आंखों से देख नहीं सकते, फिर भी रवि राज ने यूपीएससी में हासिल की 20वीं रैंक

नवादा जिले के रहने वाले रवि राज ने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प से एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है। दृष्टिबाधित होने के बावजूद उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा में आल इंडिया रैंक 20 हासिल की है।

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रवि राज 1
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar07 Mar 2026 12:41 PM
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UPSC Toppers : बिहार के नवादा जिले के रहने वाले रवि राज ने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प से एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है। दृष्टिबाधित होने के बावजूद उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में आल इंडिया रैंक 20 हासिल की है। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम रोशन कर दिया है।

साधारण किसान परिवार से आते हैं रवि राज

रवि राज का संबंध नवादा जिले के अकबरपुर प्रखंड के महुली गांव से है। वे एक साधारण किसान परिवार से आते हैं। बचपन से ही उन्हें देखने में दिक्कत थी, लेकिन इस कमजोरी को उन्होंने कभी अपनी राह की बाधा नहीं बनने दिया। परिवार का सहयोग और उनकी निरंतर मेहनत ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया। UPSC जैसी कठिन परीक्षा में सफल होने के लिए रवि राज ने कई वर्षों तक लगातार तैयारी की। बताया जाता है कि यह उनका पांचवां प्रयास था। इससे पहले भी उन्होंने परीक्षा पास की थी और उन्हें लगभग 182वीं रैंक मिली थी, लेकिन बेहतर परिणाम पाने के लिए उन्होंने फिर से परीक्षा देने का फैसला किया।

दृष्टिबाधित होने के बावजूद लक्ष्य हासिल किया

रोजाना कई घंटों तक पढ़ाई करते हुए उन्होंने अपनी तैयारी को मजबूत किया। दृष्टिबाधित होने के कारण उन्होंने पढ़ाई के लिए आडियो सामग्री, स्क्रीन रीडर और अन्य सहायक तकनीकों का उपयोग किया। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उनका आत्मविश्वास और लक्ष्य के प्रति समर्पण कभी कम नहीं हुआ। रवि राज की इस सफलता से उनके गांव और जिले में खुशी का माहौल है। लोग इसे मेहनत, लगन और आत्मविश्वास की जीत मान रहे हैं। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि अगर इंसान के इरादे मजबूत हों, तो कोई भी कठिनाई उसे अपने लक्ष्य तक पहुंचने से रोक नहीं सकती।UPSC Toppers

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Maruti Fronx और Ignis को टक्कर देने जल्द आ रही नई Exter, जानें लॉन्च की पूरी डिटेल्स

नई हुंडई एक्सटर के लुक में बहुत बड़े बदलाव देखने को शायद न मिलें, लेकिन कंपनी इसे और ज्यादा मॉडर्न बनाने पर फोकस करेगी। कार में चौकोर प्रोजेक्टर हेडलाइट्स पुराने मॉडल जैसी ही रहेंगी, जो इसे एक मजबूत लुक देती हैं।

Hyundai Exter Facelift 2026
Maruti की नई एक्सटर (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar07 Mar 2026 12:31 PM
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Hyundai Exter Facelift : भारतीय ऑटोमोबाइल मार्केट में सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली छोटी SUV में शुमार हुंडई एक्सटर (Hyundai Exter) जल्द ही अपने नए अवतार में उतारी जा रही है। कंपनी इसके फेसलिफ्ट मॉडल को लॉन्च करने की पूरी तैयारी में जुटी है। हाल ही में इस कार को भारतीय सड़कों पर टेस्टिंग के दौरान देखा गया है, जिसके बाद मार्केट में इसके लॉन्च को लेकर काफी बजबजाहट शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि कंपनी इसे 2026 में ग्राहकों के सामने ला सकती है।

बता दें कि हुंडई ने एक्सटर को पहली बार 2023 में भारत में लॉन्च किया था, जिसे मिले शानदार रिस्पॉन्स के चलते यह छोटे SUV सेगमेंट में बहुत जल्द पॉपुलर हो गई थी। यह कार सीधे तौर पर टाटा पंच (Tata Punch) को टक्कर देती है। आइए, जानते हैं कि कंपनी इस नए मॉडल में क्या-क्या बदलाव और नए फीचर्स दे रही है।

डिजाइन में क्या होगा नया?

