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उत्तर प्रदेश के जेवर एयरपोर्ट ने शुरू होने से पहले ही देशभर में एक नई चर्चा छेड़ दी है। यह परियोजना सिर्फ एक बड़े हवाई अड्डे के रूप में नहीं, बल्कि राजस्व, भूमि अधिग्रहण, निवेश और विकास के नए मॉडल के तौर पर देखी जा रही है।

Jewar Airport : उत्तर प्रदेश के जेवर एयरपोर्ट ने शुरू होने से पहले ही देशभर में एक नई चर्चा छेड़ दी है। यह परियोजना सिर्फ एक बड़े हवाई अड्डे के रूप में नहीं, बल्कि राजस्व, भूमि अधिग्रहण, निवेश और विकास के नए मॉडल के तौर पर देखी जा रही है। खास बात यह है कि जेवर एयरपोर्ट ऐसा पहला ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनने जा रहा है, जहां सरकार को हर यात्री पर सीधे तय आय मिलेगी। बताया जा रहा है कि जेवर एयरपोर्ट पर आने-जाने वाले प्रत्येक यात्री से सरकार को 400 रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त होगा। भारतीय विमानन क्षेत्र में इसे बेहद अहम और अलग प्रयोग माना जा रहा है। अब तक देश में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजनाओं में आमतौर पर सरकार और एयरपोर्ट ऑपरेटर के बीच मुनाफे की हिस्सेदारी का ढांचा लागू होता रहा है। इस व्यवस्था में सरकार की कमाई तय नहीं होती थी, क्योंकि वह ऑपरेटर के लाभ पर निर्भर रहती थी। लेकिन जेवर एयरपोर्ट के लिए अपनाया गया मॉडल इससे बिल्कुल अलग है। यहां प्रति यात्री निश्चित राजस्व का प्रावधान किया गया है। यही वजह है कि अब कई अन्य राज्य भी जेवर एयरपोर्ट के इस ढांचे को गंभीरता से समझ रहे हैं और भविष्य की परियोजनाओं में इसे अपनाने पर विचार कर रहे हैं।
जेवर एयरपोर्ट की एक और बड़ी खासियत इसका निवेश ढांचा है। यह परियोजना 100 फीसदी विदेशी प्रत्यक्ष निवेश यानी एफडीआई पर आधारित है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के जरिए विदेशी कंपनी का चयन किया गया, जिससे जेवर एयरपोर्ट को वैश्विक स्तर पर भी पहचान मिली। इस वजह से यह सिर्फ उत्तर प्रदेश या भारत की परियोजना नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की नजर में भी एक महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल बनकर उभरा है।भूमि अधिग्रहण के मामले में भी जेवर एयरपोर्ट ने नया रिकॉर्ड बनाया है। इस परियोजना के लिए कुल 5428 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया गया, जिसमें पुनर्वास के लिए दी गई जमीन भी शामिल है। नए भूमि अधिग्रहण कानून के तहत इसे देश की सबसे बड़ी प्रक्रियाओं में गिना जा रहा है। सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि जिस क्षेत्र में कभी किसानों का विरोध चर्चा का विषय बना था, वहीं जेवर एयरपोर्ट के लिए भूमि अधिग्रहण अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से पूरा किया गया।
इस पूरी प्रक्रिया में सामाजिक प्रभाव आकलन की जिम्मेदारी गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय ने निभाई। जेवर एयरपोर्ट परियोजना के साथ जुड़कर विश्वविद्यालय ने इस क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता साबित की। अब विश्वविद्यालय अन्य परियोजनाओं में भी सोशल इंपैक्ट असेसमेंट का कार्य कर रहा है। इससे संस्थान को आर्थिक लाभ के साथ-साथ तकनीकी पहचान भी मिली है। साफ है कि जेवर एयरपोर्ट ने केवल बुनियादी ढांचा ही नहीं बनाया, बल्कि शैक्षणिक संस्थानों के लिए भी नए अवसर तैयार किए हैं। निर्माण गति के लिहाज से भी जेवर एयरपोर्ट राष्ट्रीय स्तर पर उदाहरण बनता दिख रहा है। साइट क्लियरेंस से लेकर निर्माण और लोकार्पण की तैयारी तक, पूरी प्रक्रिया को अपेक्षाकृत कम समय में आगे बढ़ाया गया। यही कारण है कि जेवर एयरपोर्ट को अब कई राज्य अध्ययन के विषय के रूप में देख रहे हैं। विभिन्न विभागों और एजेंसियों के अधिकारी यहां की कार्यशैली, प्रबंधन और समन्वय को समझने के लिए रुचि दिखा रहे हैं। बता दे कि लोकार्पण को लेकर भी तैयारियां तेज हो चुकी हैं। प्रशासनिक स्तर पर सुरक्षा, ट्रैफिक प्रबंधन, पार्किंग, पेयजल, साफ-सफाई और प्रकाश व्यवस्था जैसी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। माना जा रहा है कि जेवर एयरपोर्ट के उद्घाटन कार्यक्रम को भव्य स्वरूप दिया जाएगा। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है और बड़ी जनसभा की भी तैयारी चल रही है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि आयोजन से जुड़ी हर व्यवस्था समय रहते पूरी कर ली जाए। Jewar Airport
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