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अमेरिका में काम करने वाले विदेशी पेशेवरों के लिए एच1-बी वीजा अब पहले से कई गुना महंगा हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रंप ने शुक्रवार देर रात एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत एच1-बी वीजा का आवेदन शुल्क 1 लाख अमेरिकी डॉलर तक बढ़ा दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सबसे बड़ा असर भारतीय तकनीकी पेशेवरों और अमेरिकी टेक कंपनियों पर पड़ेगा। सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, नए आदेश के तहत एच1-बी वीजा धारकों को अमेरिका में प्रवेश के लिए 100,000 डॉलर का भुगतान करना अनिवार्य होगा। ट्रंप ने कहा, "हम केवल ऐसे पेशेवरों को अपने देश में रखेंगे जो उच्च उत्पादक हों और जिनमें कंपनियां निवेश करने को तैयार हों। यह कंपनियों के लिए भी लाभकारी साबित होगा। World Hindi News
इस अतिरिक्त शुल्क का सीधा असर अमेजन, आईबीएम, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी बड़ी तकनीकी कंपनियों पर पड़ेगा, जो एच1-बी वीजा पर विदेशी कर्मचारियों की भर्ती करती हैं। पहले यह शुल्क 1,700 से 4,500 डॉलर तक था, जिसे कंपनियां व्यावसायिक खर्च के रूप में मानती थीं। विशेषज्ञ और आलोचक कहते हैं कि यह वीजा कंपनियों को अमेरिकी कर्मचारियों की तुलना में कम वेतन पर विदेशी पेशेवरों को नियुक्त करने में सक्षम बनाता है। कई बार उच्च कौशल वाले वरिष्ठ पदों के बजाय प्रवेश स्तर की भूमिकाओं के लिए भी एच1-बी वीजा दिया जाता है।
श्रम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में अमेजन ने सबसे अधिक एच1-बी वीजा प्राप्त किए। इसके बाद टाटा कंसल्टेंसी, माइक्रोसॉफ्ट, एप्पल और गूगल का क्रम है। व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "इससे यह सुनिश्चित होगा कि अमेरिका में आने वाले पेशेवर अत्यधिक कुशल हों और अमेरिकी कर्मचारियों के अवसरों पर असर न पड़े। साथ ही, कंपनियों को असाधारण प्रतिभाओं को अमेरिका लाने का मार्ग मिलेगा।
नेशनल फाउंडेशन फॉर अमेरिकन पॉलिसी के कार्यकारी निदेशक स्टुअर्ट एंडरसन ने चेताया कि यह योजना अगर कंपनियों को विदेशों में नौकरियां शिफ्ट करने के लिए प्रेरित करती है, तो इसके नकारात्मक प्रभाव हो सकते हैं। उन्होंने कहा, "इससे अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या में कमी आएगी, क्योंकि अमेरिका में नौकरी के अवसर सीमित होंगे और छात्र अध्ययन के लिए कम आएंगे।"
एच1-बी वीजा के लिए पिछले साल सबसे लोकप्रिय नौकरी सॉफ्टवेयर डेवलपर की रही। लॉटरी के माध्यम से जारी किए जाने वाले इस वीजा के लिए आवेदक के पास कम से कम स्नातक की डिग्री और किसी अमेरिकी कंपनी द्वारा अस्थायी नौकरी की पेशकश होना अनिवार्य है। World Hindi News
अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवाओं के अनुसार, इस कार्यक्रम में हर साल 65,000 नए वीजा जारी किए जाते हैं। मास्टर डिग्री या उससे ऊपर योग्यता वाले पेशेवरों के लिए अतिरिक्त 20,000 वीजा जारी किए जा सकते हैं। वित्तीय वर्ष 2026 के लिए यह कोटा पहले ही भर चुका है। World Hindi News
वाशिंगटन। गुजरात के अहमदाबाद में इस साल जून में हुए एयर इंडिया के बोइंग 787 विमान हादसे में जान गंवाने वाले चार यात्रियों के परिवारों ने अमेरिका में हनीवेल इंटरनेशनल के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। यह हादसा 12 जून को हुआ था, जिसमें 242 में से 241 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि केवल एक ब्रिटिश नागरिक ही जीवित बचा। World Hindi News
द सिएटल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, डेलावेयर सुपीरियर कोर्ट में इस सप्ताह की शुरुआत में दायर मुकदमे में विमान निर्माता और आपूर्तिकर्ता कंपनियों पर दोषपूर्ण उत्पाद निर्माण और स्थापना में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया गया है। मुकदमा विशेष रूप से विमान के इंजन ईंधन नियंत्रण स्विच पर केंद्रित है, जिसे हादसे की जांच का मुख्य बिंदु माना जा रहा है।
प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के अनुसार, उड़ान भरने के कुछ ही सेकंड बाद ईंधन स्विच "रन" स्थिति से "कटऑफ" स्थिति में चले गए। कुछ क्षणों के लिए स्विच को वापस चालू किया गया, लेकिन इंजन फिर से चालू नहीं हो पाए और विमान पास के एक मेडिकल हॉस्टल से टकरा गया। इस हादसे में विमान में सवार 242 में से 241 और जमीन पर 19 लोगों की मौत हुई। World Hindi News
कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर से पता चला कि पायलटों ने स्विच के अचानक हिलने पर एक-दूसरे से सवाल किया, लेकिन किसी ने स्वीकार नहीं किया कि उसने स्विच हिलाया। भारतीय विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो और अमेरिकी एनटीएसबी ने जांच के दौरान अटकलों से बचने की चेतावनी दी है। पायलट यूनियनों ने भी किसी पायलट को दोषी ठहराने से सावधानी बरतने को कहा है। प्रारंभिक रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि बोइंग 787 बेड़े या जनरल इलेक्ट्रिक इंजन के लिए कोई अनुशंसित कार्रवाई नहीं की गई थी। एयर इंडिया ने अपने बेड़े के इंजन स्विचों की जांच में कोई समस्या नहीं पाई।
