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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को उपहार स्वरूप प्राप्त स्मृति चिन्हों की ई-नीलामी आज से शुरू हो गई है। इस सातवें संस्करण में 1300 से अधिक आइटम्स आम लोगों के लिए उपलब्ध होंगे, जिन्हें PMMoments वेबसाइट पर जाकर खरीदा जा सकता है। यह नीलामी दो अक्टूबर तक जारी रहेगी। International News
राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय (एनजीएमए) में मंगलवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने इस अवसर पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नीलाम की जाने वाली वस्तुओं में पेंटिंग, कलाकृतियां, मूर्तियां, देवी-देवताओं की मूर्तियां और कुछ खेल सामग्री शामिल हैं। इससे प्राप्त राशि सीधे नामामि गंगे परियोजना के लिए उपयोग की जाएगी।
मंत्री ने बताया कि पहली ई-नीलामी जनवरी 2019 में आयोजित की गई थी। तब से अब तक प्रधानमंत्री को प्राप्त हजारों स्मृति चिन्हों की नीलामी हो चुकी है, जिससे 50 करोड़ रुपये से अधिक राशि नामामि गंगे परियोजना को दी जा चुकी है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि मोदी ऐसे पहले प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने अपने सभी स्मृति चिन्ह इस सामाजिक पहल के लिए समर्पित कर दिए हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रंप ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके 75वें जन्मदिन पर फोन कर हार्दिक शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर ट्रंप ने न केवल जन्मदिन की बधाई दी, बल्कि रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष को समाप्त करने में प्रधानमंत्री मोदी के योगदान के लिए भी आभार व्यक्त किया। International News
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, "प्रधानमंत्री मोदी शानदार काम कर रहे हैं। अभी-अभी मेरे मित्र, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, से फोन पर बातचीत हुई। मैंने उन्हें जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएं दीं। साथ ही रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष को समाप्त करने में आपके सहयोग के लिए धन्यवाद।"
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति का फोन कॉल के लिए धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि वे अमेरिका के साथ व्यापक और वैश्विक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ट्रंप को "मेरा मित्र" संबोधित करते हुए लिखा, "मेरे मित्र राष्ट्रपति ट्रंप, मेरे 75वें जन्मदिन पर आपके फोन कॉल और हार्दिक शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद। भारत अमेरिका के व्यापक और वैश्विक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हम यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में आपकी पहल का समर्थन करते हैं।
सैक्रामेंटो (कैलिफोर्निया) – अमेरिकी राज्य कैलिफोर्निया ने दिवाली को सरकारी अवकाश घोषित करने के रास्ते पर एक बड़ा कदम बढ़ाया है। कैलिफोर्निया विधानमंडल ने पिछले सप्ताह दिवाली पर छुट्टी देने वाले विधेयक-268 को पारित कर दिया। अब केवल गवर्नर गेविन न्यूसम के हस्ताक्षर का इंतजार है, जिसके बाद दिवाली को राज्य की आधिकारिक अवकाश सूची में शामिल कर दिया जाएगा।
यदि यह विधेयक लागू होता है, तो कैलिफोर्निया तीसरा अमेरिकी राज्य बन जाएगा जिसने दिवाली को आधिकारिक रूप से अवकाश घोषित किया है। इससे पहले पेंसिल्वेनिया और कनेक्टिकट ने दिवाली को अपनी छुट्टियों की सूची में शामिल किया है। International News
सामुदायिक कॉलेज और पब्लिक स्कूल दिवाली पर बंद रह सकेंगे।
राज्य के कर्मचारी इस दिन छुट्टी लेने का विकल्प चुन सकते हैं।
कुछ स्कूल और कॉलेज कर्मचारियों को वेतन सहित अवकाश प्रदान किया जाएगा।
