जेवर क्षेत्र के दनकौर कस्बे के 103वें द्रोण मेले में विराट कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। हास्य, व्यंग्य, वीर रस और सामाजिक सरोकारों की कविताओं ने श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा।

Jewar News: जेवर क्षेत्र में स्थित ऐतिहासिक नगरी दनकौर में चल रहे 103वें श्रीकृष्ण जन्मोत्सव एवं द्रोण मेले में रविवार की रात साहित्य और हास्य-व्यंग्य का रंग देखने को मिला। इस दौरान पूरे जेवर क्षेत्र के कविता प्रेमी श्रोता रात भर कविताओं का आनंद लेते रहे। द्रोणाचार्य मंदिर परिसर से जुड़े द्रोण नाट्य मंच पर आयोजित विराट कवि सम्मेलन में देशभर से आए कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा। हास्य, व्यंग्य, वीर रस और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी कविताओं के बीच कार्यक्रम स्थल तालियों और ठहाकों से गूंजता रहा। स्थानीय स्तर पर सामने आई तस्वीरों और सोशल मीडिया पोस्ट में भी कवि सम्मेलन को लेकर लोगों में खास उत्साह दिखाई दिया।
दनकौर का द्रोण मेला केवल मनोरंजन का आयोजन नहीं है। गुरु द्रोणाचार्य से जुड़ी ऐतिहासिक और धार्मिक मान्यताओं के कारण इस मेले का अपना विशेष महत्व है। श्री द्रोणाचार्य मंदिर परिसर में लगने वाले इस वार्षिक मेले में धार्मिक कार्यक्रमों के साथ कुश्ती, नाट्य मंचन, रागिनी, कवि सम्मेलन और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। रविवार की रात कवि सम्मेलन ने इसी परंपरा में साहित्य का रंग जोड़ दिया। मंच पर कविता के माध्यम से जहां हास्य और व्यंग्य ने लोगों को खूब गुदगुदाया, वहीं वीर रस और सामाजिक विषयों से जुड़ी रचनाओं ने श्रोताओं को गंभीर संदेश भी दिए। Dankaur News:
कवि सम्मेलन की खासियत यह रही कि कार्यक्रम को केवल हास्य-मनोरंजन तक सीमित नहीं रखा गया। कविता के अलग-अलग रंगों के माध्यम से सामाजिक जीवन, देशभक्ति, बदलते दौर और आम आदमी से जुड़े विषयों को भी मंच मिला। द्रोण नाट्य मंच पर बड़ी संख्या में पहुंचे श्रोताओं ने कवियों की प्रस्तुतियों का आनंद लिया। कवियों की रचनाओं पर लगातार तालियां और ठहाके गूंजते रहे। उपलब्ध स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक रविवार देर शाम आयोजित कवि सम्मेलन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।Jewar News
दनकौर का यह आयोजन हर वर्ष धार्मिक आस्था के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति को भी बड़ा मंच देता है। इस बार भी मेले में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, धार्मिक कार्यक्रमों और छप्पन भोग के साथ कवि सम्मेलन, रागिनी महोत्सव, नाट्य मंचन, स्कूली बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रम, पंजाबी-राजस्थानी लोकनृत्य और अन्य प्रस्तुतियां आयोजित की जा रही हैं। मेले में बच्चों और युवाओं के लिए झूले तथा मनोरंजन के साधन लगाए गए हैं, जबकि मीना बाजार में आसपास के क्षेत्रों से पहुंच रहे लोग खरीदारी का आनंद ले रहे हैं। दूसरी ओर द्रोण तालाब परिसर में आयोजित कुश्ती दंगल मेले के सबसे बड़े आकर्षणों में शामिल है।
दनकौर का द्रोण मेला धार्मिक परंपरा, लोक संस्कृति और मनोरंजन के अनूठे मेल के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए है। इसी कड़ी में कवि सम्मेलन हर वर्ष साहित्य प्रेमियों और आम दर्शकों को एक साथ जोड़ने वाला कार्यक्रम बनता जा रहा है। गुरु द्रोणाचार्य की ऐतिहासिक नगरी में आयोजित इस तरह के कार्यक्रम यह भी बताते हैं कि पारंपरिक मेलों की भूमिका केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है। ऐसे आयोजन स्थानीय समाज को साहित्य, कला, खेल और लोक संस्कृति से जोड़ने का काम भी कर रहे हैं। 103वां श्रीकृष्ण जन्मोत्सव एवं द्रोण मेला 3 से 15 सितंबर तक आयोजित किया जा रहा है। आने वाले दिनों में रागिनी महोत्सव, नाट्य मंचन, स्कूली बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोकनृत्य, सूफी संगीत और अन्य कार्यक्रम भी मेले के आकर्षण का केंद्र रहेंगे। Jewar News:
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