छोड़नी पड़ी। अब देश की बागडोर सुशीला कार्की के हाथों में आने जा रही है, जो अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में पदभार संभालेंगी। 73 वर्षीय कार्की सिर्फ नेपाल सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला चीफ जस्टिस ही नहीं रही हैं, बल्कि उनका भारत के साथ भी गहरा संबंध रहा है। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से राजनीतिक विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन कर चुकीं कार्की के अनुभव और उनके हाल के बयान यह संकेत देते हैं कि नेपाल-भारत के रिश्तों में सकारात्मक बदलाव की संभावना बढ़ रही है। Nepal Protests
सुशीला कार्की नेपाल की राजनीति में लंबे समय से बदलाव की प्रतीक रही हैं। 2016 में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश के रूप में पद संभाला और भ्रष्टाचार के खिलाफ कई साहसिक फैसले लिए, जिनके कारण वह खासकर युवाओं और जनरेशन Z में बेहद लोकप्रिय बन गईं। न्यायिक और राजनीतिक अनुभव के साथ-साथ उनका भारत से भी गहरा जुड़ाव है। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में बिताए गए दिनों की यादें उन्हें आज भी ताजा हैं, और भारतीय समाज तथा संस्कृति के प्रति उनकी लगाव और सकारात्मक दृष्टिकोण साफ झलकता है। Nepal Protests
इतिहास बार-बार यह सिखाता है कि पड़ोसी देशों के बीच रिश्तों की दिशा उनके नेताओं की सोच और निर्णयों से तय होती है। केपी शर्मा ओली के कार्यकाल में भारत-विरोधी रुख ने दोनों देशों के बीच खाई गहरी कर दी थी। लेकिन अब सुशीला कार्की के सत्ता में आने से नेपाल-भारत संबंधों में सुधार और मजबूती की नई उम्मीद जगी है। हाल ही में एक इंटरव्यू में कार्की ने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सम्मान करती हैं और भारत के साथ संवाद और सहयोग बढ़ाने की पूरी इच्छा रखती हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नेपाल और भारत के आम नागरिकों के बीच सदियों से दोस्ती, भाईचारा और गहरा सम्मान रहा है, जिसे और मजबूत किया जा सकता है।
नेपाल और भारत के बीच 1,750 किलोमीटर लंबी साझा सीमा है, जो उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और सिक्किम से मिलती है। इस सीमा के चलते नेपाल में होने वाली राजनीतिक उथल-पुथल का असर सीधे भारत में बसे नेपाली समुदाय पर पड़ता है। भारत में करीब 35 लाख नेपाली कामकाजी जीवन व्यतीत करते हैं, जबकि 32,000 गोरखा सैनिक दशकों से भारतीय सेना में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। ऐसे में नेपाल में सत्ता परिवर्तन सिर्फ काठमांडू तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि इसका असर सीधे भारत की सुरक्षा, सीमा क्षेत्र और द्विपक्षीय संबंधों पर भी दिखाई देता है। Nepal Protests
केपी शर्मा ओली का झुकाव हमेशा चीन की ओर रहा और उनके कार्यकाल में भारत के साथ संबंधों में दूरी बनी रही। सत्ता छोड़ते समय भी उन्होंने विवादित बयान देकर चर्चा बटोरी, विशेषकर लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा जैसे संवेदनशील इलाकों को लेकर। ओली का कहना है कि उनके भारत-विरोधी फैसले और धार्मिक दृष्टिकोण ही उनके सत्ता छोड़ने का कारण बने। इस तरह उनका आखिरी दौर भी दोनों देशों के रिश्तों में तनाव और विवाद का प्रतीक बनकर रहा। Nepal Protests