कैलिफोर्निया वर्तमान में 11 राजकीय अवकाशों का घर है, जिनमें मार्टिन लूथर किंग जूनियर दिवस, श्रम दिवस, पूर्व सैनिक दिवस और सीज़र शावेज दिवस शामिल हैं। विधेयक को कानून बनाने के लिए गवर्नर न्यूसम को इसे 12 अक्टूबर से पहले मंजूरी देनी होगी।
विधेयक पेश करने वाले डेमोक्रेटिक विधायक ऐश कालरा (सैन जोस) ने कहा, "दिवाली को आधिकारिक अवकाश घोषित करने से न केवल इस त्योहार के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को मान्यता मिलेगी, बल्कि कैलिफोर्निया में रहने वाले भारतीय समुदाय और अन्य नागरिकों को इस प्राचीन त्योहार में भाग लेने का बेहतर अवसर मिलेगा। International News
स्मिथसोनियन नेशनल म्यूजियम ऑफ एशियन आर्ट के अनुसार, दिवाली पांच दिन तक मनाई जाती है और यह पारंपरिक रूप से अक्टूबर या नवंबर में भारत में मनाया जाता है। विदेश में रहने वाले भारतीय भी इसे बड़े उत्साह से मनाते हैं। हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (HAF) के अनुसार, इस दौरान लोग घर, मंदिर और सार्वजनिक स्थानों पर दीप प्रज्वलित कर मां लक्ष्मी के आशीर्वाद की कामना करते हैं। परिवार और मित्र मिलकर उपहार और मिठाइयाँ बाँटते हैं। इस साल दिवाली 20 अक्टूबर से शुरू होगी।
कैलिफोर्निया में दक्षिण एशियाई समुदाय की संख्या देश में सबसे अधिक है। लॉस एंजेल्स, राज्य का प्रमुख शहर, किसी भी अमेरिकी महानगरीय क्षेत्र में चौथे स्थान पर है। पेंसिल्वेनिया 2024 में दिवाली पर आधिकारिक अवकाश घोषित करने वाला पहला राज्य बना था, जबकि कनेक्टिकट ने इस वर्ष इसे अपनी सूची में जोड़ा। न्यू जर्सी और न्यूयॉर्क में भी दिवाली के अवसर पर स्कूलों में छुट्टी की व्यवस्था की गई है। कैलिफोर्निया में लंबे समय से रहने वाले भारतीय समुदाय के लोग इस निर्णय का स्वागत कर रहे हैं। एक हिन्दू नेता ने कहा, "यह हमारे समुदाय के लिए गर्व का पल है। गवर्नर की मंजूरी के बाद दिवाली आधिकारिक अवकाश बन जाएगी। यह प्रयास हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन और अन्य धार्मिक संगठनों की लगातार मेहनत का परिणाम है।
गाजा पट्टी — गाजा शहर में इजराइल सुरक्षा बलों (आईडीएफ) ने ज़मीनी हमले की रफ्तार और तेज़ कर दी है। हमास के ठिकानों पर लगातार भारी बमबारी की जा रही है। सैन्य सूत्रों के मुताबिक, अभी दो डिवीजन सक्रिय हैं और जल्द ही तीसरी डिवीजन भी शामिल हो सकती है। इस बीच तीन लाख से अधिक लोग शहर छोड़ चुके हैं, जबकि सात लाख नागरिक अब भी भीतर फंसे हुए हैं।
अमेरिकी चैनल एबीसी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, सीमा से ली गई तस्वीरों में गाजा शहर के ऊपर घना धुआं साफ दिखाई दे रहा है। आईडीएफ का दावा है कि अब तक लगभग 3.7 लाख लोग शहर से पलायन कर चुके हैं। वहीं संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि केवल पिछले एक महीने में ही उत्तरी गाजा से करीब 2.2 लाख लोग बेघर हुए हैं।
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इजराइल पर राजनीतिक दबाव बनाने के लिए व्यापार संबंधी प्रावधानों को निलंबित करने का प्रस्ताव रखा है। इस पर इजराइल के विदेश मंत्री गिदोन सा'आर ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि यह कदम "अनुपातहीन" और इजराइल को कमजोर करने की कोशिश है। उन्होंने साफ कहा कि सुरक्षा को लेकर इजराइल किसी दबाव में नहीं झुकेगा। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी इस पहल को हमास को फायदा पहुँचाने वाला बताया।
बंधक और लापता लोगों के परिवारों ने मंगलवार को घोषणा की कि वे प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के यरुशलम स्थित आवास के बाहर धरना देंगे। इन परिवारों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन जताने के लिए आभार व्यक्त किया और नेतन्याहू से समझौते की दिशा में ठोस कदम उठाने की अपील की।
