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उत्तर प्रदेश के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट जेवर एयरपोर्ट से नियमित उड़ानें शुरू होने का इंतजार एक बार फिर लंबा होता दिख रहा है। लंबे समय से चर्चा में रहे इस बड़े प्रोजेक्ट के सामने अब नया प्रशासनिक और सुरक्षा संबंधी मामला खड़ा हो गया है।

Jewar Airport : उत्तर प्रदेश के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट जेवर एयरपोर्ट से नियमित उड़ानें शुरू होने का इंतजार एक बार फिर लंबा होता दिख रहा है। लंबे समय से चर्चा में रहे इस बड़े प्रोजेक्ट के सामने अब नया प्रशासनिक और सुरक्षा संबंधी मामला खड़ा हो गया है। ताजा घटनाक्रम ने अब साफ संकेत दे दिया है कि जेवर एयरपोर्ट का संचालन फिलहाल तय समय पर शुरू होना आसान नहीं होगा। सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए साफ कर दिया है कि मौजूदा व्यवस्था में जेवर एयरपोर्ट से कमर्शियल फ्लाइट्स शुरू करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। Jewar Airport
बताया जा रहा है कि जेवर एयरपोर्ट के मौजूदा मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रिस्टोफ श्नेलमान के विदेशी नागरिक होने पर सुरक्षा एजेंसियों ने गंभीर आपत्ति दर्ज की है। समीक्षा के दौरान यह प्रश्न उठाया गया कि देश के इतने अहम एयरपोर्ट प्रोजेक्ट का शीर्ष प्रशासनिक पद किसी विदेशी नागरिक के हाथ में कैसे रह सकता है, खासकर तब जब मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हो। सूत्रों के मुताबिक, इंटेलिजेंस एजेंसियों और गृह मंत्रालय के स्तर पर हुई समीक्षा के बाद यह राय बनी कि जेवर एयरपोर्ट जैसे रणनीतिक महत्व वाले हवाई अड्डे के प्रमुख पद पर किसी भारतीय नागरिक की नियुक्ति आवश्यक है। यही वजह है कि अब इस मुद्दे को लेकर केंद्र ने सख्त रुख अपना लिया है। Jewar Airport
जानकारी के अनुसार, जेवर एयरपोर्ट प्रबंधन ने मौजूदा CEO के साथ ही फ्लाइट ऑपरेशन शुरू करने की अनुमति मांगी थी, लेकिन इस अपील को मंजूरी नहीं मिल सकी। गृह मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि जब तक जेवर एयरपोर्ट के CEO पद पर भारतीय नागरिक की नियुक्ति नहीं होती, तब तक यात्री और कार्गो उड़ानों के संचालन को अंतिम हरी झंडी नहीं दी जाएगी। इस फैसले ने जेवर एयरपोर्ट के संचालन की पूरी समयसीमा को प्रभावित कर दिया है। पहले ही कई तकनीकी और नियामकीय प्रक्रियाओं से गुजर रहे इस प्रोजेक्ट को अब एक और प्रशासनिक बदलाव के कारण नई देरी का सामना करना पड़ सकता है। Jewar Airport
सूत्रों का कहना है कि नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो यानी BCAS के नियमों में भारतीय एयरपोर्ट के प्रमुख पदों पर भारतीय नागरिक की नियुक्ति का प्रावधान है। इसी आधार पर सुरक्षा एजेंसियों ने जेवर एयरपोर्ट के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। यानी एयरपोर्ट के निर्माण और परीक्षण कार्य आगे बढ़ जाने के बावजूद संचालन की अंतिम मंजूरी अब केवल तकनीकी तैयारी पर निर्भर नहीं रह गई, बल्कि प्रशासनिक पात्रता भी उतनी ही अहम शर्त बन गई है। यही कारण है कि जेवर एयरपोर्ट अब केवल इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार होने के बाद उड़ान शुरू करने वाली परियोजना नहीं रह गया, बल्कि यह सुरक्षा मानकों और नियामकीय अनुपालन की कसौटी पर भी खड़ा है। Jewar Airport
पहले उम्मीद जताई जा रही थी कि जरूरी औपचारिकताएं पूरी होते ही जेवर एयरपोर्ट से कमर्शियल फ्लाइट्स शुरू कर दी जाएंगी। कुछ एजेंसियों की ओर से सशर्त मंजूरी का रास्ता भी खुला बताया गया था, लेकिन अब अंतिम सुरक्षा अनुमति CEO के मुद्दे से जुड़ गई है। ऐसे में साफ है कि जेवर एयरपोर्ट से उड़ानें शुरू होने में और समय लग सकता है। सूत्रों के अनुसार यदि प्रबंधन स्तर पर जल्दी फैसला भी हो जाए तब भी नई नियुक्ति, सुरक्षा मंजूरी और बाकी औपचारिकताएं पूरी करने में कई हफ्ते लग सकते हैं। Jewar Airport
बता दें कि बीते 28 मार्च को जेवर एयरपोर्ट का उद्घाटन हो चुका है। प्रधानमंत्री स्तर पर उद्घाटन और बड़े दावों के बावजूद जेवर एयरपोर्ट अब तक नियमित उड़ानें शुरू नहीं कर सका है। यही वजह है कि इस परियोजना को लेकर लोगों की उत्सुकता के साथ-साथ सवाल भी बढ़ते जा रहे हैं। जेवर एयरपोर्ट को उत्तर भारत के बड़े एविएशन हब के रूप में विकसित करने की योजना लंबे समय से चर्चा में है। लेकिन संचालन में हो रही देरी इस महत्वाकांक्षी परियोजना की रफ्तार पर असर डाल सकती है। Jewar Airport
जेवर एयरपोर्ट से उड़ानें शुरू होने में देरी का असर केवल यात्रियों तक सीमित नहीं रहेगा। इससे कार्गो मूवमेंट, लॉजिस्टिक्स, निवेश, होटल व्यवसाय, ट्रांसपोर्ट नेटवर्क और आसपास के औद्योगिक विकास पर भी असर पड़ सकता है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र की विकास योजनाओं में जेवर एयरपोर्ट की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है। ऐसे में इस प्रोजेक्ट में हर नई देरी व्यापक आर्थिक गतिविधियों पर भी असर डाल सकती है। Jewar Airport
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