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ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र अब औद्योगिक निवेश के नए मानचित्र पर तेजी से उभरते नजर आ रहे हैं। खासकर जेवर एयरपोर्ट और बेहतर एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी ने इस पूरे इलाके की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है।

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Jewar Airport : ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र अब औद्योगिक निवेश के नए मानचित्र पर तेजी से उभरते नजर आ रहे हैं। खासकर जेवर एयरपोर्ट और बेहतर एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी ने इस पूरे इलाके की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है। इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी कंपनियां अब इस क्षेत्र को सिर्फ एक औद्योगिक विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि भविष्य के बड़े निवेश केंद्र के तौर पर देखने लगी हैं। यही वजह है कि यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में नई कंपनियों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है और इसके साथ युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते भी खुलते दिखाई दे रहे हैं। गौतमबुद्ध नगर पहले ही देश के इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में मजबूत पहचान बना चुका है। मोबाइल फोन निर्माण के क्षेत्र में इस जिले की हिस्सेदारी बेहद अहम मानी जा रही है। अब इस औद्योगिक ताकत को और आगे बढ़ाने में जेवर एयरपोर्ट की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उद्योग जगत का मानना है कि एयर कनेक्टिविटी, एक्सप्रेसवे नेटवर्क और जमीन की उपलब्धता का यह मेल यमुना प्राधिकरण क्षेत्र को निवेशकों के लिए और आकर्षक बना रहा है।
इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर की कई कंपनियां यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं को लेकर उत्साहित हैं। इलेक्ट्रॉनिका एंड प्रोडक्ट्रॉनिका इंडिया 2026 जैसे बड़े आयोजन ने भी इस क्षेत्र को नई पहचान देने का काम किया है। ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में शुरू हुए इस आयोजन के दौरान यमुना प्राधिकरण के अधिकारियों ने कंपनियों के साथ सीधे संवाद कर उन्हें क्षेत्र की संभावनाओं से अवगत कराया। अधिकारियों ने कंपनियों को बताया कि जेवर एयरपोर्ट के शुरू होने से इस क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक तेज पहुंच मिलेगी। वहीं, देश के भीतर यमुना एक्सप्रेसवे और अन्य सड़क नेटवर्क के कारण लॉजिस्टिक्स लागत कम होने की उम्मीद है। यही वजह है कि इलेक्ट्रॉनिक और तकनीकी क्षेत्र की कंपनियां यहां निवेश को लेकर पहले से ज्यादा गंभीर नजर आ रही हैं।
यमुना प्राधिकरण क्षेत्र की सबसे बड़ी ताकत अब सिर्फ जमीन नहीं, बल्कि उसकी रणनीतिक लोकेशन बन गई है। जेवर एयरपोर्ट इस पूरे क्षेत्र को एक नए औद्योगिक गेटवे के रूप में स्थापित कर रहा है। कंपनियों को लग रहा है कि यहां यूनिट लगाने से उनके उत्पादों को घरेलू बाजार के साथ-साथ विदेशी बाजारों तक भी तेज और आसान पहुंच मिल सकेगी। इलेक्ट्रॉनिक्स, मेडिकल डिवाइस, सेमीकंडक्टर और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों के लिए यह कनेक्टिविटी बेहद अहम है। भारी निवेश वाले उद्योग ऐसे ही स्थानों को प्राथमिकता देते हैं, जहां उत्पादन, स्टोरेज, ट्रांसपोर्ट और निर्यात की सुविधाएं एक साथ उपलब्ध हों। जेवर एयरपोर्ट ने यमुना प्राधिकरण क्षेत्र को इसी श्रेणी में ला खड़ा किया है। यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में पहले से कई बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट आकार ले रहे हैं। यहां इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर, मेडिकल डिवाइस पार्क, सेमीकंडक्टर चिप फैक्ट्री और डेटा पार्क जैसे प्रोजेक्ट विकसित किए जा रहे हैं। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि यह इलाका आने वाले समय में सिर्फ औद्योगिक विस्तार का केंद्र नहीं रहेगा, बल्कि हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा बेस बन सकता है। कई कंपनियां पहले ही यहां स्थापित हो चुकी हैं और हजारों करोड़ रुपये का निवेश जमीन पर उतर चुका है। माना जा रहा है कि जैसे-जैसे जेवर एयरपोर्ट और उससे जुड़ी परियोजनाएं आगे बढ़ेंगी, वैसे-वैसे इस पूरे क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियां और तेज होंगी।
इस औद्योगिक विस्तार का सबसे बड़ा असर रोजगार के मोर्चे पर दिखाई देगा। इलेक्ट्रॉनिक्स और तकनीकी उद्योगों की नई इकाइयां लगने से स्थानीय युवाओं के लिए नौकरी के अवसर बढ़ेंगे। उत्पादन इकाइयों, वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक्स, तकनीकी सेवाओं, सुरक्षा, परिवहन और सपोर्ट सेक्टर में बड़ी संख्या में रोजगार पैदा होने की संभावना है। विशेषज्ञ मानते हैं कि जेवर एयरपोर्ट के आसपास विकसित हो रहा औद्योगिक ढांचा केवल बड़े निवेशकों को ही फायदा नहीं पहुंचाएगा, बल्कि इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। छोटे कारोबार, सेवा क्षेत्र और आसपास के कस्बों में भी इसका सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद है।
बेहतर बुनियादी ढांचे, नीतिगत समर्थन और रणनीतिक लोकेशन के दम पर यमुना प्राधिकरण क्षेत्र निवेशकों की पसंद बनता जा रहा है। यहां पर्याप्त जमीन, मजबूत एक्सप्रेसवे नेटवर्क और जेवर एयरपोर्ट जैसी बड़ी परियोजना उद्योगों के लिए नया भरोसा पैदा कर रही है। कंपनियां ऐसे ही स्थानों की तलाश में रहती हैं जहां निवेश के साथ विस्तार की भी गुंजाइश हो, और यही बढ़त इस क्षेत्र को मिलती दिख रही है। प्रदेश सरकार की उद्योग हितैषी नीतियां, आसान प्रक्रियाएं और निवेशकों को दी जा रही रियायतें इस पूरे इलाके को औद्योगिक विकास के नए केंद्र के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभा रही हैं।
यमुना प्राधिकरण से जुड़े अधिकारी मानते हैं कि आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग का बड़ा हब बनकर उभर सकता है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण यही बताया जा रहा है कि यहां उद्योग स्थापित करने के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा तेजी से तैयार हो रहा है। जेवर एयरपोर्ट के कारण इस क्षेत्र की ब्रांड वैल्यू भी बढ़ी है, जिससे कंपनियां इसे लंबे समय के निवेश के लिए उपयुक्त मान रही हैं। प्राधिकरण और प्रदेश सरकार दोनों का फोकस इस क्षेत्र में बड़े निवेश लाने, औद्योगिक क्लस्टर विकसित करने और रोजगार सृजन को तेज करने पर है। अगर यही रफ्तार बनी रही, तो आने वाले समय में जेवर एयरपोर्ट के आसपास का इलाका उत्तर भारत के सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक जोन में शामिल हो सकता है।
निवेशकों को आकर्षित करने के लिए अधिकारियों ने क्षेत्र में उपलब्ध जमीन, कनेक्टिविटी, औद्योगिक सुविधाओं, सरकारी नीतियों और प्रोत्साहन योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी। साथ ही कंपनियों को यह भी बताया गया कि भूमि आवंटन की प्रक्रिया किस तरह की है और किस प्रकार उन्हें यहां उद्योग स्थापित करने में मदद मिल सकती है। इस दौरान वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी ने भी साफ संकेत दिया कि सरकार और प्राधिकरण दोनों इस क्षेत्र को औद्योगिक निवेश के लिहाज से प्राथमिकता दे रहे हैं। माना जा रहा है कि इस संवाद का असर आने वाले समय में जमीन पर दिखाई दे सकता है। Jewar Airport
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