गाजा के अस्पतालों से लगातार मौतों की खबरें आ रही हैं। मंगलवार रात से सुबह तक के हमलों में सिर्फ शिफा अस्पताल में ही 23 शव लाए गए। अस्पताल निदेशक डॉ. मोहम्मद अबू सलमिया ने बताया कि बमबारी रातभर जारी रही और मलबे के नीचे अब भी शव फंसे हुए हैं। चिकित्सा सेवाएं गंभीर संकट से गुजर रही हैं। International News
इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने कहा कि आईडीएफ "बंधकों की रिहाई और हमास की हार" सुनिश्चित करने के लिए लड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर हमास ने रिहाई की शर्तें नहीं मानीं तो गाजा पट्टी को ध्वस्त कर दिया जाएगा। काट्ज ने यह भी साफ कर दिया कि हमास का नया सैन्य प्रमुख इज़्ज़ अल-दीन हद्दाद भी पूर्व नेताओं की तरह मारा जाएगा, यदि वह झुका नहीं।
आईडीएफ प्रवक्ता एफी डेफ्रिन ने कहा कि गाजा शहर पर नियंत्रण हासिल करने में महीनों लग सकते हैं। उनके मुताबिक वायु, थल और खुफिया बल संयुक्त रूप से हमास की सैन्य संरचना को ध्वस्त करने में जुटे हैं।
मंगलवार सुबह आईडीएफ चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल इयाल जमीर गाजा शहर पहुँचे और मोर्चे पर तैनात अधिकारियों से मुलाकात की। रिपोर्ट्स के अनुसार इस पूरे अभियान के लिए लगभग 60,000 रिजर्व सैनिकों को बुलाया गया है। International News
2009 के बीडीआर विद्रोह और नरसंहार से जुड़े मानवता-विरोधी अपराधों के मामले में अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण-1 में सोमवार को हुई सुनवाई ने बांग्लादेश की सियासत को एक बार फिर झकझोर दिया। अदालत में गवाही देते हुए अमर देश के संपादक महमूदुर रहमान ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनके परिवार पर गंभीर आरोप मढ़े, तो वहीं बचाव पक्ष ने इसे “व्यक्तिगत प्रतिशोध” का परिणाम बताया। International News
सरकारी बचाव पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील अमीर हुसैन ने कहा कि महमूदुर रहमान जानबूझकर हसीना और शेख फजले नूर तपोश को फंसा रहे हैं। उन्होंने दलील दी कि हसीना ने बीडीआर विद्रोह को सख्ती और कुशलता से नियंत्रित किया और दोषियों को सजा दिलाने की प्रक्रिया सुनिश्चित की। हुसैन ने यह भी साफ किया कि हसीना ने सेना को कमजोर नहीं बल्कि और मजबूत किया।
इसके विपरीत, महमूदुर रहमान ने गवाही में दावा किया कि प्रधानमंत्री बनने के तुरंत बाद हसीना ने सेना को कमजोर करने का अभियान छेड़ा और उनके शासनकाल के शुरुआती दो महीनों में ही बीडीआर नरसंहार की साजिश रची गई। रहमान ने शेख परिवार, विशेषकर पूर्व सांसद शेख तपोश, की संलिप्तता का भी आरोप लगाया।
गवाही के दौरान महमूदुर ने हसीना की तुलना हिटलर से करते हुए कहा- हसीना हिटलर का छोटा संस्करण थीं। उनके पास उतनी शक्ति नहीं थी, लेकिन मानसिकता में वे उससे आगे थीं। यहां तक कि हिटलर ने भी हत्याओं के बाद शवों को गायब करने का आदेश नहीं दिया, जबकि हसीना ने ऐसा किया। International News
उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में संयुक्त राष्ट्र की एक तथ्य-खोजी रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें उनके अनुसार तत्कालीन प्रधानमंत्री हसीना, पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल और अवामी लीग महासचिव ओबैदुल कादर के आदेश पर सामूहिक हत्याओं की पुष्टि की गई है। हालांकि, बचाव पक्ष ने इन दावों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि महमूदुर रहमान का बयान सिर्फ निजी रंजिश और राजनीतिक द्वेष का नतीजा है। International News
गौरतलब है कि फरवरी 2009 में ढाका के पिलखाना मुख्यालय में बांग्लादेश राइफल्स (बीडीआर) के जवानों ने अपने ही अधिकारियों के खिलाफ विद्रोह कर दिया था। इस खूनी बगावत में 57 सैन्य अधिकारियों समेत बड़ी संख्या में लोग मारे गए। यह घटना बांग्लादेश के इतिहास की सबसे भीषण सैन्य त्रासदियों में गिनी जाती है। इसके बाद सरकार ने बीडीआर का नाम बदलकर बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी) कर दिया था। International News