जेवर एयरपोर्ट के संचालन की उलटी गिनती शुरू होते ही उसके आसपास के इलाकों में प्रॉपर्टी बाजार को लेकर उत्साह तेजी से बढ़ने लगा है। माना जा रहा है कि जेवर एयरपोर्ट शुरू होने के बाद इस पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल सकती है।

Jewar Airport : जेवर एयरपोर्ट के संचालन की उलटी गिनती शुरू होते ही उसके आसपास के इलाकों में प्रॉपर्टी बाजार को लेकर उत्साह तेजी से बढ़ने लगा है। माना जा रहा है कि जेवर एयरपोर्ट शुरू होने के बाद इस पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल सकती है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले दो वर्षों में जेवर एयरपोर्ट के आसपास प्लॉट और फ्लैट की कीमतों में 22 से 28 प्रतिशत तक की वृद्धि देखने को मिल सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 मार्च को जेवर एयरपोर्ट का उद्घाटन करने वाले हैं, जिसके बाद इस क्षेत्र में निवेश की गतिविधियां और तेज होने की उम्मीद है। रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़ी रिपोर्ट्स बताती हैं कि पिछले पांच वर्षों में इस बेल्ट में अपार्टमेंट की कीमतों में करीब तीन गुना तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं प्लॉट की कीमतें औसतन डेढ़ गुना तक चढ़ी हैं। कुछ चुनिंदा माइक्रो मार्केट्स में तो दाम पांच गुना तक बढ़ने की बात सामने आई है। इससे साफ संकेत मिलता है कि इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के साथ निवेशकों का भरोसा भी लगातार मजबूत हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जेवर एयरपोर्ट केवल एक हवाई अड्डा नहीं, बल्कि एक बड़े शहरी और आर्थिक परिवर्तन का केंद्र बनने जा रहा है। इस परियोजना के साथ ‘एयरोट्रोपोलिस’ मॉडल पर विकास की योजना को गति मिली है। इस मॉडल के तहत एयरपोर्ट के आसपास कॉमर्शियल, इंडस्ट्रियल, लॉजिस्टिक्स और रिहायशी ढांचे को एक साथ विकसित किया जाता है, ताकि एक आत्मनिर्भर शहरी इकोसिस्टम तैयार हो सके।
रियल एस्टेट क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि नोएडा अब अपने स्थानीय आधार को बरकरार रखते हुए वैश्विक स्तर की महत्वाकांक्षाओं की ओर बढ़ रहा है। जेवर एयरपोर्ट इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह बनकर उभरा है। इससे न केवल घरों की मांग बढ़ेगी, बल्कि लंबे समय में कीमतों और निवेश गतिविधियों पर भी गहरा असर पड़ेगा।
सरकार जेवर एयरपोर्ट के आसपास जिस विकास मॉडल को आगे बढ़ा रही है, उसे दुनिया के बड़े एयरपोर्ट-आधारित शहरों की तर्ज पर देखा जा रहा है। इसे एम्स्टर्डम के शिफोल एयरपोर्ट जैसे अंतरराष्ट्रीय उदाहरणों के समकक्ष रखने की कोशिश की जा रही है। इस तरह का मॉडल केवल यात्रा सुविधा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि रोजगार, व्यापार, लॉजिस्टिक्स और आवासीय विकास के नए अवसर भी पैदा करता है। एक समय ऐसा भी था जब नोएडा का रियल एस्टेट बाजार एनसीआर के अन्य हिस्सों की तुलना में अपेक्षाकृत धीमा माना जाता था। इसकी वजह परियोजनाओं में देरी और डेवलपर्स के सामने आने वाली कई चुनौतियां थीं। लेकिन जेवर एयरपोर्ट परियोजना पर तेजी से आगे बढ़ते काम ने अब पूरे परिदृश्य को बदलना शुरू कर दिया है। अब जब एयरपोर्ट शुरू होने के करीब है, तो उम्मीद की जा रही है कि यह एनसीआर के रियल एस्टेट सेक्टर को नई दिशा देगा। खासतौर पर यमुना एक्सप्रेसवे और उसके आसपास के इलाके तेजी से उभरते निवेश केंद्र बन सकते हैं। आने वाले समय में इन क्षेत्रों में आवासीय और व्यावसायिक दोनों तरह की परियोजनाओं की मांग बढ़ने की संभावना है।
जेवर एयरपोर्ट को देश की सबसे अहम ग्रीनफील्ड इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में गिना जा रहा है। यह एनसीआर का दूसरा सिविल एयरपोर्ट होगा और पूरी क्षमता से शुरू होने के बाद एशिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट्स में अपनी जगह बना सकता है। अनुमान है कि भविष्य में यह सालाना करीब 225 मिलियन यात्रियों की आवाजाही संभालने में सक्षम होगा। इतनी बड़ी क्षमता वाला एयरपोर्ट केवल विमानन सुविधाओं को ही नहीं बढ़ाएगा, बल्कि इसके जरिए आर्थिक गतिविधियों, शहरी विस्तार और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को भी नई मजबूती मिलेगी। Jewar Airport