मुकदमे में आरोप है कि हनीवेल और बोइंग ने "खराब" स्विच लगाए, जिनमें पायलट की गलती से हिलने पर रोकने के पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं थे। स्विचों का स्थान "उच्च-यातायात" वाले क्षेत्र में था, जिससे अनजाने में स्विच हिलने और इंजन में ईंधन आपूर्ति बाधित होने का खतरा बढ़ गया। पीड़ित परिवारों का प्रतिनिधित्व करने वाली लैनियर लॉ फर्म ने कहा कि मुकदमा चार यात्रियों की गलत तरीके से हुई मौत के लिए मुआवजे की मांग करता है। वकील बेंजामिन मेजर ने कहा, "परिवार न्याय के हकदार हैं और उन्हें यह जानने का अधिकार है कि वास्तव में क्या हुआ। World Hindi News
हनीवेल इंटरनेशनल एक अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनी है, जो एयरोस्पेस, औद्योगिक स्वचालन, बिल्डिंग ऑटोमेशन, और ऊर्जा स्थिरता समाधान जैसी तकनीकों और सेवाओं में अग्रणी है। 1906 में स्थापित यह कंपनी नवाचार और स्थिरता के लिए जानी जाती है और दुनिया भर में विभिन्न उद्योगों के लिए समाधान विकसित करती है। World Hindi News
पाकिस्तान ने अपने हवाई क्षेत्र में सभी भारतीय स्वामित्व वाली और भारत संचालित एयरलाइंस के प्रवेश पर 23 अक्टूबर तक प्रतिबंध लगा दिया है। यह जानकारी पाकिस्तान हवाई अड्डा प्राधिकरण द्वारा शुक्रवार को जारी नोटम (Notice to Airmen) में दी गई। नोटम के मुताबिक, प्रतिबंध भारतीय वाणिज्यिक विमानों, भारत में पंजीकृत एयरक्राफ्ट और सैन्य उड़ानों पर लागू होगा। द न्यूज अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद बढ़े द्विपक्षीय तनाव का परिणाम है। भारत के जवाबी उपायों के बीच पाकिस्तान लगातार अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी नाराजगी व्यक्त करता रहा है। भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित करने समेत कई क़दम उठाए, जिनका पाकिस्तान ने सार्वजनिक रूप से विरोध किया। World Hindi News
इस प्रतिबंध से पहले भी भारत ने 30 अप्रैल को पाकिस्तान एयरलाइंस के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया था। पाकिस्तान ने इसे 23 मई तक बढ़ाया और अब अक्टूबर तक विस्तारित कर दिया गया है।पाकिस्तान का दावा है कि भारत ने 6-7 मई को उसके शहरों पर "बिना उकसावे" हमले किए थे, जिसके जवाब में उसने ऑपरेशन बनयान-उम-मार्सूस चलाया। भारत ने इसे आतंकवादी ठिकानों पर लक्षित कार्रवाई बताया। दोनों देशों के बीच वास्तविक संघर्ष लगभग 87 घंटे तक चला और 10 मई को शांत हुआ। विशेष रूप से यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान ने ऐसे प्रतिबंध लगाए हों। 1999 के कारगिल युद्ध और 2019 के पुलवामा हमले के समय भी हवाई क्षेत्र बंद करने जैसे कदम उठाए गए थे।
पाकिस्तान के बलोचिस्तान प्रांत का खुजदार जिला शुक्रवार देर रात दहशत से गूंज उठा। दो तलवार इलाके में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के वरिष्ठ नेता आगा शकील अहमद दुर्रानी और पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के सीनेटर आगा शाजेब दुर्रानी के घरों को निशाना बनाकर ग्रेनेड हमला किया गया। हमले में सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात सात सुरक्षाकर्मी जख्मी हो गए।
खुजदार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शहजादा उमर अब्बास बाबर ने बताया कि हमलावर मोटरसाइकिल पर सवार होकर आए और आवास की बाहरी दीवार पर ग्रेनेड फेंककर फरार हो गए। धमाका इतना जोरदार था कि आसपास की इमारतों तक इसकी गूंज सुनाई दी। पुलिस और सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। World Hindi News
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बाबर ने कहा— “हम जल्द ही दोषियों को गिरफ्तार करेंगे और उनके पीछे छिपे नेटवर्क का पर्दाफाश करेंगे।”
घायल सुरक्षाकर्मियों को खुजदार टीचिंग अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनकी हालत स्थिर बताई है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि उन्हें जल्द छुट्टी दे दी जाएगी।
बलोचिस्तान के मुख्यमंत्री मीर सरफराज बुगती ने इस हमले को आतंकी कृत्य करार देते हुए कड़ी निंदा की। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने लिखा— “ऐसी घटनाएं जनता और राजनीतिक नेतृत्व के हौसले को कमजोर नहीं कर सकतीं। कानून प्रवर्तन एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि अपराधियों को जल्द बेनकाब कर न्याय के कटघरे में लाया जाए।” World Hindi News
हमले के बाद पीपीपी नेता और खुजदार के पूर्व महापौर आगा शकील अहमद दुर्रानी ने इसे राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों की साजिश बताया। उन्होंने कहा— “हम शहीदों की पार्टी हैं, हमें डराया नहीं जा सकता। बलोचिस्तान में शांति बहाल करना हमारी प्राथमिकता है। इस घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि खुजदार में पहले भी इस तरह के हमले हो चुके हैं, लेकिन इस बार सुरक्षा व्यवस्था और सख्त की जा रही है। World Hindi News