नई हुंडई एक्सटर के लुक में बहुत बड़े बदलाव देखने को शायद न मिलें, लेकिन कंपनी इसे और ज्यादा मॉडर्न बनाने पर फोकस करेगी। कार में चौकोर प्रोजेक्टर हेडलाइट्स पुराने मॉडल जैसी ही रहेंगी, जो इसे एक मजबूत लुक देती हैं। टेस्टिंग के दौरान कार के पीछे की तरफ काफी कैमॉफ्लाज (कवर) लगाया गया था, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक पीछे की तरफ H-शेप डिजाइन वाली टेललाइट्स पहले जैसी ही रहेंगी। हालांकि, टेललाइट्स के बीच एक नई कनेक्टिंग लाइट बार दी जा सकती है, जिससे कार का लुक और ज्यादा प्रीमियम और फ्यूचरिस्टिक दिखाई देगा।

फीचर्स और टेक्नोलॉजी में होगा अपडेट

हुंडई एक्सटर फेसलिफ्ट में कंपनी फीचर्स और टेक्नोलॉजी को लेकर कोई कोताही नहीं बरतेगी। रिपोर्ट के अनुसार, इसमें बड़ी इंफोटेनमेंट स्क्रीन दी जा सकती है, जिससे कार का इंटीरियर काफी मॉडर्न लगेगा। इसके अलावा डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर को भी बेहतर बनाया जा सकता है। कार में मिलने वाले कनेक्टेड कार फीचर्स को भी अपडेट किया जा सकता है, जिससे मोबाइल के जरिए कार की कई जानकारी जैसे- फ्यूल स्टेटस, लोकेशन और व्हीकल हेल्थ आदि आसानी से देखी जा सकेगी।

इंजन और परफॉर्मेंस

अगर इंजन की बात करें, तो नए मॉडल में ज्यादा बदलाव की उम्मीद नहीं है। नई एक्सटर में वही 1.2 लीटर पेट्रोल इंजन दिया जा सकता है, जो मौजूदा मॉडल में मिलता है। यह इंजन 5-स्पीड मैनुअल और AMT गियरबॉक्स के साथ आ सकता है। इसके अलावा कंपनी इसका CNG वेरिएंट भी जारी रख सकती है। यह वेरिएंट हुंडई की ट्विन सिलेंडर तकनीक के साथ आएगा, जिससे कार में बेहतर बूट स्पेस मिलेगा और फ्यूल की बचत भी होगी। यह विकल्प उन लोगों के लिए बेहतरीन माना जा रहा है जो कम खर्च में ज्यादा माइलेज वाली कार ढूंढ रहे हैं।

बाजार में किसे मिलेगी टक्कर?

न्यू हुंडई एक्सटर लॉन्च के बाद भारतीय बाजार में टाटा पंच (Tata Punch) को सीधी टक्कर देगी। इसके अलावा इसका मुकाबला मारुति सुजुकी फ्रॉन्क्स (Maruti Fronx), मारुति इग्निस (Maruti Ignis), निसान मैग्नाइट (Nissan Magnite), रेनो किगर (Renault Kiger) और सिट्रोएन C3 (Citroen C3) जैसी कॉम्पैक्ट SUVs से होगा। Hyundai Exter Facelift

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स्पेस प्रेग्नेंसी: क्या अंतरिक्ष में संभव है इंसानी जन्म? जानें वैज्ञानिकों का जवाब

पृथ्वी पर ग्रेविटी हड्डियों के घनत्व और मांसपेशियों की वृद्धि में अहम भूमिका निभाती है। वैज्ञानिकों की मानें, तो अंतरिक्ष में ग्रेविटी के अभाव में बच्चे की हड्डियां कमजोर हो सकती हैं और मांसपेशियां सामान्य तरीके से विकसित नहीं हो पाएंगी। इसका असर बच्चे के शरीर के संरचना पर भी पड़ेगा।

Space Pregnancy
अंतरिक्ष में गर्भधारण टेक्निकली संभव (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar07 Mar 2026 11:20 AM
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Space Pregnancy: मानव जाति ने अंतरिक्ष अन्वेषण (स्पेस एक्सप्लोरेशन) के क्षेत्र में जबरदस्त प्रगति की है। चंद्रमा से लेकर मंगल ग्रह तक, इंसान ने धरती के बाहर जीवन की तलाश में कई कदम आगे बढ़ाए हैं। लेकिन इन सभी उपलब्धियों के बीच एक ऐसा सवाल भी है, जो आज भी वैज्ञानिकों के लिए एक बड़ी चुनौती और काफी हद तक सैद्धांतिक (थ्योरेटिकल) बना हुआ है—क्या अंतरिक्ष में प्रेग्नेंसी हो सकती है? अगर हां, तो मां के पेट में पल रहे बच्चे पर इसका क्या असर पड़ेगा?

