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प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में बन रहा जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा देश के सबसे आधुनिक एयरपोर्ट्स में शामिल होने जा रहा है। यहां अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे खराब मौसम और घने कोहरे के दौरान भी विमानों का संचालन बिना बाधा जारी रखा जा सकेगा।

Jewar Airport : उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में बन रहा जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा देश के सबसे आधुनिक एयरपोर्ट्स में शामिल होने जा रहा है। यहां अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे खराब मौसम और घने कोहरे के दौरान भी विमानों का संचालन बिना बाधा जारी रखा जा सकेगा। खासतौर पर कैट-3 तकनीक इस एयरपोर्ट की सबसे बड़ी खासियत मानी जा रही है, जो इसे पारंपरिक एयरपोर्ट्स से अलग बनाती है।
उत्तर भारत में सर्दियों के दौरान घना कोहरा उड़ानों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। लेकिन जेवर एयरपोर्ट पर लगाई जा रही कैट-3 तकनीक बेहद कम विजिबिलिटी में भी विमानों की सुरक्षित लैंडिंग और टेकआॅफ को संभव बनाएगी। इस तकनीक के तहत पायलट को एडवांस आॅटोमैटिक गाइडेंस सिस्टम की मदद मिलती है, जिससे विमान को रनवे पर सटीक तरीके से उतारा और उड़ाया जा सकता है। इससे फ्लाइट लेट या कैंसिल होने की समस्या में काफी कमी आने की उम्मीद है।
एयरपोर्ट का रनवे लगभग 3900 मीटर लंबा बनाया जा रहा है, जो बड़े और भारी विमानों के संचालन के लिए पूरी तरह सक्षम होगा। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि एक ही रनवे पर लैंडिंग और टेकआॅफ की प्रक्रिया सुचारु रूप से जारी रह सके। शुरुआत में एयरपोर्ट एक रनवे के साथ काम करेगा, लेकिन यात्रियों और विमानों की संख्या बढ़ने पर यहां दूसरा रनवे भी विकसित किया जाएगा, जिससे क्षमता और बढ़ेगी।
जेवर एयरपोर्ट की योजना इस तरह तैयार की गई है कि यहां एक घंटे में करीब 30 विमानों की आवाजाही संभव हो सके। इससे न केवल एयर ट्रैफिक का दबाव कम होगा, बल्कि विमानों को लंबे समय तक हवा में चक्कर लगाने या रनवे के लिए इंतजार करने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी।
यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एयरपोर्ट पर 10 एयरोब्रिज बनाए जा रहे हैं। इनकी मदद से यात्री सीधे टर्मिनल बिल्डिंग से विमान तक पहुंच सकेंगे। इससे बोर्डिंग और उतरने की प्रक्रिया तेज, सुरक्षित और अधिक सुविधाजनक होगी। साथ ही यात्रियों का समय भी बचेगा और भीड़भाड़ की समस्या कम होगी।
एयरपोर्ट की सुरक्षा को लेकर भी विशेष ध्यान दिया गया है। पूरे परिसर में बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की जा रही है। इसमें विशेष सुरक्षा बलों के साथ अर्धसैनिक बल, पीएसी और खुफिया एजेंसियों की निगरानी शामिल होगी। हर प्रवेश द्वार पर सख्त चेकिंग की जाएगी और बिना अनुमति किसी को भी अंदर जाने की इजाजत नहीं होगी। केवल अधिकृत पासधारकों को ही प्रवेश दिया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार, एयरपोर्ट को इस तरह डिजाइन किया गया है कि मौसम की किसी भी चुनौती के बावजूद संचालन प्रभावित न हो। खासकर सर्दियों में कोहरे के कारण जो समस्याएं आमतौर पर देखने को मिलती हैं, उन्हें इस एयरपोर्ट पर काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा। जेवर एयरपोर्ट के शुरू होने से न सिर्फ दिल्ली-एनसीआर बल्कि पूरे उत्तर भारत की एयर कनेक्टिविटी को नया आयाम मिलेगा। इससे यात्रियों को बेहतर विकल्प मिलेंगे और क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
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