क्या अंतरिक्ष में संभव है प्रेग्नेंसी?

वैज्ञानिकों का मानना है कि तकनीकी रूप से अंतरिक्ष में कंसीव (गर्भधारण) करना संभव है। इंसानी प्रजनन प्रणाली (रिप्रोडक्टिव सिस्टम) माइक्रोग्रैविटी (महत्वहीन गुरुत्वाकर्षण) में भी काम कर सकती है। लेकिन, इसके साथ ही कई गंभीर जैविक जोखिम (बायोलॉजिकल रिस्क) भी जुड़े हैं, जो इस प्रक्रिया को बेहद जटिल बनाते हैं।

जीरो ग्रेविटी का खतरनाक असर

सबसे बड़ी चिंता का विषय है 'जीरो ग्रैविटी' यानी शून्य गुरुत्वाकर्षण। पृथ्वी पर ग्रेविटी हड्डियों के घनत्व और मांसपेशियों की वृद्धि में अहम भूमिका निभाती है। वैज्ञानिकों की मानें, तो अंतरिक्ष में ग्रेविटी के अभाव में बच्चे की हड्डियां कमजोर हो सकती हैं और मांसपेशियां सामान्य तरीके से विकसित नहीं हो पाएंगी। इसका असर बच्चे के शरीर के संरचना पर भी पड़ेगा। अनुमान लगाया जा रहा है कि ग्रेविटी के अभाव में बच्चे का ऊपरी हिस्सा काफी मजबूत हो सकता है, जबकि निचला हिस्सा—खासकर पैर—कमजोर रह सकते हैं।

दिमाग और आंखों पर पड़ेगा असर

माइक्रोग्रैविटी की वजह से शरीर का तरल पदार्थ (फ्लूइड) सिर की तरफ शिफ्ट हो जाता है। यही वजह है कि अंतरिक्ष में रहने वाले एस्ट्रोनॉट्स को अक्सर चेहरे पर सूजन और खोपड़ी में दबाव महसूस होता है। अगर यह स्थिति गर्भ में पल रहे बच्चे में हो, तो यह विकसित हो रही खोपड़ी के अंदर दबाव बढ़ा सकता है। इसका गंभीर असर बच्चे के ब्रेन डेवलपमेंट, आंखों की रोशनी और न्यूरोलॉजिकल विकास पर पड़ सकता है।

कॉस्मिक रेडिएशन का खतरा

अंतरिक्ष कॉस्मिक रेडिएशन (ब्रह्मांडीय विकिरण) से भरा हुआ है। पृथ्वी का वायुमंडल हमें इससे बचाता है, लेकिन अंतरिक्ष में यह सुरक्षा कवच नहीं होता। एक बढ़ता हुआ भ्रूण (फीटस) इसके लिए खास तौर पर कमजोर होता है, क्योंकि इस दौरान उसकी कोशिकाएं (सेल्स) तेजी से विभाजित होती हैं। रेडिएशन से डीएनए को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे जेनेटिक म्यूटेशन (आनुवंशिक उत्परिवर्तन) का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, जन्म दोष, मिसकैरेज या समय से पहले जन्म का खतरा भी काफी बढ़ जाता है।

जन्म देना होगा बेहद मुश्किल

वैज्ञानिकों के मुताबिक, स्पेस में बच्चे को जन्म देना मां और मेडिकल टीम दोनों के लिए ही बेहद मुश्किल होगा। ग्रेविटी के बिना शरीर के फ्लूइड को कंट्रोल करना और लेबर पेन के दौरान धक्का देना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण होगा। इसके अलावा, जन्म के बाद अंतरिक्ष में पला बच्चा यदि बाद में पृथ्वी आएगा, तो उसे यहां की ग्रेविटी के हिसाब से ढलने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। Space Pregnancy

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